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‘दिलों में सबके धड़कता एक हिंदुस्तान रखते हैं’
Updated Sun, 25 Jun 2017 10:27 PM IST
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मेरठ। संस्कार भारती द्वारा दिल्ली रोड स्थित एक मंडप में क्रांति के शहीदों को समर्पित कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शहीदों को नमन किया।
शुभारंभ आरएसएस के क्षेत्र संघ चालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संस्कार भारती के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने अतिथियाें और कवियों का स्वागत किया। नीता गुप्ता की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम शुरू हुआ।
दिल्ली से आए ओज के प्रसिद्ध कवि गजेंद्र सोलंकी काव्य रचाना ‘ कितने दधीचियों ने दिया अस्थियों का दान, साधना को जिनकी मिला वरदान है, कितने ही दिनकर उदित हुए हैं यहां, अंधियारों पे जिनका ये विजय अभियान है... को श्रोताओं की जमकर दाद मिली। बुलंदशहर के कवि डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने कहा ‘अनुचित करने पर मौन रहे जो, सबके सब दागी होते हैं, करते अन्याय समर्थन जो अपयश के भागी होते हैं’।
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संचालन कर रहे सुमनेश सुमन ने अपनी कविता में कहा ‘भले ही हम जाति, मजहब धर्म में हो सब अलग लेकिन दिलों में सबके धड़कता एक हिंदुस्तान रखते हैं’ पर जमकर तालियां मिलीं। राजकुमार राज ने कहा ‘सन सत्तावन की क्रांति की याद हमें जब आती है, सिर झुक जाता है श्रद्धा से आंखें नम हो जाती हैं’। कार्यक्रम में डॉ. ममता वार्ष्णेय, डॉ. सुधाकर आशावादी ने भी कविताएं प्रस्तुत की। इस दौरान आशुतोष सिंह, रामनरेश गुप्ता, विकास कुमार, रोहित प्रजापति, ईशान अग्रवाल, आकाश गुप्ता, पप्पू सिंह, प्रशांत, आशीष गुप्ता, राज कुमार मांगलिक आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
संस्कार भारती द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में क्रांति के शहीदाें को नमन
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शुभारंभ आरएसएस के क्षेत्र संघ चालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संस्कार भारती के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने अतिथियाें और कवियों का स्वागत किया। नीता गुप्ता की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम शुरू हुआ।
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दिल्ली से आए ओज के प्रसिद्ध कवि गजेंद्र सोलंकी काव्य रचाना ‘ कितने दधीचियों ने दिया अस्थियों का दान, साधना को जिनकी मिला वरदान है, कितने ही दिनकर उदित हुए हैं यहां, अंधियारों पे जिनका ये विजय अभियान है... को श्रोताओं की जमकर दाद मिली। बुलंदशहर के कवि डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने कहा ‘अनुचित करने पर मौन रहे जो, सबके सब दागी होते हैं, करते अन्याय समर्थन जो अपयश के भागी होते हैं’।
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संचालन कर रहे सुमनेश सुमन ने अपनी कविता में कहा ‘भले ही हम जाति, मजहब धर्म में हो सब अलग लेकिन दिलों में सबके धड़कता एक हिंदुस्तान रखते हैं’ पर जमकर तालियां मिलीं। राजकुमार राज ने कहा ‘सन सत्तावन की क्रांति की याद हमें जब आती है, सिर झुक जाता है श्रद्धा से आंखें नम हो जाती हैं’। कार्यक्रम में डॉ. ममता वार्ष्णेय, डॉ. सुधाकर आशावादी ने भी कविताएं प्रस्तुत की। इस दौरान आशुतोष सिंह, रामनरेश गुप्ता, विकास कुमार, रोहित प्रजापति, ईशान अग्रवाल, आकाश गुप्ता, पप्पू सिंह, प्रशांत, आशीष गुप्ता, राज कुमार मांगलिक आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
संस्कार भारती द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में क्रांति के शहीदाें को नमन