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स्वयं की गलतियों को स्वीकार करने के लिए कलेजा चाहिए

Tue, 12 Mar 2019 01:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Mar 2019 01:51 AM IST
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स्वयं की गलतियों को स्वीकार करने के लिए कलेजा चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
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हस्तिनापुर। कस्बे की पावन धरा पर विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज तीसवें दिन सोमवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ हुआ।

आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अजय जैन मिर्जापुर को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य राजेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य अजय जैन, जिनेंद्र जैन, विकास जैन, शांत जैन, पीयूष जैन, शिवानी को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीपक का प्रज्ज्वलन संतोष कुमार, अनूप जैन, शैंकी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने संसार के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाये गये। आज 501 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। जिसमें मुख्य रूप से रेखा जैन, राजेन्द्र जैन, शैंकी जैन, सुनीता, जेसी जैन, प्रिया, दीपक जैन, तन्नू, प्रांजल, अजय जैन, सरिता, कविता, तरुण जैन, आकांक्षा, आयुषी, लव्य, सनाया जैन को शामिल होने को सौभाग्य प्राप्त हुआ। भक्तामर पाठ का शुभारंभ रेखा जैन ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे हुए यात्री भाई एवं मधु, सलिल जैन, सिद्धार्थ जैन, मेघा, मोहिता, सानवी, वामिका जैन, उमेश, अर्चना पाटनी, एके पाटनी, रुचि, मनिन्द्र पाटनी, प्रियंका देव जैन ने पाठ का वाचन किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्युजिक पार्टी की मधुर लहरी पर रेखा जैन हस्तिनापुर ने भजन प्रस्तुत किया। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मन्दिर व गुरुकुल समस्त स्टाफ एवं बच्चों ने भी सभी कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराई। परम पूज्य गुरुवर ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि दूसरों की गलती निकालने के लिए भेजा चाहिए पर स्वयं की गलतियों का स्वीकार ने के लिए कलेजा चाहिए। त्रुटियां तो दिमाग से देखी जाती है लेकिन क्षमा दिल से की जाती है। सावधानियां रखते हुए भी इंसान से त्रुटियां हो जाती हैैं, जो कि स्वाभाविक ही है पर उसको स्वीकार न कर पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। 48 दीपकों द्वारा मंगल आराधना की गई। आज के विधान का विसर्जन पदमचंद जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीपक प्रज्ज्वलन सलिल जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन शिल्पी जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अजय जैन द्वारा किया गया। प्रश्नमंच के पश्चात उपस्थित विजेताओं को विपिन जैन एवं ईशा, निधि, रजनीश हस्तिनापुर की ओर से पुरस्कार प्रदत्त किये गये। यहां पर मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम, अशोक, अतुल, उमेश जैन आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, मोतीलाल जैन, विनय कुमार जैन, संजय जैन, जितेन्द्र जैन, विजय जैन का सहयोग रहा।
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