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ढाई करोड़ की टंकी, पानी एक बूंद भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Apr 2017 02:16 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेडिकल कॉलेज में ढाई करोड़ रुपये की टंकी का घोटाले सामने आया है। जल निगम ने शासन के दबाव में अधूरे काम को पूरा दिखाकर टंकियों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन को हैंडओवर कर दिया। अब एक साल बाद भी जल निगम काम को पूरा कराने में आनाकानी कर रहा है। इससे कॉलेज में पानी न अस्पताल की बिल्डिंग तक पहुंचा है और न ही आवासीय क्षेत्र तक।
सपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री की घोषणा से साल 2012 में मेडिकल कॉलेज के अंदर दो पानी की टंकी बनाने की घोषणा की गई थी। इसके लिए शासन ने 2.5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। जल निगम ने टंकी का निर्माण शुरू कराया था। प्रोेजेक्ट में टंकी बनाने और पानी की सप्लाई मेडिकल कॉलेज में आवासी क्षेत्र और अस्पताल की बिल्डिंग तक करनी थी। समय पर काम पूरा न होने पर दिसंबर 2015 में शासन में बैठे अधिकारियों ने जल निगम के पेंच कसने शुरू कर दिए। इस पर आनन फानन में मार्च 2016 में टंकी बनकर कंप्लीट कर दी। शासन ने फिर जवाब मांगा तो जल निगम से कार्य पूरा होने संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए। काम समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भी थी। ऐसे में उसने काम पूरा न होने पर भी टंकी जलन निगम से टेकओवर कर ली।
जल निगम ने नहीं ले कोई खबर
बताया जा रहा है कि निर्माण एजेंसी जल निगम ने कॉलेज प्रशासन को भरोसा दिया था कि दो से तीन माह में दोनों टंकी से पानी सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। एक टंकी से कुछ मीटर की पाइप लाइन भी बिछाई और कुछ ब्लॉक में पानी दिया गया, लेकिन पानी गर्म और खारा था। इस पर उस समय मेडिकल कॉलेज में वाटर सप्लाई के नोडल ऑफिसर रहे डॉ. सुधीर राठी ने आपत्ति दर्ज कराई। जल निगम के अधिकारियों को बुलाकर पानी का सैंपल भी भरवाया गया, लेकिन आज तक जल निगम ने कोई जवाब नहीं दिया।
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आज तक बिजली कनेक्शन नहीं
कॉलेज कैंपस में एक टंकी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पास स्थित है तो दूसरी ब्वॉयज हॉस्टल के पास बनाई गई है। इनमें से एक टंकी के लिए आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है। कुल मिलाकर ढाई करोड़ रुपये खर्च कर भी मेडिकल को पानी नसीब नहीं हो रहा है।
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सपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री की घोषणा से साल 2012 में मेडिकल कॉलेज के अंदर दो पानी की टंकी बनाने की घोषणा की गई थी। इसके लिए शासन ने 2.5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। जल निगम ने टंकी का निर्माण शुरू कराया था। प्रोेजेक्ट में टंकी बनाने और पानी की सप्लाई मेडिकल कॉलेज में आवासी क्षेत्र और अस्पताल की बिल्डिंग तक करनी थी। समय पर काम पूरा न होने पर दिसंबर 2015 में शासन में बैठे अधिकारियों ने जल निगम के पेंच कसने शुरू कर दिए। इस पर आनन फानन में मार्च 2016 में टंकी बनकर कंप्लीट कर दी। शासन ने फिर जवाब मांगा तो जल निगम से कार्य पूरा होने संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए। काम समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भी थी। ऐसे में उसने काम पूरा न होने पर भी टंकी जलन निगम से टेकओवर कर ली।
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जल निगम ने नहीं ले कोई खबर
बताया जा रहा है कि निर्माण एजेंसी जल निगम ने कॉलेज प्रशासन को भरोसा दिया था कि दो से तीन माह में दोनों टंकी से पानी सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। एक टंकी से कुछ मीटर की पाइप लाइन भी बिछाई और कुछ ब्लॉक में पानी दिया गया, लेकिन पानी गर्म और खारा था। इस पर उस समय मेडिकल कॉलेज में वाटर सप्लाई के नोडल ऑफिसर रहे डॉ. सुधीर राठी ने आपत्ति दर्ज कराई। जल निगम के अधिकारियों को बुलाकर पानी का सैंपल भी भरवाया गया, लेकिन आज तक जल निगम ने कोई जवाब नहीं दिया।
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आज तक बिजली कनेक्शन नहीं
कॉलेज कैंपस में एक टंकी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पास स्थित है तो दूसरी ब्वॉयज हॉस्टल के पास बनाई गई है। इनमें से एक टंकी के लिए आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ है। कुल मिलाकर ढाई करोड़ रुपये खर्च कर भी मेडिकल को पानी नसीब नहीं हो रहा है।