फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   कहीं भरा मिला पानी, कहीं मिली गंदगी

कहीं भरा मिला पानी, कहीं मिली गंदगी

Tue, 12 Sep 2017 03:16 AM IST
Updated Tue, 12 Sep 2017 03:16 AM IST
विज्ञापन
कहीं भरा मिला पानी, कहीं मिली गंदगी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज की बदहाल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब यूजर चार्ज (मरीजों से लिया जाने वाला पैसा) का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। सोमवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रोफेसर डॉ. जीके सिंह ने मेडिकल के निरीक्षण के दौरान यह सुझाव दिया। उन्होंने मेडिकल प्रबंधन से इस पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के लिए कहा है।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज में हर माह करीब 12-13 लाख रुपये यूजर चार्ज आता है। साल में कई बार यह 15-16 लाख भी पहुंच जाता है, जबकि सालाना तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपये होता है। यह पैसा मेडिकल प्रबंधन ट्रेजरी में जमा करता है, जो शासन को जाता है। दूसरी तरफ, मेडिकल की तरफ से 10 से 15 करोड़ रुपये का बजट शासन से मांगा जाता है, मगर मिलता है कि सिर्फ पांच से सात करोड़ रुपये। वहीं, केजीएमयू में यूजर चार्ज को वहां का प्रबंधन अस्पताल की सुविधाओं में इस्तेमाल कर लेता है, जिससे वहां मेडिकल कॉलेज की तरह ही रोजमर्रा दवाओं और एक्सरे फिल्म आदि के लिए यूजर चार्ज का इस्तेमाल कर इन्हें मंगा लिया जाता है। केजीएमयू प्रोफेसर ने मेडिकल प्रबंधन से कहा है कि इस संबंध में एक प्रस्ताव शासन को भेजा जाए, ताकि यहां भी यह व्यवस्था लागू हो सके और एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई फिल्म और दवाओं के लिए मरीजों को परेशानी न हो। डेढ़ करोड़ रुपये इस्तेमाल के लिए होंगे और कई चीजों के लिए शासन से आने वाले बजट का इंतजार नहीं करना होगा। मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में अक्सर बाहर से दवाएं लिखने, एक्सरे फिल्म नहीं होने और मरीजों को वापस भेजे जाने के मामले प्रकाश में आते रहते हैं।
विज्ञापन


बिजली, डीजल बचाने के लिए सोलर पैनल की जरूरत
केजीएमयू प्रोफेसर ने सुझाव दिया है कि हर साल लाखों रुपये की इस्तेमाल होने वाली बिजली और डीजल को बचाने केलिए सोलर पैनल लगाया जाना चाहिए। इस संबंध में भी उन्होंने प्रस्ताव भेजने को कहा है। निरीक्षण करने आए वह पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिसने मेडिकल कॉलेज की चार मंजिला छत पर चढ़कर निरीक्षण किया है, अभी तक सभी अधिकारी नीचे से ही वापस लौट गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहीं भरा मिला पानी तो कहीं मिली गंदगी
डॉ. जीके सिंह सुबह करीब साढ़े 10 बजे पहले इमरजेंसी गए और फिर ट्रॉमा सेंटर। दोनों ही जगह की व्यवस्थाओं से वह संतुष्ट नजर आए। हालांकि इमरजेंसी से बाहर निकलने के बाद उन्होंने टीनशैड के बराबर में भरे पानी को हटाने के लिए कहा। पुरानी बिल्डिंग में डायलिसिस विभाग, आईटी वार्ड, रेडियोलॉजी, नर्सरी, गायनिक वार्ड और फिर छत पर गए। रेडियोलॉजी में एक्सरे फिल्म के अभाव के बारे में बताया गया, तो गायनिक वार्ड में गंदगी मिली और ओटी में जनरेटर की सुविधा नहीं मिली। एसी भी नहीं मिला। एक-एक बेड पर कई-कई मरीज लेटे थे। इसके बाद उन्होंने जूनियर डॉक्टरों से मुलाकात की और उन्हें अनुशासन में रहने की सीख दी। उन्होंने फर्नीचर की कमी भी बताई।


आज भी देखेंगे व्यवस्था
शासन के निर्देश पर प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सीय व्यवस्थाओं का हाल 18 बिंदुओं पर जांचेंगे। वह यहां दो दिन रहेंगे। मंगलवार को भी वह यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे और रिपोर्ट तैयार कर उसे शासन को भेजेंगे। डॉ. जीके सिंह केजीएमयू में आर्थोपेडिक्स के विभागाध्यक्ष हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed