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श्री कृष्ण रुकमणी विवाह का मंचन
Updated Tue, 12 Sep 2017 03:15 AM IST
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भागवत में कंस वध की कथा सुनाई
दुर्गा मंदिर में हुआ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
किठौर।
कस्बा स्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के छठे दिन सोमवार को कंस वध की कथा का वर्णन किया गया। पंडित घनश्याम शास्त्री ने बताया कि भगवान को केवल भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है।
कथा प्रसंग में महाराज श्री ने कहा कि कंस के अनुचरों का वध तथा कंस वध एक साधारण घटना नहीं थी। इससे यह ज्ञान होता है कि जो जैसा कर्म करेगा फल की प्राप्त भी वैसी ही होगी। इसके बाद महारास की कथा सुनाते हुए कहां कि भगवान श्री कृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों के साथ नृत्य किया। वास्तव में यह नृत्य नहीं आत्मा का परमात्मा से मिलन है। बृज की गोपियां साधारण गोपियां नहीं थी। वेद के उपासना कांड के समस्त मंत्र गोपी रुप में आवतरित हुए थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के रासमंडल से अंतरध्यान होने पर गोपी गीत के माध्यम से उनकों पुन: रास मंडल में उपस्थित होने पर विवश कर दिया।
भगवान कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त तथा महायोगी थे। उनके द्वारा कि गई लीलाओं में गूढ़ रहस्य है। प्रत्येक लीला जीवन उपयोगी होने के साथ सत्य को प्रतिपादित करती है। भगवान श्री कृष्ण के विवाह में सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों में आठ पटरानियां मुख्य थी। सत्य भामा, रुकमणी, जामबंती, नंगजिति, लक्ष्मणा और भद्रा आदि थी। जिसमें रुकमणी जी मां लक्ष्मी का स्वरुप थी। कथा में बताया कि कथा सुनने का सही फल तब प्राप्त होगा। जब कथा का सार जीवन में उतारा जाए और उसका अनुकरण किया जाए। कथा के अंत में बच्चों द्वारा मनमोहक झांकियों ने भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया। उपस्थित भक्तों ने कन्यादान कर विवाह उत्सव मनाया। पंडित महेश अग्नि होत्री ने बताया कि मंगलवार को परिक्षित मोक्ष कथा एवं श्रीमद्भागवत कथा के 18 हजार श्लोकों का सार बताया जाएगा। इस दौरान पंड़ित महेश अग्नि होत्री, राजेश सिंघल, इंदु सिंघल, अमन बंसल, यश गोयल, अनुराधा, रजनी, अर्चना, अलका आदि रहीं।
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दुर्गा मंदिर में हुआ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
किठौर।
कस्बा स्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के छठे दिन सोमवार को कंस वध की कथा का वर्णन किया गया। पंडित घनश्याम शास्त्री ने बताया कि भगवान को केवल भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है।
कथा प्रसंग में महाराज श्री ने कहा कि कंस के अनुचरों का वध तथा कंस वध एक साधारण घटना नहीं थी। इससे यह ज्ञान होता है कि जो जैसा कर्म करेगा फल की प्राप्त भी वैसी ही होगी। इसके बाद महारास की कथा सुनाते हुए कहां कि भगवान श्री कृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों के साथ नृत्य किया। वास्तव में यह नृत्य नहीं आत्मा का परमात्मा से मिलन है। बृज की गोपियां साधारण गोपियां नहीं थी। वेद के उपासना कांड के समस्त मंत्र गोपी रुप में आवतरित हुए थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के रासमंडल से अंतरध्यान होने पर गोपी गीत के माध्यम से उनकों पुन: रास मंडल में उपस्थित होने पर विवश कर दिया।
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भगवान कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त तथा महायोगी थे। उनके द्वारा कि गई लीलाओं में गूढ़ रहस्य है। प्रत्येक लीला जीवन उपयोगी होने के साथ सत्य को प्रतिपादित करती है। भगवान श्री कृष्ण के विवाह में सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों में आठ पटरानियां मुख्य थी। सत्य भामा, रुकमणी, जामबंती, नंगजिति, लक्ष्मणा और भद्रा आदि थी। जिसमें रुकमणी जी मां लक्ष्मी का स्वरुप थी। कथा में बताया कि कथा सुनने का सही फल तब प्राप्त होगा। जब कथा का सार जीवन में उतारा जाए और उसका अनुकरण किया जाए। कथा के अंत में बच्चों द्वारा मनमोहक झांकियों ने भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया। उपस्थित भक्तों ने कन्यादान कर विवाह उत्सव मनाया। पंडित महेश अग्नि होत्री ने बताया कि मंगलवार को परिक्षित मोक्ष कथा एवं श्रीमद्भागवत कथा के 18 हजार श्लोकों का सार बताया जाएगा। इस दौरान पंड़ित महेश अग्नि होत्री, राजेश सिंघल, इंदु सिंघल, अमन बंसल, यश गोयल, अनुराधा, रजनी, अर्चना, अलका आदि रहीं।
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