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रिश्ते को रिश्तेदारी में बदलती कांवड़
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:28 AM IST
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मेहरमती मीणा जाति के लोग इस दौरान तय करते हैं युवक-युवतियों के रिश्ते
तहसील से प्रमाण-पत्र नहीं बनाए जाने पर इस रिवाज में आ रही शिथिलता
अशोक सोम
सरधना। जैसे हर साल शिवभक्तों को कांवड़ का इंतजार रहता है। वैसे ही गंगनहर पटरी किनारे बसे गांव मेहरमती के लोगों को सावन में राजस्थान से कांवड़ लेकर आने वाले अपने सगे संबंधियों का इंतजार रहता है। पूरे साल चाहे उनकी मुलाकात न हो, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान उनके मिलन का यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। यह इसलिए भी खास होता है क्योंकि इस दौरान ये लोग युवक-युवतियों के शादी संबंधों की भी चर्चा कर लेते हैं।
क्षेत्र में गंगनहर पटरी किनारे बसे मेहरमती गांव में मीणा जाति के लोग रहते हैं। दशकों पहले गंगनहर खुदाई के दौरान राजस्थान के सलौना, सवाई माधोपुर, बाड़, बसौली, हिंडन करौली के मीणा जाति के लोग यहां आए थे। नहर तैयार होने के बाद कुछ लोग लौट गए और कुछ यहीं बस गए। उसके बाद से इस जाति के लोगों का अपने सगे संबंधियों से मिलने का बहाना बनी है कांवड़ यात्रा।
मेहरमती के शिविर में रुकते हैं जरूर
हरिद्वार कांवड़ लाने के लिए राजस्थान के मीणा समाज के लोग जाते हैं। वे लौटते समय मेहरमती के कांवड़ सेवा शिविर में जरूर रुकते हैं। ये अपनों से हालचाल जाने बिना मंजिल की तरफ कदम नहीं बढ़ाते हैं। राजस्थान के मीणा समाज के कांवड़ियों के कई जत्थे बृहस्पतिवार को गुजरे। वे कांवड़ सेवा शिविर में रुके और अपनों का हालचाल जाना। इस दौरान जगदीश मीणा ग्राम सलौना सवाई माधोपुर, भीम सिंह मीणा, सौंप सिंह मीणा सवाई माधोपुर, आशीष मीणा जयपुर, मुकेश मीणा गंगापुर, रामखिलाड़ी मीणा बाड़ बासौली, घमंडीलाल मीणा एवं लालाराम मीणा आदि शामिल रहे।
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शिविर में तय कर दी शादी
मेहरमती गांव के सेवा शिविर में बाबूराम मीणा, रामकुमार मीणा, आनंद मीणा, बिजेंद्र मीणा, सुनील, छोटे मीणा, जगपाल, सरजू, गाजू मीणा आदि ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने एक युवक का रिश्ता भी पक्का कर दिया। इसमें गांव निवासी तेजवीर मीणा को राजस्थान के गांव करौली निवासी घमंडी मीणा ने अपनी पुत्री के लिए पसंद किया। कांवड़ यात्रा के बाद वह बेटी की सगाई तेजवीर से पक्की करेंगे। मेहरमती मीणा निवासी रामकुमार मीणा ने बताया कि जब से तहसील में उनकी जाति के प्रमाण पत्र बनने में रुकावट आने लगी है, तब से राजस्थान के उनके समाज के लोग यहां पर लड़की का रिश्ता करने से पीछे हटने लगे हैं। वरना प्रतिवर्ष काफी रिश्ते उधर से होते थे। अब कांवड़ यात्रा के दौरान ही एक-दो रिश्ता हर साल तय हो पाता है। प्रतिवर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान अपनों से एक बार मिलन जरूर हो जाता है।
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तहसील से प्रमाण-पत्र नहीं बनाए जाने पर इस रिवाज में आ रही शिथिलता
अशोक सोम
सरधना। जैसे हर साल शिवभक्तों को कांवड़ का इंतजार रहता है। वैसे ही गंगनहर पटरी किनारे बसे गांव मेहरमती के लोगों को सावन में राजस्थान से कांवड़ लेकर आने वाले अपने सगे संबंधियों का इंतजार रहता है। पूरे साल चाहे उनकी मुलाकात न हो, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान उनके मिलन का यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। यह इसलिए भी खास होता है क्योंकि इस दौरान ये लोग युवक-युवतियों के शादी संबंधों की भी चर्चा कर लेते हैं।
क्षेत्र में गंगनहर पटरी किनारे बसे मेहरमती गांव में मीणा जाति के लोग रहते हैं। दशकों पहले गंगनहर खुदाई के दौरान राजस्थान के सलौना, सवाई माधोपुर, बाड़, बसौली, हिंडन करौली के मीणा जाति के लोग यहां आए थे। नहर तैयार होने के बाद कुछ लोग लौट गए और कुछ यहीं बस गए। उसके बाद से इस जाति के लोगों का अपने सगे संबंधियों से मिलने का बहाना बनी है कांवड़ यात्रा।
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मेहरमती के शिविर में रुकते हैं जरूर
हरिद्वार कांवड़ लाने के लिए राजस्थान के मीणा समाज के लोग जाते हैं। वे लौटते समय मेहरमती के कांवड़ सेवा शिविर में जरूर रुकते हैं। ये अपनों से हालचाल जाने बिना मंजिल की तरफ कदम नहीं बढ़ाते हैं। राजस्थान के मीणा समाज के कांवड़ियों के कई जत्थे बृहस्पतिवार को गुजरे। वे कांवड़ सेवा शिविर में रुके और अपनों का हालचाल जाना। इस दौरान जगदीश मीणा ग्राम सलौना सवाई माधोपुर, भीम सिंह मीणा, सौंप सिंह मीणा सवाई माधोपुर, आशीष मीणा जयपुर, मुकेश मीणा गंगापुर, रामखिलाड़ी मीणा बाड़ बासौली, घमंडीलाल मीणा एवं लालाराम मीणा आदि शामिल रहे।
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शिविर में तय कर दी शादी
मेहरमती गांव के सेवा शिविर में बाबूराम मीणा, रामकुमार मीणा, आनंद मीणा, बिजेंद्र मीणा, सुनील, छोटे मीणा, जगपाल, सरजू, गाजू मीणा आदि ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने एक युवक का रिश्ता भी पक्का कर दिया। इसमें गांव निवासी तेजवीर मीणा को राजस्थान के गांव करौली निवासी घमंडी मीणा ने अपनी पुत्री के लिए पसंद किया। कांवड़ यात्रा के बाद वह बेटी की सगाई तेजवीर से पक्की करेंगे। मेहरमती मीणा निवासी रामकुमार मीणा ने बताया कि जब से तहसील में उनकी जाति के प्रमाण पत्र बनने में रुकावट आने लगी है, तब से राजस्थान के उनके समाज के लोग यहां पर लड़की का रिश्ता करने से पीछे हटने लगे हैं। वरना प्रतिवर्ष काफी रिश्ते उधर से होते थे। अब कांवड़ यात्रा के दौरान ही एक-दो रिश्ता हर साल तय हो पाता है। प्रतिवर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान अपनों से एक बार मिलन जरूर हो जाता है।