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मेरठ के साथ धोखा, सभी सुविधाएं फिर भी निचले पायदान पर
Updated Wed, 15 Aug 2018 03:00 AM IST
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मेरठ। मेरठ के साथ हर बार धोखा हो रहा है। जहां स्मार्ट सिटी चयन प्रक्रिया में मेरठ को प्रत्येक परीक्षा में फेल किया गया, वहीं अब शहरी विकास मंत्रालय की ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में भी मेरठ को निचले पायदान पर खड़ा किया गया है। जबकि एनसीआर में मेरठ किसी भी क्षेत्र में पिछड़ा हुआ नहीं है। इससे सर्वे पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। कारण है कि जिन बिंदुओं पर सुविधाएं अच्छी हैं, उन्हीं में मेरठ को निचले पायदान की तरफ धकेला गया है।
भारत सरकार ने देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रतियोगिता करायी थी। जिसमें मेरठ ने प्रत्येक प्रतियोगिता में बढ़-़चढ़कर हिस्सा लिया था। मेरठ की जनता ने तो स्मार्ट सिटी प्रतियोगिता में उत्सव की तरफ भाग लिया था। दिन-रात एक करके वोटिंग की और सभी जनप्रतिनिधि भी प्रचार प्रसार में जुटे थे। एक के बाद एक परीक्षा हुई और 100 स्मार्ट शहरों का चयन होता चला गया। लेकिन मेरठ को मायूसी ही हाथ लगी। अभी भी कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार कुछ और शहर स्मार्ट सिटी बनाने की बात करती रहती है। हालांकि सरकारों की इस घोषणाओं पर महानगर की जनता विश्वास करने को तैयार नहीं है।
अब इस सर्वे ने बढ़ाया दर्द
शहरी विकास मंत्रालय ने अपने तरीके से एक नया सर्वे कराया। जिसकी रिपोर्ट शहरी विकास मंत्रालय की ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स पर सार्वजनिक की गयी। मेरठ को शिक्षा का हब कहा जाता है। महानगर में जलापूर्ति में भी किसी से पीछे नहीं है। बिजली आपूर्ति और मिक्स भूमि यूज में भी मेरठ अपनी पहचान रखता है। उसके बाद भी मेरठ को शिक्षण संस्थानों पर 105वां स्थान, जलापूर्ति पर 109वां स्थान, बिजली आपूर्ति पर 100वां स्थान, सरकारी तंत्र पर 101वां स्थान दिया गया है। जबकि मिश्रित भूमि प्रयोग पर मेरठ को 13वां स्थान दिया गया है। इसी के आधार पर मेरठ की जनता अपने शहर के साथ धोखे का मूल्यांकन कर रही है। क्योंकि जो सुविधा मेरठ महानगर में अपार हैं उन पर तो शहर को अंतिम पायदान पर रखा गया है। हालांकि कूड़ा निस्तारण पर 110वें स्थान पर मेरठ को रखे जाने पर किसी को एतराज नहीं है।
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मेरठ से हो रहा अन्याय
सर्वे किस आधार पर किया गया है, पता नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि मेरठ के साथ अन्याय हो रहा है। -विजय आनंद अग्रवाल, पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता
हम तेजी दिखाएंगे
सर्वे रिपोर्ट हमने देखी नहीं है। भारत सरकार की कई एजेंसियां सर्वे कर रही थीं। जहां हम पीछे रहे हैं, उन पर तेजी से कार्य किया जाएगा। ताकि अगले साल कम से कम टॉप 20 में मेरठ का नाम शामिल हो। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
खास बातें:
सर्वे पर सवालिया निशान
- शहरी विकास मंत्रालय की ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में मेरठ की रेटिंग पर भी सवाल
- एनसीआर में मेरठ शिक्षा का हब, लेकिन देश के 111 शहरों में 105 का स्थान
- खपत से अधिक जलापूर्ति फिर भी 109वें नंबर पर
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भारत सरकार ने देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रतियोगिता करायी थी। जिसमें मेरठ ने प्रत्येक प्रतियोगिता में बढ़-़चढ़कर हिस्सा लिया था। मेरठ की जनता ने तो स्मार्ट सिटी प्रतियोगिता में उत्सव की तरफ भाग लिया था। दिन-रात एक करके वोटिंग की और सभी जनप्रतिनिधि भी प्रचार प्रसार में जुटे थे। एक के बाद एक परीक्षा हुई और 100 स्मार्ट शहरों का चयन होता चला गया। लेकिन मेरठ को मायूसी ही हाथ लगी। अभी भी कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार कुछ और शहर स्मार्ट सिटी बनाने की बात करती रहती है। हालांकि सरकारों की इस घोषणाओं पर महानगर की जनता विश्वास करने को तैयार नहीं है।
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अब इस सर्वे ने बढ़ाया दर्द
शहरी विकास मंत्रालय ने अपने तरीके से एक नया सर्वे कराया। जिसकी रिपोर्ट शहरी विकास मंत्रालय की ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स पर सार्वजनिक की गयी। मेरठ को शिक्षा का हब कहा जाता है। महानगर में जलापूर्ति में भी किसी से पीछे नहीं है। बिजली आपूर्ति और मिक्स भूमि यूज में भी मेरठ अपनी पहचान रखता है। उसके बाद भी मेरठ को शिक्षण संस्थानों पर 105वां स्थान, जलापूर्ति पर 109वां स्थान, बिजली आपूर्ति पर 100वां स्थान, सरकारी तंत्र पर 101वां स्थान दिया गया है। जबकि मिश्रित भूमि प्रयोग पर मेरठ को 13वां स्थान दिया गया है। इसी के आधार पर मेरठ की जनता अपने शहर के साथ धोखे का मूल्यांकन कर रही है। क्योंकि जो सुविधा मेरठ महानगर में अपार हैं उन पर तो शहर को अंतिम पायदान पर रखा गया है। हालांकि कूड़ा निस्तारण पर 110वें स्थान पर मेरठ को रखे जाने पर किसी को एतराज नहीं है।
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मेरठ से हो रहा अन्याय
सर्वे किस आधार पर किया गया है, पता नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि मेरठ के साथ अन्याय हो रहा है। -विजय आनंद अग्रवाल, पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता
हम तेजी दिखाएंगे
सर्वे रिपोर्ट हमने देखी नहीं है। भारत सरकार की कई एजेंसियां सर्वे कर रही थीं। जहां हम पीछे रहे हैं, उन पर तेजी से कार्य किया जाएगा। ताकि अगले साल कम से कम टॉप 20 में मेरठ का नाम शामिल हो। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
खास बातें:
सर्वे पर सवालिया निशान
- शहरी विकास मंत्रालय की ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में मेरठ की रेटिंग पर भी सवाल
- एनसीआर में मेरठ शिक्षा का हब, लेकिन देश के 111 शहरों में 105 का स्थान
- खपत से अधिक जलापूर्ति फिर भी 109वें नंबर पर