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रमजान महीने की इबादत का तोहफा है ईद उल फितर
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:48 AM IST
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रमजान महीने की इबादत का तोहफा है ईद उल फितर: कारी शफीकुर्रहमान
मेरठ। बुधवार को शाही जामा मस्जिद में तीन दिवसीय शबीना पूरा होने पर कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने तकरीर पेश की। इस दौरान उन्होंने ईद उल फितर के बारे में लोगों को बताया। उन्होंने कहा कि रमजान महीने में रोजा रख इबादत के बाद अल्लाह ने अपने बंदों को एक तोहफा दिया है। जिसके ईद उल फितर कहते हैं। रमजान के महीने में जहां बंदों ने भरी गर्मी में रोजे रखकर अल्लाह को याद किया है। उन्होंनेे लोगों से रमजान के बाद भी नमाज पर पाबंद होने की अपील की। कहा रमजान महीने की तरह मस्जिदों में रौनक रहने लगे तो हम लोगों की जिंदगियों में अमन और चैन आ जाएगा। कारी शफीकुर्रहमान ने ईद पर गरीबों का ध्यान रखने को कहा। ईद को भाईचारे और मिल जुलकर ही मनाना चाहिए। ईद के दिन युवाओं को बाइक स्टंट और अन्य गलत कार्य से परिवार के लोगों को नसीहत देनी चाहिए। ईद पर जरूरी नहीं कि नए कपड़े ही पहने जाए। लोगों ने एक रिवाज बना लिया कि ईद के दौरान नए कपड़े पहने जाए। लेकिन कपड़े साफ सुथरे और पाक हो। इस रिवाज से गरीब परिवारों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। गरीब परिवार के बच्चे ईद पर नए कपड़े बनाने की जिद करते हैं। ऐसे में आर्थिक स्थिति से कमजोर परिवार मुश्किल में पड़ जाता है। ऐसे परिवार के लोगों को जकात, फितरा देना चाहिए। जिससे उनके परिवार के लोग भी ईद उल फितर हंसी खुशी मना सकें। उन्होंने कहा बृहस्पतिवार को चांद नजर आया तो शुक्रवार को ईद होगी। चांद न दिखने पर शनिवार को ईद उल फितर होगी।
मेरठ। बुधवार को शाही जामा मस्जिद में तीन दिवसीय शबीना पूरा होने पर कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने तकरीर पेश की। इस दौरान उन्होंने ईद उल फितर के बारे में लोगों को बताया। उन्होंने कहा कि रमजान महीने में रोजा रख इबादत के बाद अल्लाह ने अपने बंदों को एक तोहफा दिया है। जिसके ईद उल फितर कहते हैं। रमजान के महीने में जहां बंदों ने भरी गर्मी में रोजे रखकर अल्लाह को याद किया है। उन्होंनेे लोगों से रमजान के बाद भी नमाज पर पाबंद होने की अपील की। कहा रमजान महीने की तरह मस्जिदों में रौनक रहने लगे तो हम लोगों की जिंदगियों में अमन और चैन आ जाएगा। कारी शफीकुर्रहमान ने ईद पर गरीबों का ध्यान रखने को कहा। ईद को भाईचारे और मिल जुलकर ही मनाना चाहिए। ईद के दिन युवाओं को बाइक स्टंट और अन्य गलत कार्य से परिवार के लोगों को नसीहत देनी चाहिए। ईद पर जरूरी नहीं कि नए कपड़े ही पहने जाए। लोगों ने एक रिवाज बना लिया कि ईद के दौरान नए कपड़े पहने जाए। लेकिन कपड़े साफ सुथरे और पाक हो। इस रिवाज से गरीब परिवारों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। गरीब परिवार के बच्चे ईद पर नए कपड़े बनाने की जिद करते हैं। ऐसे में आर्थिक स्थिति से कमजोर परिवार मुश्किल में पड़ जाता है। ऐसे परिवार के लोगों को जकात, फितरा देना चाहिए। जिससे उनके परिवार के लोग भी ईद उल फितर हंसी खुशी मना सकें। उन्होंने कहा बृहस्पतिवार को चांद नजर आया तो शुक्रवार को ईद होगी। चांद न दिखने पर शनिवार को ईद उल फितर होगी।