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बाल गृह की जांच में बड़ों को बचाने की तैयारी
Updated Tue, 25 Sep 2018 02:32 AM IST
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बाल गृह की जांच में बड़ों को बचाने की तैयारी
मेरठ। राजकीय बाल गृह में बालक से कुकर्म के मामले की जांच को लेकर उठे सवालों के बीच अब तक कार्रवाई तय न होने से बड़ों को बचाने की चर्चा तेज हो रही है। इस मामले में सिर्फ मुख्य आरोपी जो कि संविदा कर्मचारी था, उसके खिलाफ ही कार्रवाई तय हुई है। जबकि वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
राजकीय बाल संरक्षण गृह सूरजकुंड में रहने वाले एक बालक के साथ बाल गृह के केयर टेकर जावेद (संविदा कर्मचारी) ने कुकर्म किया था। जावेद इस बालक के साथ जुलाई से कुकर्म करता आ रहा था। इस बीच जब अगस्त में मजिस्ट्रेट राजकीय बाल गृह पहुंचे तो उक्त बालक ने इसकी शिकायत की। बालक ने बताया कि वह मामले की जानकारी बालगृह के अधीक्षक को कई बार दी, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर मजिस्ट्रेट ने डीएम से वार्ता कर तत्काल इसकी जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीएम अनिल ढींगरा ने एसीएम सदर अमिताभ यादव से प्राथमिक जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसी आधार पर आरोपी केयर टेकर के खिलाफ नौचंदी थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी गई और 24 अगस्त को उक्त आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन पुलिस प्रशासन मामले को पूरी तरह दबाए रहा।
एक सितंबर को इस मामले का खुलासा होने पर दो सितंबर को सहारनपुर के डिप्टी सीपीओ पुष्पेंद्र सिंह जांच करने बाल गृह पहुंचे। वहीं दो सितंबर को देर रात में लखनऊ से बाल विकास विभाग के उपनिदेशक बीके निरंजन भी टीम के साथ जांच के लिए पहुंचे। इस टीम ने दो दिन तक जांच की और अपनी अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करके ले गए।
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नहीं हुई अब तक कार्रवाई
बालगृह की जांच हुए तीन सप्ताह हो चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता जो कि पूरे मामले पर एक सितंबर तक यही बोलते रहे कि उनकी जानकारी में कुछ नहीं है, उनकी लापरवाही प्रथम दृष्टया इस मामले में सामने आई। इसके अलावा बालगृह के प्रभारी अधीक्षक अय्यूब हसन, जिनको आरोपी मानते हुए रिपोर्ट में नामजद किया गया था। उनके खिलाफ भी सिर्फ ट्रांसफर की कार्रवाई तय हुई। वहीं सूत्रों के अनुसार जब जांच के दौरान डीपीओ और प्रभारी अधीक्षक दोनों लगातार जांच अधिकारियाें के साथ मौजूद रहे। तभी यह तय हो गया था कि दोनों को बचाने के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है। अब जांच हुए तीन सप्ताह गुजर गए हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
शासन स्तर से तय होगी कार्रवाई
बालगृह प्रकरण में मेरे स्तर पर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। विभागीय जांच में क्या रहा और क्या कार्रवाई प्रस्तावित है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह शासन के संबंधित विभाग स्तर से तय होनी है। अनिल ढींगरा, डीएम
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मेरठ। राजकीय बाल गृह में बालक से कुकर्म के मामले की जांच को लेकर उठे सवालों के बीच अब तक कार्रवाई तय न होने से बड़ों को बचाने की चर्चा तेज हो रही है। इस मामले में सिर्फ मुख्य आरोपी जो कि संविदा कर्मचारी था, उसके खिलाफ ही कार्रवाई तय हुई है। जबकि वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
राजकीय बाल संरक्षण गृह सूरजकुंड में रहने वाले एक बालक के साथ बाल गृह के केयर टेकर जावेद (संविदा कर्मचारी) ने कुकर्म किया था। जावेद इस बालक के साथ जुलाई से कुकर्म करता आ रहा था। इस बीच जब अगस्त में मजिस्ट्रेट राजकीय बाल गृह पहुंचे तो उक्त बालक ने इसकी शिकायत की। बालक ने बताया कि वह मामले की जानकारी बालगृह के अधीक्षक को कई बार दी, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर मजिस्ट्रेट ने डीएम से वार्ता कर तत्काल इसकी जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीएम अनिल ढींगरा ने एसीएम सदर अमिताभ यादव से प्राथमिक जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसी आधार पर आरोपी केयर टेकर के खिलाफ नौचंदी थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी गई और 24 अगस्त को उक्त आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन पुलिस प्रशासन मामले को पूरी तरह दबाए रहा।
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एक सितंबर को इस मामले का खुलासा होने पर दो सितंबर को सहारनपुर के डिप्टी सीपीओ पुष्पेंद्र सिंह जांच करने बाल गृह पहुंचे। वहीं दो सितंबर को देर रात में लखनऊ से बाल विकास विभाग के उपनिदेशक बीके निरंजन भी टीम के साथ जांच के लिए पहुंचे। इस टीम ने दो दिन तक जांच की और अपनी अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करके ले गए।
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नहीं हुई अब तक कार्रवाई
बालगृह की जांच हुए तीन सप्ताह हो चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता जो कि पूरे मामले पर एक सितंबर तक यही बोलते रहे कि उनकी जानकारी में कुछ नहीं है, उनकी लापरवाही प्रथम दृष्टया इस मामले में सामने आई। इसके अलावा बालगृह के प्रभारी अधीक्षक अय्यूब हसन, जिनको आरोपी मानते हुए रिपोर्ट में नामजद किया गया था। उनके खिलाफ भी सिर्फ ट्रांसफर की कार्रवाई तय हुई। वहीं सूत्रों के अनुसार जब जांच के दौरान डीपीओ और प्रभारी अधीक्षक दोनों लगातार जांच अधिकारियाें के साथ मौजूद रहे। तभी यह तय हो गया था कि दोनों को बचाने के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है। अब जांच हुए तीन सप्ताह गुजर गए हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
शासन स्तर से तय होगी कार्रवाई
बालगृह प्रकरण में मेरे स्तर पर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। विभागीय जांच में क्या रहा और क्या कार्रवाई प्रस्तावित है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह शासन के संबंधित विभाग स्तर से तय होनी है। अनिल ढींगरा, डीएम