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आरवीसी में मनाया स्थापना दिवस व पुर्नमिलन समारोह
Updated Fri, 15 Dec 2017 02:05 AM IST
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मेरठ। आरवीसी (रिमाउंट वेटनरी कोर) सेंटर एंड कॉलेज का कोठावाला मैदान बृहस्पतिवार को सेना के जवानों की शौर्य गाथाओं से गूंज उठा। आरवीसी ने 239वां कोर डे एवं 12वां पुर्नमिलन समारोह मनाया। घने कोहरे और ठंड के बीच सैनिकों ने परिवार सहित आयोजन में भाग लेकर आरवीसी के गौरवशाली इतिहास में शौर्य और देशसेवा का नया अध्याय जोड़ा। कोर डे पर देश के लिए शहीद होने वाले जाबांजों को स्मरण किया।
आयोजन में आगाज अनुष्ठानिक परेड से हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने जवानों को कोर डे व पुर्नमिलन समारोह की शुभकामनाएं देकर परेड की सलामी ली। परेड में दो माउटेंड कंटीजेंट (घोड़ा दस्ता), दो फुट कंटीजेंट (पैदल दस्ता), दो डॉग कंटीजेंट (श्वान दस्ता) ने भाग लिया। अनुष्ठानिक परेड व आरवीसी का ऐतिहासिक निशान जब मैदान में घूमा तो सैनिकों, उनके परिवारों व स्कूली छात्रों ने खड़े होकर तालियां बजाकर सम्मान दिया। परेड का मुख्याकर्षण आर्मी का बैंड रहा। शाम को अश्वों व श्वानों ने हैरतंगेज करतब दिखाए। बच्चों ने पूरे आयोजन को खूब एंजाय किया। लोगों ने आपस में सेल्फी लेकर इस पल को यादगार बनाया।
वीर नारियों, सैनिकों को मिला सम्मान
मुख्य अतिथि ने वीर नारियों, साहसी सैनिकों व अनुकरणीय कार्य करने वाले श्वानों एवं अश्वों को सम्मानित किया। सांस्कृ तिक प्रस्तुतियां भी हुईं। पूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त अफसरों व उनके परिवार के सदस्यों से गर्मजोशी से मिलकर पुरानी यादों को साझा किया।
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गौरवशाली इतिहास को संजोना प्रमुख जिम्मेदारी
मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने जवानों को संबोधित करते हुए कोर के गौरवमयी इतिहास पर गर्व करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह बेहद गौरव की बात है कि कोर ने इन बुलंदियों को छुआ है। आरवीसी ने भारतीय फौज, मैत्रयी देशों व पैरा मिलिट्री को उच्च नस्ल के ऐसे घोड़े और श्वान दिए जिन्होंने बुलंदियां छुईं। जम्मू कश्मीर व अन्य क्षेत्रों में वेटनरी सेवाएं भी दी हैं। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आरवीसी क ोर ने हमेशा काम किया है। समय की मांग है कि हम अपनी लगनशील प्रवृत्ति व सकारात्मक सोच से आगे बढ़े, वैभवशाली स्थिति में निरंतर सुधार के प्रयास करें। आरवीसी के श्वानों ने 56 साल पूरे किए हैं। थल, जल, वायु सेना व पैरामिलिट्री फोर्सेस व पुलिस के लिए हमने अश्व दिए हैं, दोस्त विदेशों को भी प्रशिक्षित डॉग्स दिए हैं।
एशियन गेम्स में शामिल होंगे आरवीसी के तीन घुड़सवार
मुख्य अतिथि डीजी आरवीसी ने कहा कि आरवीसी के घुड़सवारों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है यह गौरव की बात है। आने वाले एशियन एवं ओलंपिक गेम्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन होगा। गर्व की बात है कि भारत से जिन पांच राइडर्स का चयन विदेश में जाकर एशियन गेम्स की तैयारी में हुआ है, उन पांचों में से तीन आरवीसी के हैं।
देसी श्वान भी होंगे सेना का हिस्सा
- आरवीसी में देसी श्वानों को शामिल करने की कवायद शुरू
मेरठ। लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने कहा कि देश की सुरक्षा सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना कोर हमेशा डटकर करेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक सेना में विदेशी नस्ल के श्वान जर्मन शेफर्ड व लेब्राडॉग का प्रयोग किया है, अब देसी श्वानों का प्रयोग भी होगा। आरवीसी ने सेना के लिए श्वानों की देसी ब्रिड को तैयार किया है। इसके लिए कर्नाटका की भारतीय नस्ल मुथूल डॉग को लिया है। ये श्वान तेज धावक, बेहतरीन सूंघने की शक्ति व अच्छे स्टेमिना के होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग हम सेना में कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फौजी कारणों में देसी कुत्ते भी आब्जेक्ट को डिटेक्ट कर सकतेे हैं। इन पर ट्रायल चल रहा है। सब ठीक रहा तो फौज में उन्हें इंट्रड्यूस कराएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक देश की सेना में जानवर है आरवीसी है। मिलिट्री फार्मस के बंद करने के आदेश आ चुके हैं, व फ्रोजन मीट इशू शुरू होने व 80 डिडक्शन से बने हालातों से सबक लेते हुए हमें नए आयामों की तलाश करनी होगी।
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आयोजन में आगाज अनुष्ठानिक परेड से हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने जवानों को कोर डे व पुर्नमिलन समारोह की शुभकामनाएं देकर परेड की सलामी ली। परेड में दो माउटेंड कंटीजेंट (घोड़ा दस्ता), दो फुट कंटीजेंट (पैदल दस्ता), दो डॉग कंटीजेंट (श्वान दस्ता) ने भाग लिया। अनुष्ठानिक परेड व आरवीसी का ऐतिहासिक निशान जब मैदान में घूमा तो सैनिकों, उनके परिवारों व स्कूली छात्रों ने खड़े होकर तालियां बजाकर सम्मान दिया। परेड का मुख्याकर्षण आर्मी का बैंड रहा। शाम को अश्वों व श्वानों ने हैरतंगेज करतब दिखाए। बच्चों ने पूरे आयोजन को खूब एंजाय किया। लोगों ने आपस में सेल्फी लेकर इस पल को यादगार बनाया।
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वीर नारियों, सैनिकों को मिला सम्मान
मुख्य अतिथि ने वीर नारियों, साहसी सैनिकों व अनुकरणीय कार्य करने वाले श्वानों एवं अश्वों को सम्मानित किया। सांस्कृ तिक प्रस्तुतियां भी हुईं। पूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त अफसरों व उनके परिवार के सदस्यों से गर्मजोशी से मिलकर पुरानी यादों को साझा किया।
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गौरवशाली इतिहास को संजोना प्रमुख जिम्मेदारी
मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने जवानों को संबोधित करते हुए कोर के गौरवमयी इतिहास पर गर्व करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह बेहद गौरव की बात है कि कोर ने इन बुलंदियों को छुआ है। आरवीसी ने भारतीय फौज, मैत्रयी देशों व पैरा मिलिट्री को उच्च नस्ल के ऐसे घोड़े और श्वान दिए जिन्होंने बुलंदियां छुईं। जम्मू कश्मीर व अन्य क्षेत्रों में वेटनरी सेवाएं भी दी हैं। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आरवीसी क ोर ने हमेशा काम किया है। समय की मांग है कि हम अपनी लगनशील प्रवृत्ति व सकारात्मक सोच से आगे बढ़े, वैभवशाली स्थिति में निरंतर सुधार के प्रयास करें। आरवीसी के श्वानों ने 56 साल पूरे किए हैं। थल, जल, वायु सेना व पैरामिलिट्री फोर्सेस व पुलिस के लिए हमने अश्व दिए हैं, दोस्त विदेशों को भी प्रशिक्षित डॉग्स दिए हैं।
एशियन गेम्स में शामिल होंगे आरवीसी के तीन घुड़सवार
मुख्य अतिथि डीजी आरवीसी ने कहा कि आरवीसी के घुड़सवारों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है यह गौरव की बात है। आने वाले एशियन एवं ओलंपिक गेम्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन होगा। गर्व की बात है कि भारत से जिन पांच राइडर्स का चयन विदेश में जाकर एशियन गेम्स की तैयारी में हुआ है, उन पांचों में से तीन आरवीसी के हैं।
देसी श्वान भी होंगे सेना का हिस्सा
- आरवीसी में देसी श्वानों को शामिल करने की कवायद शुरू
मेरठ। लेफ्टिनेंट जनरल एजे सिंह वीएसएम, डीजी और कर्नल कमांडेंट आरवीसी ने कहा कि देश की सुरक्षा सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना कोर हमेशा डटकर करेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक सेना में विदेशी नस्ल के श्वान जर्मन शेफर्ड व लेब्राडॉग का प्रयोग किया है, अब देसी श्वानों का प्रयोग भी होगा। आरवीसी ने सेना के लिए श्वानों की देसी ब्रिड को तैयार किया है। इसके लिए कर्नाटका की भारतीय नस्ल मुथूल डॉग को लिया है। ये श्वान तेज धावक, बेहतरीन सूंघने की शक्ति व अच्छे स्टेमिना के होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग हम सेना में कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फौजी कारणों में देसी कुत्ते भी आब्जेक्ट को डिटेक्ट कर सकतेे हैं। इन पर ट्रायल चल रहा है। सब ठीक रहा तो फौज में उन्हें इंट्रड्यूस कराएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक देश की सेना में जानवर है आरवीसी है। मिलिट्री फार्मस के बंद करने के आदेश आ चुके हैं, व फ्रोजन मीट इशू शुरू होने व 80 डिडक्शन से बने हालातों से सबक लेते हुए हमें नए आयामों की तलाश करनी होगी।