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विक्रेताओं को राहत, बढ़ सकते हैं दवाओं के दाम
Updated Tue, 04 Jul 2017 03:27 AM IST
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मेरठ। जीएसटी लगने के बाद असमंजस की स्थिति से गुजर रहे दवा विक्रेताओं के लिए राहत की खबर है। कई दवा कंपनियों ने सोमवार को अपनी रेट लिस्ट जारी कर दी है। इसके तहत जीएसटी लगने के बाद पुराने स्टॉक पर मुनाफे में जो कमी आएगी, वह थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं के बजाय कंपनी वहन करेगी। हालांकि अब यह डर भी सता रहा है कि कंपनियां इसकी भरपाई करने के लिए दवाओं के रेट बढ़ा सकती हैं।
मुनाफे का यह फंडा
मसलन, पुराने स्टॉक की एक दवा का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 100 रुपये है। पहले वह थोक विक्रेता को करीब 72 रुपये की पड़ती थी। थोक विक्रेता इसे रिटेलर को करीब 76.80 रुपये की देता था। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद भी फिलहाल 100 रुपये की दवा थोक विक्रेता और रिटेलर को 72 और 76.80 रुपये की ही पड़ेगी। इस 100 रुपये की दवा पर जीएसटी लगने के बाद कंपनी को लाभ में करीब पांच रुपये की कमी आएगी। यह कमी कंपनी खुद वहन करेगी। दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि यह साफ हो गया है कि कंपनियां नुकसान की भरपाई कर रही हैं। बाकी बची दवा कंपनियों की रेट लिस्ट भी एक-दो दिन में आ जाएगी।
फिर किसकी जेब पर फर्क
दूसरी तरफ, अगर कंपनियों ने दवाओं के रेट बढ़ाए तो यह फर्क ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। दवा कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी दवा कंपनियां थोक और रिटेलर के मुनाफे को पूरा दे रही हैं और जो घाटा हुआ है, वह खुद वहन कर रही हैं। लेकिन इसकी भरपाई वह खुदरा मूल्य बढ़ाकर कर सकती हैं। मसलन, 100 रुपये की दवा की कीमत 105 से 107 रुपये कर सकती हैं।
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खास बात
- असमंजस के बीच कई दवा कंपनियों ने जारी की रेट लिस्ट
- थोक और खुदरा दवा विक्रेता के बजाय कंपनी करेंगी मुनाफे में हुई कमी वहन
- मुनाफे की भरपाई करने के लिए कंपनियां बढ़ा सकती हैं दवाओं की एमआरपी
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मुनाफे का यह फंडा
मसलन, पुराने स्टॉक की एक दवा का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 100 रुपये है। पहले वह थोक विक्रेता को करीब 72 रुपये की पड़ती थी। थोक विक्रेता इसे रिटेलर को करीब 76.80 रुपये की देता था। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद भी फिलहाल 100 रुपये की दवा थोक विक्रेता और रिटेलर को 72 और 76.80 रुपये की ही पड़ेगी। इस 100 रुपये की दवा पर जीएसटी लगने के बाद कंपनी को लाभ में करीब पांच रुपये की कमी आएगी। यह कमी कंपनी खुद वहन करेगी। दवा विक्रेता मनोज अग्रवाल ने बताया कि यह साफ हो गया है कि कंपनियां नुकसान की भरपाई कर रही हैं। बाकी बची दवा कंपनियों की रेट लिस्ट भी एक-दो दिन में आ जाएगी।
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फिर किसकी जेब पर फर्क
दूसरी तरफ, अगर कंपनियों ने दवाओं के रेट बढ़ाए तो यह फर्क ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। दवा कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी दवा कंपनियां थोक और रिटेलर के मुनाफे को पूरा दे रही हैं और जो घाटा हुआ है, वह खुद वहन कर रही हैं। लेकिन इसकी भरपाई वह खुदरा मूल्य बढ़ाकर कर सकती हैं। मसलन, 100 रुपये की दवा की कीमत 105 से 107 रुपये कर सकती हैं।
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खास बात
- असमंजस के बीच कई दवा कंपनियों ने जारी की रेट लिस्ट
- थोक और खुदरा दवा विक्रेता के बजाय कंपनी करेंगी मुनाफे में हुई कमी वहन
- मुनाफे की भरपाई करने के लिए कंपनियां बढ़ा सकती हैं दवाओं की एमआरपी