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Meerut News: एसटीपी के संचालन के लिए मेडा निगम को देगा 26 करोड़
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लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बाद आखिरकार 13 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) से नगर निगम को हस्तांतरित करने का फैसला बोर्ड बैठक में हो गया है। अगले 15 दिनों के भीतर ये सभी एसटीपी नगर निगम को सौंप दिए जाएंगे। मेडा को एसटीपी के संचालन एवं मेंटेनेंस के लिए अगले तीन वर्षों तक कुल 26.25 करोड़ रुपये नगर निगम को देने होंगे।
पहले वर्ष में 15 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में 50 प्रतिशत यानी 7.50 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में 25 प्रतिशत यानी 3.75 करोड़ रुपये देने की व्यवस्था तय की गई है। इन्हीं शर्तों के आधार पर ही नगर निगम ने एसटीपी अपने अधीन लेने की सहमति दी है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि एसटीपी का संचालन एक तकनीकी और संसाधन आधारित प्रक्रिया है जिसके लिए पर्याप्त मैनपावर के साथ इंजीनियर की आवश्यकता होती है। ऐसे में बिना वित्तीय सहयोग के इन प्लांट को चलाना निगम के लिए चुनौतीपूर्ण होता। इसी वजह से मेडा के सामने यह शर्त रखी गई थी।
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नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि वर्तमान में एसटीपी के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है जिसका मेडा के साथ एक वर्ष का अनुबंध है। हस्तांतरण के बाद वही कंपनी कार्य करती रहेगी और नगर निगम उसके माध्यम से संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। बताया जा रहा है कि एसटीपी हस्तांतरण का मुद्दा काफी समय से लंबित था और इसे लेकर दोनों संस्थाओं के बीच कई दौर की बैठकों और चर्चा के बाद सहमति बन पाई है। मेडा की बोर्ड बैठक में कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी द्वारा लिए गए निर्णय को अंतिम रूप देते हुए इस पर मुहर लगाई गई।
सीवर लाइन भी चोक
एसटीपी को संचालित करना नगर निगम के सामने चुनौती बन सकता है। क्योंकि शहर की अधिकांश सीवर लाइन कई सालों से चोक है। कई जगह तो सीवर लाइन ही गायब है। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन एसटीपी मेडा संचालित करता था इसको लेकर निगम ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब एसटीपी निगम में हस्तांतरण हो गया है लेकिन यह चुनौती बन सकता है।
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पहले वर्ष में 15 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में 50 प्रतिशत यानी 7.50 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में 25 प्रतिशत यानी 3.75 करोड़ रुपये देने की व्यवस्था तय की गई है। इन्हीं शर्तों के आधार पर ही नगर निगम ने एसटीपी अपने अधीन लेने की सहमति दी है।
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नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि एसटीपी का संचालन एक तकनीकी और संसाधन आधारित प्रक्रिया है जिसके लिए पर्याप्त मैनपावर के साथ इंजीनियर की आवश्यकता होती है। ऐसे में बिना वित्तीय सहयोग के इन प्लांट को चलाना निगम के लिए चुनौतीपूर्ण होता। इसी वजह से मेडा के सामने यह शर्त रखी गई थी।
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नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि वर्तमान में एसटीपी के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है जिसका मेडा के साथ एक वर्ष का अनुबंध है। हस्तांतरण के बाद वही कंपनी कार्य करती रहेगी और नगर निगम उसके माध्यम से संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। बताया जा रहा है कि एसटीपी हस्तांतरण का मुद्दा काफी समय से लंबित था और इसे लेकर दोनों संस्थाओं के बीच कई दौर की बैठकों और चर्चा के बाद सहमति बन पाई है। मेडा की बोर्ड बैठक में कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी द्वारा लिए गए निर्णय को अंतिम रूप देते हुए इस पर मुहर लगाई गई।
सीवर लाइन भी चोक
एसटीपी को संचालित करना नगर निगम के सामने चुनौती बन सकता है। क्योंकि शहर की अधिकांश सीवर लाइन कई सालों से चोक है। कई जगह तो सीवर लाइन ही गायब है। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन एसटीपी मेडा संचालित करता था इसको लेकर निगम ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब एसटीपी निगम में हस्तांतरण हो गया है लेकिन यह चुनौती बन सकता है।