फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्घति को बदलना जरूरी

लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्घति को बदलना जरूरी

Wed, 30 Jan 2019 02:26 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2019 02:26 AM IST
विज्ञापन
लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्घति को बदलना जरूरी
लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्घति को बदलना जरूरी
विज्ञापन


मेरठ। पुरानी शिक्षा पद्घति हमारा आदर्श थी। पहले गुरुकुल में शिक्षक बच्चों को कुछ सिखाता था तो पहले वह खुद करके दिखाता था। लेकिन लार्ड मैकाले ने हमारी शिक्षा पद्घति को बदल दिया। उसका कहना था यदि भारत की शिक्षा पद्घति नहीं बदली तो भारतीयों के अंदर स्वाभिमान जागा रहेगा। इनका स्वाभिमान खत्म करने के लिए शिक्षा पद्घति को बदला जाए। इसीलिए शिक्षा पद्घति हमारी होनी चाहिए। क्योंकि शिक्षा ही जीवन का आधार है। यह बातें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में प्रायोगिक शिक्षा-गांधी की नई तालीम विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा ने कहीं।
सेमिनार उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। सीसीएसयू की कार्य समिति के सदस्य डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा ने कहा कि छात्रों का सम्मान करना चाहिए, तब ही हमारा भी सम्मान होगा। उनके प्रति अपनत्व का भाव जगाना चाहिए। व्यवहारिक ज्ञान भी बच्चों को सिखाना जरूरी है। नैतिक शिक्षा का आधार बहुत आवश्यक है। मुख्य वक्ता सीसीएसयू के शिक्षा विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरक्षापाल ने कहा कि गांधी जी का पता था कि यदि अंग्रेजी के प्रति लोगों को मोह खत्म नहीं हुआ तो देश को कभी स्वाराज्य नहीं मिलेगा। यदि हमने शिक्षा पद्घति में बदलाव नहीं किया तो हम परतंत्रता की बेड़ी में जकडे़ रहेंगे। उन्होंने कहा कि कार्य और ज्ञान एक दूसरे से जुडे़ हुए हैं। बिना कार्य किए ज्ञान नहीं आ सकता है।
विज्ञापन

प्राथमिक शिक्षा प्रायोगिक होनी चाहिए
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीसीएसयू के कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा प्रायोगिक होनी चाहिए। यदि प्राथमिक शिक्षा प्रायोगिक नहीं है तो कुशाग्र बुद्धि वाले बच्चे का विकास नहीं हो पाता है। शहर के मुकाबले ग्रामीण शिक्षा आज भी पिछड़ी हुई है। इसका मुख्य कारण है धन का व्यय न होना। भारत सरकार द्वारा इसके लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। अटल इनोवेशन योजना के लिए लैब खोली जा रही हैं, जिससे बच्चों का विकास हो सके। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद से आए डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि गांधी जी ने कहा कि भौतिकतावाद की चकाचौंध से हमको दूर होना है। गांधी जी शारीरिक मानसिक व बौद्धिक शिक्षा की बात किया करते थे। इसलिए हमारी शिक्षा रोजगार परक होनी चाहिए। वर्तमान में युवा रोजगार के लिए भ्रमित हो रहा है। मंच का संचालन शिक्षा विभाग की छात्राओं ने किया। शिक्षा विभाग के डीन और विभागाध्यक्ष प्रो. जगबीर भारद्वाज ने सभी का स्वागत किया। इस दौरान प्रो. रूप नारायण, प्रो. सत्यप्रकाश गर्ग, प्रो. वीरपाल, प्रो. पीके मिश्रा, प्रो. बीर सिंह, प्रो. आलोक, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. पवन कुमार, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. विजय जायसवाल, डॉ. धर्मेंद्र, मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed