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नोटबंदी से बढ़ाई बैंकों की सीडीआर

Meerut Bureau Updated Thu, 15 Mar 2018 02:48 AM IST
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नोटबंदी ने बढ़ाया बैंकों का सीडीआर
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रोहित अग्रवाल
मेरठ। आरबीआई की गाइड लाइन के तहत बैंकों में जमा कुल धन के सापेक्ष 60 फीसदी लोन देने का रेसियो होना चाहिए। लेकिन बैंकों के लिए इसको पूरा करना मुश्किल हो रहा है। नोटबंदी के दौरान लोगों ने बैंकों के खजाने भरे तो बैंकों पर ज्यादा से ज्यादा लोन बांटने का दबाव भी बढ़ा। माना जा रहा है कि नोटबंदी के बाद एक नंबर की ट्रांजेक्शन बढ़ने से ऐसा हुआ है।
आर्थिक विकास में बैंकों का बड़ा योगदान होता है। बैंकों द्वारा छोटे-बड़े उद्योग, वाहन, घर, पढ़ाई, खेती आदि के लिए लोन दिया जाता है। आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार बैंकों का सीडीआर (कैश डिपोजिट रेसियो) 60 फीसदी होना चाहिए। मतलब बैंक में जमा कुल रकम का 60 फीसदी लोन के रूप में बैंकों को देनी चाहिए। लेकिन जनपद के बैंकों का औसत रेसियो पूरा नहीं हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार जिले में मार्च 2017 में ये रेसियो केवल 57.15 प्रतिशत था।
आंकड़ों के अनुसार मार्च 2016 में जनपद के बैंकों में कुल 22642 करोड़ रुपये जमा हुए थे। नोटबंदी के बाद 2017 में ये 25341 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद बैंकों ने भी दिल खोलकर लोन बांटना शुरू किया। नतीजा हुआ कि नोटबंदी के बाद बैंकों का सीडीआर 58.36 फीसदी हो गया। इसके बाद से लगातार बढ़ता गया और सितंबर में ये आंकड़ा 58.92 फीसदी तक पहुंच गया।
इसलिए बढ़ा लोन के प्रति क्रेज
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी से पहले बाजार में ब्लैक मनी से खरीद फरोख्त अधिक होती थी। मकान, दुकान, प्रापर्टी सब में ब्लैक मनी का प्रयोग हो रहा था। लेकिन नोटबंदी के दौरान लोगों के पुराने नोट बैंकों में जमा हो गए। इसके बाद से लोगों को एक नंबर की रकम से प्रापर्टी और अन्य बड़ी व्यापारिक खरीद फरोख्त करनी पड़ रही है। लोगों की इसी जरूरत को बैंकों ने भुनाया। अपनी सीडीआर बढ़ाने को उन्होंने भी खूब लोन बांटा। मार्च 2017 के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 1126 करोड़ रुपये होम लोन बैंकों से लिया गया। खेती के लिए भी 3912 करोड़ का लोन लिया गया है।

नोटबंदी से पहले और बाद के आंकडे़
वर्ष बैंक डिपोजिट (करोड़) लोन (करोड़) सीडीआर
मार्च 2016 22624 12930 57.15
मार्च 2017 25341 14789 58.36
सितंबर 2017 27169 16008 58.92

जिले में कुल बैंक - 35
ग्रामीण क्षेत्रों की ब्रांच 128
सेमी अर्बन ब्रांच 67
शहरी क्षेत्रों में ब्रांच 245
केसीसी होल्डर 2.58 लाख

कोट
सीडीआर बढ़ना अच्छा संकेत है। नोटबंदी के बाद बैंकों की हर तिमाही में सीडीआर बढ़ रही है। उम्मीद है कि जल्द ही ये 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर जाएगी।
अविनाश तांती, लीड बैंक मैनेजर


खास बातें:
1.25 फीसदी का आया उछाल, 1859 करोड़ का अधिक लोन बांटा
नोटबंदी के बाद भरा बैंकों का खजाना

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