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सिनौली गांव में मिले नर कंकाल को देखन पहुंचे डीएम ऋषिरेंद्र कुमार
Updated Mon, 30 Apr 2018 01:56 AM IST
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सिनौली गांव में मिले नर कंकाल को देखने पहुंचे डीएम ऋषिरेंद्र कुमार
बागपत। सिनौली में चल रहे उत्खनन कार्य में सिंधु सभ्यता के प्रमाणों की फिर से पुष्टि हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम को उत्खनन में 27 अप्रैल को शवादान गृह में मिला नर कंकाल सिंधु सभ्यता का है। सोमवार को डीएम ऋषिरेंद्र कुमार, शहजाद राय शोध संस्थान के निर्देशक अमित राय जैन ने इसका निरीक्षण किया। नर कंकाल लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना है। बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम को बागपत के सिनौली में शुक्रवार को उत्खनन के दौरान मृदभांड, नर कंकाल, तांबे की तलवार और तांबे के अवशेष मिले हैं।
सिनौली में करीब 4500 साल पहले इतिहास की परतों को जोड़ने के लिए किए जा रहे उत्खनन में कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। यहां पर पहले चरण की खुदाई में हड्प्पा कालीन शवादान गृह मिला था, अब दूसरे चरण की खुदाई में फिर से नर कंकाल मिल रहे हैं। इस कड़ी में एक नरकंकाल शुक्रवार 27 अप्रैल को भी मिला था। इसकी सूचना के बाद रविवार को डीएम ऋषिरेंद्र कुमार, शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल ने निरीक्षण किया। उत्खनन में मिले नर कंकाल के विषय में डीएम ने जानकारी हासिल की। यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस काल में शवों को लकड़ी के ताबूत में रख कर दफनाते थे और इस ताबूत पर तांबे की नक्कासी होती थी। उधर, बरनावा में चल रहे उत्खनन कार्य में सहयोग के लिए डेक्कन कॉलेज पुणे की टीम भी पहुंच गई है।
13 साल पहले मिल चुका शवादान गृह
सिनौली में वर्ष 2005-06 में उत्खनन कार्य डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में किया था। पिछले दिनों डॉ. शर्मा ने भी सिनौली पहुंचकर साइट का निरीक्षण किया और यहां से बरामद हुए मृदभांड एवं अन्य चीजों की जानकारी जुटाई।
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कोरिया से आएगी पुरातत्व विभाग की टीम
सिनौली पर विदेशी पुरातत्वविदों की नजर भी है। जल्द ही यहां पर कोरिया से एक टीम पहुंचने वाली है। इसके अलावा पुरातत्व विभाग की महानिदेशक डॉ उपेंद्र कुमार का भी जल्द ही दौरा होने वाला है।
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बागपत। सिनौली में चल रहे उत्खनन कार्य में सिंधु सभ्यता के प्रमाणों की फिर से पुष्टि हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम को उत्खनन में 27 अप्रैल को शवादान गृह में मिला नर कंकाल सिंधु सभ्यता का है। सोमवार को डीएम ऋषिरेंद्र कुमार, शहजाद राय शोध संस्थान के निर्देशक अमित राय जैन ने इसका निरीक्षण किया। नर कंकाल लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना है। बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम को बागपत के सिनौली में शुक्रवार को उत्खनन के दौरान मृदभांड, नर कंकाल, तांबे की तलवार और तांबे के अवशेष मिले हैं।
सिनौली में करीब 4500 साल पहले इतिहास की परतों को जोड़ने के लिए किए जा रहे उत्खनन में कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। यहां पर पहले चरण की खुदाई में हड्प्पा कालीन शवादान गृह मिला था, अब दूसरे चरण की खुदाई में फिर से नर कंकाल मिल रहे हैं। इस कड़ी में एक नरकंकाल शुक्रवार 27 अप्रैल को भी मिला था। इसकी सूचना के बाद रविवार को डीएम ऋषिरेंद्र कुमार, शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल ने निरीक्षण किया। उत्खनन में मिले नर कंकाल के विषय में डीएम ने जानकारी हासिल की। यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस काल में शवों को लकड़ी के ताबूत में रख कर दफनाते थे और इस ताबूत पर तांबे की नक्कासी होती थी। उधर, बरनावा में चल रहे उत्खनन कार्य में सहयोग के लिए डेक्कन कॉलेज पुणे की टीम भी पहुंच गई है।
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13 साल पहले मिल चुका शवादान गृह
सिनौली में वर्ष 2005-06 में उत्खनन कार्य डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में किया था। पिछले दिनों डॉ. शर्मा ने भी सिनौली पहुंचकर साइट का निरीक्षण किया और यहां से बरामद हुए मृदभांड एवं अन्य चीजों की जानकारी जुटाई।
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कोरिया से आएगी पुरातत्व विभाग की टीम
सिनौली पर विदेशी पुरातत्वविदों की नजर भी है। जल्द ही यहां पर कोरिया से एक टीम पहुंचने वाली है। इसके अलावा पुरातत्व विभाग की महानिदेशक डॉ उपेंद्र कुमार का भी जल्द ही दौरा होने वाला है।