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आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका बे हद अहम
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:47 AM IST
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आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका अहम
मेरठ। भारत सांस्कृतिक धरोहर का स्वामी है। आज जरूरत इस बात की है कि इसको अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। ये काम पत्रकारिता के माध्यम से ही किया जा सकता है। ये बातें शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के बृहस्पति भवन में पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग की तरफ से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कही।
प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका बेहद अहम थी। गांधी जी ने कई समाचार पत्रों का प्रकाशन किया। उन समाचार पत्रों की प्रसार संख्या तीन सौ से अधिक नहीं थी लेकिन उनकी प्रभाव क्षमता इतनी थी कि उनके आंदोलनों में आने वाले लोग उन्हीं समाचार पत्रों में लिखे लेखों से प्रेरित होते थे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. दर्शनलाल अरोड़ा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़े इतनी गहरी हैं कि कोई भी इन्हें हिला नहीं सकता है। उन्होंने इजरायल का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल अस्सी लाख की जनसंख्या वाले देश अपनी संस्कृति, सभ्यता व एकता के बल पर किसी भी बड़े और शक्तिशाली देश से डरता नहीं है। विशिष्ट अतिथि प्रो. वीर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता समाज का आइना है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राज नारायण शुक्ल, विभाग के समन्वयक डॉ. मनोज श्रीवास्तव, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. प्रशांत कुमार ने विचार रखे। इस दौरान प्रो. रमेश चंद्र त्रिपाठी, सुरेंद्र सिंह, डॉ. स्मिति पाढ़ी, डॉ. नीरज कर्ण और अजय मित्तल ने विचार रखें। विभाग की छात्रा शुभि, शैली, कामना, आफरीन, ऋषभ, डॉ. सत्यप्रकाश गर्ग, डॉ. शिवराज पुंडीर, डॉ. हरेंद्र सिंह, डॉ. राजीव सिजेरिया, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. योगेंद्र शर्मा और सूरत देव प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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खास बातें:
लखनऊ विवि के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष ने संगोष्ठी में रखे विचार
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मेरठ। भारत सांस्कृतिक धरोहर का स्वामी है। आज जरूरत इस बात की है कि इसको अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। ये काम पत्रकारिता के माध्यम से ही किया जा सकता है। ये बातें शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के बृहस्पति भवन में पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग की तरफ से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कही।
प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका बेहद अहम थी। गांधी जी ने कई समाचार पत्रों का प्रकाशन किया। उन समाचार पत्रों की प्रसार संख्या तीन सौ से अधिक नहीं थी लेकिन उनकी प्रभाव क्षमता इतनी थी कि उनके आंदोलनों में आने वाले लोग उन्हीं समाचार पत्रों में लिखे लेखों से प्रेरित होते थे।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. दर्शनलाल अरोड़ा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़े इतनी गहरी हैं कि कोई भी इन्हें हिला नहीं सकता है। उन्होंने इजरायल का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल अस्सी लाख की जनसंख्या वाले देश अपनी संस्कृति, सभ्यता व एकता के बल पर किसी भी बड़े और शक्तिशाली देश से डरता नहीं है। विशिष्ट अतिथि प्रो. वीर सिंह ने कहा कि पत्रकारिता समाज का आइना है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राज नारायण शुक्ल, विभाग के समन्वयक डॉ. मनोज श्रीवास्तव, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. प्रशांत कुमार ने विचार रखे। इस दौरान प्रो. रमेश चंद्र त्रिपाठी, सुरेंद्र सिंह, डॉ. स्मिति पाढ़ी, डॉ. नीरज कर्ण और अजय मित्तल ने विचार रखें। विभाग की छात्रा शुभि, शैली, कामना, आफरीन, ऋषभ, डॉ. सत्यप्रकाश गर्ग, डॉ. शिवराज पुंडीर, डॉ. हरेंद्र सिंह, डॉ. राजीव सिजेरिया, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. योगेंद्र शर्मा और सूरत देव प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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खास बातें:
लखनऊ विवि के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष ने संगोष्ठी में रखे विचार