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हड़ताल से ठप हो गया ग्राम पंचायतों का काम
Updated Sun, 10 Jun 2018 01:40 AM IST
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मेरठ। ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर एक माह से आंदोलन पर हैं। लेकिन अब मांग पूरी न होने पर चार दिन से कार्य बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जिससे जिले की सभी ग्राम पंचायतों का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी शासन से तीन मांग कर रहे हैं। इनमें पहली मांग ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी नियुक्ति की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक की जाए। सातवें वेतन आयोग के तहत शुरूआती वेतन 29200 रुपये दिया जाए। इसके अलावा सीधी भर्ती के साथ ही 30 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएं। लेकिन इन मांगों पर शासन ने अभी तक कोई गौर नहीं किया है। प्रदेश भर में चल रहे इस आंदोलन के तहत 12 अप्रैल को ग्राम विकास अधिकारियों ने पहला धरना दिया था। लेकिन तब से लेकर अब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो 6 जून से सभी अधिकारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए हैं।
बाइक रैली निकाली
ग्राम विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायत अधिकारियों ने शनिवार को बाइक रैली निकाली। सभी आंदोलनकारी कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और सिवालखास विधायक जितेंद्र पाल सिंह के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समन्वय समिति के अध्यक्ष ओंकार नाथ दूबे और महामंत्री सोहनवीर सिंह मौजूद रहे।
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पंचायतों के काम पूरी तरह प्रभावित
ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी पंचायत में परिवार रजिस्टर की नकल देने, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने, विधवा, विकलांग और वृद्धावस्था पेंशन सत्यापन का काम करते हैं। हड़ताल के कारण जनता से जुड़े ये काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। इसके अलावा इन अधिकारियों का काम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य की कार्ययोजना तैयार करने और उसके लिए आने वाले फंड की फीडिंग करने का भी है। इससे पंचायतों के विकास कार्य भी अटक गए हैं।
खास बातें:
जिले के सभी ग्राम विकास व पंचायत अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 6 जून से किया हुआ है कार्य बहिष्कार
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ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी शासन से तीन मांग कर रहे हैं। इनमें पहली मांग ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी नियुक्ति की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक की जाए। सातवें वेतन आयोग के तहत शुरूआती वेतन 29200 रुपये दिया जाए। इसके अलावा सीधी भर्ती के साथ ही 30 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाएं। लेकिन इन मांगों पर शासन ने अभी तक कोई गौर नहीं किया है। प्रदेश भर में चल रहे इस आंदोलन के तहत 12 अप्रैल को ग्राम विकास अधिकारियों ने पहला धरना दिया था। लेकिन तब से लेकर अब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो 6 जून से सभी अधिकारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए हैं।
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बाइक रैली निकाली
ग्राम विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायत अधिकारियों ने शनिवार को बाइक रैली निकाली। सभी आंदोलनकारी कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और सिवालखास विधायक जितेंद्र पाल सिंह के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समन्वय समिति के अध्यक्ष ओंकार नाथ दूबे और महामंत्री सोहनवीर सिंह मौजूद रहे।
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पंचायतों के काम पूरी तरह प्रभावित
ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी पंचायत में परिवार रजिस्टर की नकल देने, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने, विधवा, विकलांग और वृद्धावस्था पेंशन सत्यापन का काम करते हैं। हड़ताल के कारण जनता से जुड़े ये काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। इसके अलावा इन अधिकारियों का काम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य की कार्ययोजना तैयार करने और उसके लिए आने वाले फंड की फीडिंग करने का भी है। इससे पंचायतों के विकास कार्य भी अटक गए हैं।
खास बातें:
जिले के सभी ग्राम विकास व पंचायत अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 6 जून से किया हुआ है कार्य बहिष्कार