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गोली चली नहीं, घटनास्थल पर मिल रहे खोखे
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मेरठ। जानलेवा हमले जैसे मामलों में जहां पीड़ित व्यक्ति खुद पर फायरिंग होने की घटना की सूचना पुलिस को देता है। वहीं पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल करती है तो सामने आया कि मौके पर एक या दो खोखे भी मिले है। पीड़ित के बयान और तहरीर के आधार पर पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू करती है। लेकिन जब इन खोखों या मौके पर मिले किसी बुलेट की फोरेंसिक एक्सपर्ट जांच करते हैं तो पता चला कि फायर हुआ ही नहीं। प्लास या किसी अन्य वस्तु से कारतूस से बुलेट खींची गई है।
फोरेंसिक एक्सपर्ट और एफएसएल रिपोर्ट पर पुलिस भी हैरान है। रंजिशन और प्रॉपर्टी के विवाद या साजिशन जो रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही हैं उनमें यही है कि अपने ऊपर गोली चलने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया जाता है। इस साल आठ मामले ऐसे आए हैं जिनमें गोली चलने के साक्ष्य नहीं मिले। जिसमें पुलिस ने माना है कि पीड़ित व्यक्ति द्वारा साजिशन आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
आठ मई को खरखौदा क्षेत्र के कबट्टा गांव में मारपीट के बाद जातीय संघर्ष का मामला सामने आया। जिसमें एक पक्ष के लोगों ने फायरिंग का आरोप लगाया। मौके पर 315 बोर के दो खोखे भी मिलने की बात कहकर पुलिस को दिखाए। सीओ आलोक सिंह और एसओ खरखौदा कुलवीर सिंह ने जांच पड़ताल की। तहरीर के आधार पर जानलेवा हमले का केस दर्ज किया गया। लेकिन फोरेंसिक एक्सपर्ट ने कहा कि मौके पर जो दो खोखे मिले थे, जांच में सामने आया कि गोली नहीं चली। खोखे की जांच हुई तो फायर न होने की बात सामने आई। किसी प्लासनुमा वस्तु से कारतूस से आगे का भाग खींचा गया, जिस पर खोखे पर कई निशान मिले।
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सरधना प्रकरण
एक माह पहले सरधना की महिला ने अपने ऊपर फायरिंग की बात कही। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि जांच में सामने आया कि खोखा पुराना है। पुलिस ने गहनता से जांच की तो महिला ने खुद स्वीकार किया कि उसने रंजिशन केस दर्ज कराया था। इस प्रकरण में कपड़ों पर छर्रे के निशान मिले, लेकिन महिला के शरीर पर कोई निशान नहीं मिला।
फलावदा
बीस दिन पहले फलावदा में दो गुटों हुए मारपीट और फायरिंग के मामले में भी फोरेंसिक एक्सपर्ट ने कहा कि मौके पर जो खोखा मिला है उसे खींचकर अलग कर फेंका गया है। बाद में पुलिस ने जांच की तो युवक ने प्रॉपर्टी के विवाद में फंसाने के लिए फर्जी आरोप लगाकर जानलेवा हमला होने की बात कही थी।
लिसाड़ीगेट
20 फरवरी को लिसाड़ी गेट में प्रॉपर्टी डीलर ने जानलेवा हमले का आरोप लगाया था। जहां पुलिस को एक खोखा और एक बुलेट भी मिली थी। पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन जब बुलेट और खोखे की जांच फोरेंसिक एक्सपर्ट की तो पता चला कि फायर नहीं हुआ और खोखे का पीछे के भाग पर हल्के नुकीले निशान मिले, जिससे साफ हुआ कि कारतूस से गोली निकाली गई।
यह कहते हैं एक्सपर्ट
रिवाल्वर, पिस्टल या तमंचे में जो गोली डाली जाती है। उसमें पीछे का हिस्सा पीतल का होता है। इसमें बारूद भरा रहता है। आगे के हिस्से में रांग-जस्ता मिक्स होता है। इसे ही बुलेट कहते हैं। जब गोली के टारगेट पर पिन की चोट लगती है तो बारूद में विस्फोट होने के बाद बुलेट आग की शक्ल लेकर बहुत तेजी से निकलती है। असलहे की नली से इसकी स्पीड और तेज हो जाती है। लेकिन कई मामलों में जांच हुई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अलग-अलग मामलों में गोलियों की बुलेट व खोखे तो मौके पर मिले थे। लेकिन फायर नहीं हुआ था। इनकी बुलेट को गोली से बिना फायर करे ही निकालकर मौके पर फर्जी तरह से प्लांट कर दिया गया। ताकि दूसरे को फंसाया जा सके।
फायर की नहीं हुई पुष्टि
अलग-अलग मामलों में फोरेंसिक एक्सपर्ट ने जो रिपोर्ट पुलिस को भेजी है। उसमें यही कहा गया कि मौके पर जो खोखे मिले हैं उनमें फायर नहीं हुआ। फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट पर पुलिस ने गहनता से जांच की तो पता चला कि साजिशन जानलेवा हमले की धारा के लिए फायरिंग का आरोप लगाया गया। -अविनाश पांडेय, एसपी देहात
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फोरेंसिक एक्सपर्ट और एफएसएल रिपोर्ट पर पुलिस भी हैरान है। रंजिशन और प्रॉपर्टी के विवाद या साजिशन जो रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही हैं उनमें यही है कि अपने ऊपर गोली चलने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया जाता है। इस साल आठ मामले ऐसे आए हैं जिनमें गोली चलने के साक्ष्य नहीं मिले। जिसमें पुलिस ने माना है कि पीड़ित व्यक्ति द्वारा साजिशन आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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आठ मई को खरखौदा क्षेत्र के कबट्टा गांव में मारपीट के बाद जातीय संघर्ष का मामला सामने आया। जिसमें एक पक्ष के लोगों ने फायरिंग का आरोप लगाया। मौके पर 315 बोर के दो खोखे भी मिलने की बात कहकर पुलिस को दिखाए। सीओ आलोक सिंह और एसओ खरखौदा कुलवीर सिंह ने जांच पड़ताल की। तहरीर के आधार पर जानलेवा हमले का केस दर्ज किया गया। लेकिन फोरेंसिक एक्सपर्ट ने कहा कि मौके पर जो दो खोखे मिले थे, जांच में सामने आया कि गोली नहीं चली। खोखे की जांच हुई तो फायर न होने की बात सामने आई। किसी प्लासनुमा वस्तु से कारतूस से आगे का भाग खींचा गया, जिस पर खोखे पर कई निशान मिले।
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सरधना प्रकरण
एक माह पहले सरधना की महिला ने अपने ऊपर फायरिंग की बात कही। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि जांच में सामने आया कि खोखा पुराना है। पुलिस ने गहनता से जांच की तो महिला ने खुद स्वीकार किया कि उसने रंजिशन केस दर्ज कराया था। इस प्रकरण में कपड़ों पर छर्रे के निशान मिले, लेकिन महिला के शरीर पर कोई निशान नहीं मिला।
फलावदा
बीस दिन पहले फलावदा में दो गुटों हुए मारपीट और फायरिंग के मामले में भी फोरेंसिक एक्सपर्ट ने कहा कि मौके पर जो खोखा मिला है उसे खींचकर अलग कर फेंका गया है। बाद में पुलिस ने जांच की तो युवक ने प्रॉपर्टी के विवाद में फंसाने के लिए फर्जी आरोप लगाकर जानलेवा हमला होने की बात कही थी।
लिसाड़ीगेट
20 फरवरी को लिसाड़ी गेट में प्रॉपर्टी डीलर ने जानलेवा हमले का आरोप लगाया था। जहां पुलिस को एक खोखा और एक बुलेट भी मिली थी। पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन जब बुलेट और खोखे की जांच फोरेंसिक एक्सपर्ट की तो पता चला कि फायर नहीं हुआ और खोखे का पीछे के भाग पर हल्के नुकीले निशान मिले, जिससे साफ हुआ कि कारतूस से गोली निकाली गई।
यह कहते हैं एक्सपर्ट
रिवाल्वर, पिस्टल या तमंचे में जो गोली डाली जाती है। उसमें पीछे का हिस्सा पीतल का होता है। इसमें बारूद भरा रहता है। आगे के हिस्से में रांग-जस्ता मिक्स होता है। इसे ही बुलेट कहते हैं। जब गोली के टारगेट पर पिन की चोट लगती है तो बारूद में विस्फोट होने के बाद बुलेट आग की शक्ल लेकर बहुत तेजी से निकलती है। असलहे की नली से इसकी स्पीड और तेज हो जाती है। लेकिन कई मामलों में जांच हुई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अलग-अलग मामलों में गोलियों की बुलेट व खोखे तो मौके पर मिले थे। लेकिन फायर नहीं हुआ था। इनकी बुलेट को गोली से बिना फायर करे ही निकालकर मौके पर फर्जी तरह से प्लांट कर दिया गया। ताकि दूसरे को फंसाया जा सके।
फायर की नहीं हुई पुष्टि
अलग-अलग मामलों में फोरेंसिक एक्सपर्ट ने जो रिपोर्ट पुलिस को भेजी है। उसमें यही कहा गया कि मौके पर जो खोखे मिले हैं उनमें फायर नहीं हुआ। फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट पर पुलिस ने गहनता से जांच की तो पता चला कि साजिशन जानलेवा हमले की धारा के लिए फायरिंग का आरोप लगाया गया। -अविनाश पांडेय, एसपी देहात