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जन आरोग्य योजना पर वार, परेशान होंगे 40 हजार परिवार
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- मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को लगा पलीता, मचा हड़कंप
- भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने ही उठाए स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
- एक मार्च से होनी थी शुरू, नहीं बन सके गोल्डन कार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्रदेश में शुरू होने वाली मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को मेरठ में पलीता लग गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। इस योजना का प्रचार प्रसार न होने के कारण अधिकांश लाभार्थियों को पता ही नहीं है कि वह इस योजना में शामिल हैं या नहीं।
दरअसल, आयुष्मान योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू होनी है। इसमें भी पांच लाख तक का इलाज का खर्च मिलना है। स्वास्थ्य विभाग से ऐसे लोगों को सूची तैयार कराई गई थी जो आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए, लेकिन वह इस योजना के पात्र होने की कैटेगिरी में आते हैं। ऐसे करीब 40 हजार परिवार चिह्नित किए गए हैं। इस योजना का लाभ एक मार्च 2019 से इन परिवारों को मिलना था।
सोमवार को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया योजना के तहत मेरठ स्वास्थ्य विभाग द्वारा 31 हजार फार्म अपलोड किए गए और नौ हजार फार्म रोक लिए गए, जबकि सभी 40 हजार फार्म अपलोड होने थे। आरोप है कि यह सर्वे सीएचसी प्रभारी (एमओआईसी) द्वारा आशा बहुओं के माध्यम से कराया गया। बाद में अपने हस्ताक्षर से बिना किसी जांच के प्रमाणित कर दिया गया। बिना सैंपल जांच और सत्यापन के पांच लाख तक की चिकित्सा का लाभ अपात्रों को देना न्याय संगत नहीं है। यह शासन के धन का अपव्यय है।
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आचार संहिता से पहले बंटने थे गोल्डन कार्ड
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री के रंगीन छपे पत्र नाम सहित जिप फाइल और पासवर्ड प्रोटेक्टेड आने थे। यह सब आचार संहिता से पहले करना था। यही पत्र इस योजना का गोल्डन कार्ड के रूप में मान्य है। जो नहीं बांटे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 हजार अपलोड किए गए फार्म सीएमओ ऑफिस में उपलब्ध भी नहीं हैं।
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एक मार्च से ही मिलेगा लाभ : एसीएमओ
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पूजा शर्मा का कहना है कि इस योजना के लाभार्थियों को इसका लाभ एक मार्च से ही मिलेगा। गोल्डन कार्ड न होने से उनके इलाज में कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऐसे लोग राज्य की इस योजना का लाभ उन्हीं अस्पतालों में करवा सकते हैं, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा रहे हैं। वहां जाकर पता भी कर सकते हैं। दोनों योजनाओं को आपस में जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि सारे फार्म अपलोड किए गए हैं, और अपलोड किए गए फार्म अपने-अपने क्षेत्र की सीएचसी पर हैं, न कि सीएमओ ऑफिस। इसके अलावा इस संबंध में शासन से जो ईमेल आया है, वह आठ मार्च की शाम छह बजे के बाद का है। तभी से इस पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की लगी है फोटो, नहीं बांट सकेंगे गोल्डन कार्ड
इस योजना के तहत जो गोल्डन कार्ड बनेंगे, उनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो लगी है। लिहाजा चुनाव आचार संहिता लगने के कारण अब इन्हें लाभार्थियों को बांटा नहीं जा सकेगा। भाजपा पदाधिकारियों की नाराजगी की एक वजह यह भी है।
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- भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने ही उठाए स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
- एक मार्च से होनी थी शुरू, नहीं बन सके गोल्डन कार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्रदेश में शुरू होने वाली मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को मेरठ में पलीता लग गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच हुआ है। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। इस योजना का प्रचार प्रसार न होने के कारण अधिकांश लाभार्थियों को पता ही नहीं है कि वह इस योजना में शामिल हैं या नहीं।
दरअसल, आयुष्मान योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू होनी है। इसमें भी पांच लाख तक का इलाज का खर्च मिलना है। स्वास्थ्य विभाग से ऐसे लोगों को सूची तैयार कराई गई थी जो आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए, लेकिन वह इस योजना के पात्र होने की कैटेगिरी में आते हैं। ऐसे करीब 40 हजार परिवार चिह्नित किए गए हैं। इस योजना का लाभ एक मार्च 2019 से इन परिवारों को मिलना था।
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सोमवार को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया योजना के तहत मेरठ स्वास्थ्य विभाग द्वारा 31 हजार फार्म अपलोड किए गए और नौ हजार फार्म रोक लिए गए, जबकि सभी 40 हजार फार्म अपलोड होने थे। आरोप है कि यह सर्वे सीएचसी प्रभारी (एमओआईसी) द्वारा आशा बहुओं के माध्यम से कराया गया। बाद में अपने हस्ताक्षर से बिना किसी जांच के प्रमाणित कर दिया गया। बिना सैंपल जांच और सत्यापन के पांच लाख तक की चिकित्सा का लाभ अपात्रों को देना न्याय संगत नहीं है। यह शासन के धन का अपव्यय है।
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आचार संहिता से पहले बंटने थे गोल्डन कार्ड
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री के रंगीन छपे पत्र नाम सहित जिप फाइल और पासवर्ड प्रोटेक्टेड आने थे। यह सब आचार संहिता से पहले करना था। यही पत्र इस योजना का गोल्डन कार्ड के रूप में मान्य है। जो नहीं बांटे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 हजार अपलोड किए गए फार्म सीएमओ ऑफिस में उपलब्ध भी नहीं हैं।
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एक मार्च से ही मिलेगा लाभ : एसीएमओ
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पूजा शर्मा का कहना है कि इस योजना के लाभार्थियों को इसका लाभ एक मार्च से ही मिलेगा। गोल्डन कार्ड न होने से उनके इलाज में कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऐसे लोग राज्य की इस योजना का लाभ उन्हीं अस्पतालों में करवा सकते हैं, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा रहे हैं। वहां जाकर पता भी कर सकते हैं। दोनों योजनाओं को आपस में जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि सारे फार्म अपलोड किए गए हैं, और अपलोड किए गए फार्म अपने-अपने क्षेत्र की सीएचसी पर हैं, न कि सीएमओ ऑफिस। इसके अलावा इस संबंध में शासन से जो ईमेल आया है, वह आठ मार्च की शाम छह बजे के बाद का है। तभी से इस पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की लगी है फोटो, नहीं बांट सकेंगे गोल्डन कार्ड
इस योजना के तहत जो गोल्डन कार्ड बनेंगे, उनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो लगी है। लिहाजा चुनाव आचार संहिता लगने के कारण अब इन्हें लाभार्थियों को बांटा नहीं जा सकेगा। भाजपा पदाधिकारियों की नाराजगी की एक वजह यह भी है।