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निपटाना होगा शताब्दीनगर योजना का मसला
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:28 AM IST
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शताब्दी नगर से पाएं पार तो नई योजनाओं को मिले विस्तार
- शताब्दीनगर प्रकरण न निपटने से नई योजनाओं की मंशा भी नहीं होगी पूरी
- एमडीए कर रहा नई तैयारी पर शताब्दीनगर में ही फंसे है तीन हजार आवंटी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण काफी समय से कोई नई योजना लांच नहीं कर सका है। अब फिर से इसकी कवायद शुरू हुई है। लेकिन नई योजनाओं को एमडीए में तभी विस्तार मिलेगा जब पुरानी समस्या का निदान होगा। शताब्दीनगर में ही एमडीए के तीन हजार आवंटी ऐसे फंसे हैं, जिनकी समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यहां किसान तीन साल से धरने पर हैं। एमडीए को इसका निस्तारण करना होगा तभी बात आगे बढ़ेगी।
अभी तक फंसे मुआवजों के प्रकरण
इस योजना में भू अधिग्रहण सन् 1987 में हुआ था। लेकिन मुआवजा संबंधी मामलों का निस्तारण अभी तक नहीं हो पाया है। दरअसल आठ अप्रैल 2011 को समझौता हुआ कि नंगला शेख, कंचनपुर घोपला, कांशी जिनका मूल अवार्ड 20 रुपये था, उनका अतिरिक्त प्रतिकर 690 रुपये तय कर दिया गया। रिठानी का मूल अवार्ड 50 रुपये था। उसका अतिरिक्त प्रतिकर 584 रुपये तय किया गया। बाद में कई बार मामला तूल पकड़ता रहा और किसानों को पैसा दिया गया। अब पिछले तीन साल से किसान धरने पर हैं। किसानों का कहना है कि इन गांवों पर भू अर्जन पुनर्वासन और पुनर्स्थापन्न में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 लागू होता है। उनका दावा है कि पांच वर्ष तक यदि अधिग्रहीत जमीन पर किसानों का ही कब्जा है तो वह किसानों की मानी जाएगी। उसका दोबारा से अधिग्रहण नई नीति से किया जाएगा।
फंस गए आवंटी
उधर, एमडीए को जमीन पर कब्जा मिला नहीं और एमडीए ने यहां भूखंडों का आवंटन कर दिया। वैसे तो यह संख्या पांच हजार है। लेकिन तीन हजार आवंटी तो ऐेसे हैं जो पैसा भी दे चुके हैं और योजनाओं पर कब्जा नहीं है। ऐसे आवंटी यहां फंसकर रह गए हैं।
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करना होगा निदान
एमडीए नई योजनाओं के लिए अब जगह तलाश रहा है। लैंड पूलिंग की कवायद चल रही है। इसकी बजाय पहले इस योजना को बहाल करना होगा। शताब्दीनगर की लोकेशन ऐसी है जो भविष्य का शहर डेवलेप करेगी। यह प्रस्तावित दिल्ली एक्सप्रेस वे के पास है। साथ ही प्रस्तावित रैपिड ट्रेन के एलाइनमेंट के पास है। दिल्ली से सबसे शानदार कनेक्टिवटी इसी क्षेत्र की है। ऐेसे में एमडीए को समस्याओं का निदान करना होगा। किसान नेता विजयपाल घोपला कहते हैं कि किसान तो समझौते को तैयार हैं पर पैसा तो उचित मिले। जब तक सही पैसा नहीं मिलेगा किसान जमीन पर कब्जा छोड़ने वाले नहीं है।
यूं चला था प्रकरण
- 1987 में चार योजनाआें के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ था
- 2001 में शासन ने आदेश दिया कि किसानों विशेष से मुआवजा तय कराया जाए और किसानों के साथ वार्ता कर समझौैता किया जाए।
- गंगानगर का 270, वेदव्यासपुरी का 245, लोहियानगर का 261 व रिठानी का 272 रुपये की दर से समझौता हुआ।
- जिला एवं सत्र न्यायालय ने पौने चार सौ केस सुने और कहा कि दो रुपये से सात रुपये की दर से मुआवजा बढ़ाया जाए।
- 2011 में समझौता कर अतिरिक्त प्रतिकर दिया गया।
- एक हजार किसानों की जमीन का हुआ अधिग्रहण
- 1830.65 एकड़ में फैला है शताब्दीनगर
- करीब तीन सौ रुपये प्रति मीटर बांटा गया मुआवजा
- 1990 में 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से हुआ था अवार्ड
- उसके बाद 165 रुपये दिया गया मुआवजा
- बाद में फिर 261 रुपये की दर से प्रतिकर तय किया पर नहीं दिया गया
- 2011 में 690 रुपये की दर से अतिरिक्त अनुग्रह राशि पिछली रकम काटकर दी गई
वर्जन
शासन स्तर पर ही इस मामले का निर्णय हो सकता है। यह सही है कि यह योजना शहर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास है कि इस मसले का समाधान हो जाए- साहब सिंह वीसी एमडीए
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- शताब्दीनगर प्रकरण न निपटने से नई योजनाओं की मंशा भी नहीं होगी पूरी
- एमडीए कर रहा नई तैयारी पर शताब्दीनगर में ही फंसे है तीन हजार आवंटी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण काफी समय से कोई नई योजना लांच नहीं कर सका है। अब फिर से इसकी कवायद शुरू हुई है। लेकिन नई योजनाओं को एमडीए में तभी विस्तार मिलेगा जब पुरानी समस्या का निदान होगा। शताब्दीनगर में ही एमडीए के तीन हजार आवंटी ऐसे फंसे हैं, जिनकी समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यहां किसान तीन साल से धरने पर हैं। एमडीए को इसका निस्तारण करना होगा तभी बात आगे बढ़ेगी।
अभी तक फंसे मुआवजों के प्रकरण
इस योजना में भू अधिग्रहण सन् 1987 में हुआ था। लेकिन मुआवजा संबंधी मामलों का निस्तारण अभी तक नहीं हो पाया है। दरअसल आठ अप्रैल 2011 को समझौता हुआ कि नंगला शेख, कंचनपुर घोपला, कांशी जिनका मूल अवार्ड 20 रुपये था, उनका अतिरिक्त प्रतिकर 690 रुपये तय कर दिया गया। रिठानी का मूल अवार्ड 50 रुपये था। उसका अतिरिक्त प्रतिकर 584 रुपये तय किया गया। बाद में कई बार मामला तूल पकड़ता रहा और किसानों को पैसा दिया गया। अब पिछले तीन साल से किसान धरने पर हैं। किसानों का कहना है कि इन गांवों पर भू अर्जन पुनर्वासन और पुनर्स्थापन्न में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 लागू होता है। उनका दावा है कि पांच वर्ष तक यदि अधिग्रहीत जमीन पर किसानों का ही कब्जा है तो वह किसानों की मानी जाएगी। उसका दोबारा से अधिग्रहण नई नीति से किया जाएगा।
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फंस गए आवंटी
उधर, एमडीए को जमीन पर कब्जा मिला नहीं और एमडीए ने यहां भूखंडों का आवंटन कर दिया। वैसे तो यह संख्या पांच हजार है। लेकिन तीन हजार आवंटी तो ऐेसे हैं जो पैसा भी दे चुके हैं और योजनाओं पर कब्जा नहीं है। ऐसे आवंटी यहां फंसकर रह गए हैं।
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करना होगा निदान
एमडीए नई योजनाओं के लिए अब जगह तलाश रहा है। लैंड पूलिंग की कवायद चल रही है। इसकी बजाय पहले इस योजना को बहाल करना होगा। शताब्दीनगर की लोकेशन ऐसी है जो भविष्य का शहर डेवलेप करेगी। यह प्रस्तावित दिल्ली एक्सप्रेस वे के पास है। साथ ही प्रस्तावित रैपिड ट्रेन के एलाइनमेंट के पास है। दिल्ली से सबसे शानदार कनेक्टिवटी इसी क्षेत्र की है। ऐेसे में एमडीए को समस्याओं का निदान करना होगा। किसान नेता विजयपाल घोपला कहते हैं कि किसान तो समझौते को तैयार हैं पर पैसा तो उचित मिले। जब तक सही पैसा नहीं मिलेगा किसान जमीन पर कब्जा छोड़ने वाले नहीं है।
यूं चला था प्रकरण
- 1987 में चार योजनाआें के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ था
- 2001 में शासन ने आदेश दिया कि किसानों विशेष से मुआवजा तय कराया जाए और किसानों के साथ वार्ता कर समझौैता किया जाए।
- गंगानगर का 270, वेदव्यासपुरी का 245, लोहियानगर का 261 व रिठानी का 272 रुपये की दर से समझौता हुआ।
- जिला एवं सत्र न्यायालय ने पौने चार सौ केस सुने और कहा कि दो रुपये से सात रुपये की दर से मुआवजा बढ़ाया जाए।
- 2011 में समझौता कर अतिरिक्त प्रतिकर दिया गया।
- एक हजार किसानों की जमीन का हुआ अधिग्रहण
- 1830.65 एकड़ में फैला है शताब्दीनगर
- करीब तीन सौ रुपये प्रति मीटर बांटा गया मुआवजा
- 1990 में 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से हुआ था अवार्ड
- उसके बाद 165 रुपये दिया गया मुआवजा
- बाद में फिर 261 रुपये की दर से प्रतिकर तय किया पर नहीं दिया गया
- 2011 में 690 रुपये की दर से अतिरिक्त अनुग्रह राशि पिछली रकम काटकर दी गई
वर्जन
शासन स्तर पर ही इस मामले का निर्णय हो सकता है। यह सही है कि यह योजना शहर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास है कि इस मसले का समाधान हो जाए- साहब सिंह वीसी एमडीए