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आगरा में तबाही के बाद सक्रिय हुई आपदा प्रबंधन सेल
Updated Tue, 08 May 2018 03:28 AM IST
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मेरठ। जर्जर भवनों में रहने वाले अब सख्ती से बाहर किए जाएंगे। इसके अलावा सड़कों के किनारे खड़े जर्जर पेड़ काटे जाएंगे। यह फैसला पिछले दिनों आगरा में हुई दैवीय आपदा से तबाही के बाद लिया गया है। इस मामले में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने सभी निकायों और पंचायतों को सर्वे करने के आदेश दिए हैं।
आगरा में आये चक्रवर्ती तूफान में भारी जान माल की क्षति हुई है। इस तूफान के चलते कच्चे और जर्जर भवन जहां गिर गए तो पेड़ और जर्जर खंभे आदि भी उखड़ गए थे। इससे भारी नुकसान के बीच कई जानें गईं तो बहुत से लोग जख्मी हुए। अब मौसम विभाग मेरठ सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश में ऐसे ही चक्रवर्ती तूफान का अलर्ट लगातार जारी कर रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी भी दैवीय आपदा से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन सेल अब सक्रिय किया जा रहा है।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) आनंद कुमार ने बताया कि आपदा प्रबंधन सेल वर्ष 2016 के बाद से अपडेट नहीं है। जबकि इस बीच कई अधिकारियों के ट्रांसफर भी हो चुके हैं। ऐसे में एक तरफ जहां इस सेल को अपडेट किया जा रहा है। वहीं, नगर निगम, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। यह सर्वे सभी को 15 दिन के भीतर करके देना होगा।
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इन बिंदुओं पर होगा सर्वे
सभी निकायों और पंचायतों को अपने यहां के भवनों का सर्वे करना होगा। जिसमें कच्चे, जर्जर और बहुत पुराने आवास चिह्नित किए जाएंगे। इसके अलावा पेड़ों, विद्युत पोल, यूनिपोल आदि का भी सर्वे होगा। जिसमें कमजोर पेड़, जर्जर खंभे आदि शामिल होंगे। इसके बाद इन चिह्नित किए गए भवनों और पेड़ों आदि का तकनीकी मुआयना कराया जाएगा।
खाली कराए जाएंगे भवन
तकनीकी रिपोर्ट में जो भवन खतरनाक स्थिति में पाए जाएंगे, उनमें रहने वाले लोगों को बाहर करते हुए ये भवन गिराए जाएंगे। यदि लोग अपने भवनों से बाहर नहीं आएंगे तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही जर्जर पेड़ और खंभे आदि भी हटाए जाएंगे।
पुराने शहर में सैकड़ों आवास जर्जर
पुराने शहर की तंग गलियों के बीच आज भी सैकड़ों मकान सौ साल से ज्यादा पुराने हैं जो बेहद जर्जर स्थिति में है। कई बार भूकंप आदि के अलर्ट पर इन भवनों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन आज तक इस तरफ प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखायी। अभी भी इस सर्वे के बाद होने वाली कार्रवाई को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
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आगरा में आये चक्रवर्ती तूफान में भारी जान माल की क्षति हुई है। इस तूफान के चलते कच्चे और जर्जर भवन जहां गिर गए तो पेड़ और जर्जर खंभे आदि भी उखड़ गए थे। इससे भारी नुकसान के बीच कई जानें गईं तो बहुत से लोग जख्मी हुए। अब मौसम विभाग मेरठ सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश में ऐसे ही चक्रवर्ती तूफान का अलर्ट लगातार जारी कर रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी भी दैवीय आपदा से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन सेल अब सक्रिय किया जा रहा है।
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एडीएम (वित्त एवं राजस्व) आनंद कुमार ने बताया कि आपदा प्रबंधन सेल वर्ष 2016 के बाद से अपडेट नहीं है। जबकि इस बीच कई अधिकारियों के ट्रांसफर भी हो चुके हैं। ऐसे में एक तरफ जहां इस सेल को अपडेट किया जा रहा है। वहीं, नगर निगम, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। यह सर्वे सभी को 15 दिन के भीतर करके देना होगा।
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इन बिंदुओं पर होगा सर्वे
सभी निकायों और पंचायतों को अपने यहां के भवनों का सर्वे करना होगा। जिसमें कच्चे, जर्जर और बहुत पुराने आवास चिह्नित किए जाएंगे। इसके अलावा पेड़ों, विद्युत पोल, यूनिपोल आदि का भी सर्वे होगा। जिसमें कमजोर पेड़, जर्जर खंभे आदि शामिल होंगे। इसके बाद इन चिह्नित किए गए भवनों और पेड़ों आदि का तकनीकी मुआयना कराया जाएगा।
खाली कराए जाएंगे भवन
तकनीकी रिपोर्ट में जो भवन खतरनाक स्थिति में पाए जाएंगे, उनमें रहने वाले लोगों को बाहर करते हुए ये भवन गिराए जाएंगे। यदि लोग अपने भवनों से बाहर नहीं आएंगे तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही जर्जर पेड़ और खंभे आदि भी हटाए जाएंगे।
पुराने शहर में सैकड़ों आवास जर्जर
पुराने शहर की तंग गलियों के बीच आज भी सैकड़ों मकान सौ साल से ज्यादा पुराने हैं जो बेहद जर्जर स्थिति में है। कई बार भूकंप आदि के अलर्ट पर इन भवनों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन आज तक इस तरफ प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखायी। अभी भी इस सर्वे के बाद होने वाली कार्रवाई को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।