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इंजीनियरिंग कॉलेजों ने दूसरे कोर्स का किया रुख
Updated Sun, 03 Sep 2017 02:56 AM IST
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मेरठ। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ( एआईसीटीई ) के निर्णय के बाद मेरठ के भी 10 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होेंगे। देश के करीब 800 कॉलेज बंद करने का फैसला लिया गया है।
मेरठ जिले की बात करें तो 30 से अधिक कॉलेजों के पास इंजीनियरिंग की मान्यता है। कुछ पहले बंद हो चुके हैं। नौकरी न मिलने की वजह और कॉलेजों की संख्या बढ़ने के कारण इंजीनियरिंग का चार्म कम होता गया। इंजीनियरिंग कॉलेजों की हालत खस्ता होने की वजह कॉलेज डॉ. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय की प्रक्रिया को भी बताते हैं। लंबी चलने वाली काउंसिलिंग से कई कॉलेज नाराज हैं। सत्र 2017-18 के दाखिले में मेरठ के चार पांच कॉलेजों को छोड़ दो तो बाकी छात्रों का इंतजार करते रह गए। उनके यहां सीट भरने के लाले पड़े हैं। कई कॉलेज फैकल्टी कम कर चुके हैं। कुछ सीट पहले ही कम करा चुके हैं। कॉलेज के रूप में खड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और जगह का इस्तेमाल के लिए कॉलेजों ने दूसरे कोर्स का रुख किया है। किसी ने बीएड की मान्यता ली तो कोई पैरा मेडिकल कोर्स की तरफ गया। पैरा मेडिकल कोर्स में बीएससी नर्सिंग की डिमांड है। सीसीएसयू के परंपरागत कोर्स बीएससी और बीकॉम की कई ने मान्यता ली है।
कौशल विकास में दिलचस्पी कम
सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजों के ढांचे का इस्तेमाल करने के लिए कौशल विकास योजना के कोर्स वहां शुरू करने की बात कही है। लेकिन कॉलेजों की इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रही। इंजीनियरिंग में मोटी फीस और मुनाफे के सामने कौशल विकास के कोर्स में कॉलेजों का अपना फायदा ज्यादा नजर नहीं आ रहा। इसलिए कॉलेज दूसरे कोर्स की तरफ जा रहे हैं।
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मेरठ जिले की बात करें तो 30 से अधिक कॉलेजों के पास इंजीनियरिंग की मान्यता है। कुछ पहले बंद हो चुके हैं। नौकरी न मिलने की वजह और कॉलेजों की संख्या बढ़ने के कारण इंजीनियरिंग का चार्म कम होता गया। इंजीनियरिंग कॉलेजों की हालत खस्ता होने की वजह कॉलेज डॉ. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय की प्रक्रिया को भी बताते हैं। लंबी चलने वाली काउंसिलिंग से कई कॉलेज नाराज हैं। सत्र 2017-18 के दाखिले में मेरठ के चार पांच कॉलेजों को छोड़ दो तो बाकी छात्रों का इंतजार करते रह गए। उनके यहां सीट भरने के लाले पड़े हैं। कई कॉलेज फैकल्टी कम कर चुके हैं। कुछ सीट पहले ही कम करा चुके हैं। कॉलेज के रूप में खड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और जगह का इस्तेमाल के लिए कॉलेजों ने दूसरे कोर्स का रुख किया है। किसी ने बीएड की मान्यता ली तो कोई पैरा मेडिकल कोर्स की तरफ गया। पैरा मेडिकल कोर्स में बीएससी नर्सिंग की डिमांड है। सीसीएसयू के परंपरागत कोर्स बीएससी और बीकॉम की कई ने मान्यता ली है।
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कौशल विकास में दिलचस्पी कम
सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजों के ढांचे का इस्तेमाल करने के लिए कौशल विकास योजना के कोर्स वहां शुरू करने की बात कही है। लेकिन कॉलेजों की इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रही। इंजीनियरिंग में मोटी फीस और मुनाफे के सामने कौशल विकास के कोर्स में कॉलेजों का अपना फायदा ज्यादा नजर नहीं आ रहा। इसलिए कॉलेज दूसरे कोर्स की तरफ जा रहे हैं।
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