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नगरायुक्त के अनुमोदन के बाद भी लिपिकों की सूची जारी नहीं
Updated Tue, 12 Jun 2018 02:10 AM IST
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नगरायुक्त के अनुमोदन के बाद भी लिपिकों की सूची जारी नहीं
मेरठ। नगर निगम के हाउस टैक्स और होर्डिंग विभाग में 30-30 साल से जमे बाबुओं के पटल परिवर्तन की सूची पर नगरायुक्त का अनुमोदन हो चुका है। उसके तीन दिन बाद भी सूची जारी नहीं की गई है।
नगर निगम के हाउस टैक्स, होर्डिंग, जलकल, अकाउंट, निर्माण, नगर स्वास्थ्य विभागों में 100 से अधिक लिपिक हैं। इनमें से काफी ऐसे लिपिक भी हैं जो कर्मचारी संघ से जुड़े रहे हैं। वह 30-30 साल से एक सीट पर जमे हैं। खासकर हाउस टैक्स और निर्माण विभाग में ऐसा हाल है। दोनों ही विभागों के लिपिकों की शिकायतें शासन तक पहुंची हैं। शासन ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में तीन साल से अधिक समय से कुर्सियों पर जमे सभी लिपिकों को इधर से उधर करने के आदेश जारी किए हैं। नगर निगम प्रशासन ने 100 लिपिकों के नामों की सूची तैयार की। बीते शनिवार को नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी द्वारा तैयार की गई सूची पर अनुमोदन कर दिया। सोमवार से सूची में शामिल सभी लिपिकों को इधर से उधर करने के आदेश जारी किए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं कुछ लिपिकों के एक खेमे ने भाजपाइयों से संपर्क किया। जिन्होंने निगम में शासनादेश का उल्लंघन किए जाने की शिकायत की है। मामला शासन को भेजा जा रहा है।
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मेरठ। नगर निगम के हाउस टैक्स और होर्डिंग विभाग में 30-30 साल से जमे बाबुओं के पटल परिवर्तन की सूची पर नगरायुक्त का अनुमोदन हो चुका है। उसके तीन दिन बाद भी सूची जारी नहीं की गई है।
नगर निगम के हाउस टैक्स, होर्डिंग, जलकल, अकाउंट, निर्माण, नगर स्वास्थ्य विभागों में 100 से अधिक लिपिक हैं। इनमें से काफी ऐसे लिपिक भी हैं जो कर्मचारी संघ से जुड़े रहे हैं। वह 30-30 साल से एक सीट पर जमे हैं। खासकर हाउस टैक्स और निर्माण विभाग में ऐसा हाल है। दोनों ही विभागों के लिपिकों की शिकायतें शासन तक पहुंची हैं। शासन ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में तीन साल से अधिक समय से कुर्सियों पर जमे सभी लिपिकों को इधर से उधर करने के आदेश जारी किए हैं। नगर निगम प्रशासन ने 100 लिपिकों के नामों की सूची तैयार की। बीते शनिवार को नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी द्वारा तैयार की गई सूची पर अनुमोदन कर दिया। सोमवार से सूची में शामिल सभी लिपिकों को इधर से उधर करने के आदेश जारी किए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं कुछ लिपिकों के एक खेमे ने भाजपाइयों से संपर्क किया। जिन्होंने निगम में शासनादेश का उल्लंघन किए जाने की शिकायत की है। मामला शासन को भेजा जा रहा है।
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