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माता-पिता के मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए भटक रहे
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माता-पिता के मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए भटक रहे
मवाना। दो माह पहले पल्टूपुरी गांव में शोहदों से तंग आकर पूरे परिवार के साथ जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने वाले दंपती का पुत्र व पुत्री उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। दो माह बीत चुके हैं परंतु पिता-माता का मृत्यु प्रमाण पत्र अफसर नहीं बनवा सके हैं। जिस कारण न तो बकाया गन्ने का भुगतान बहन भाई को मिल पा रहा है और न ही बांड पुत्र के नाम पर हो पा रहा है। इसके अलावा अभी तक शासन से मिलने वाली दूसरी किस्त भी नहीं मिलने के कारण बहन-भाई को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
यह था मामला
हस्तिनापुर थाना क्षेत्र के पल्टूपुरी गांव में अनुसूचित जन जाति के एक परिवार को गांव के ही कश्यप समाज का एक परिवार आए दिन उत्पीड़न करता था। आते जाते महिला से छेड़छाड़ व विरोध करने पर दंपती से मारपीट की जाती थी। इस मामले में दंपती ने थाना पुलिस व कोर्ट के सहारे मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया। लेकिन आरोपियों ने दोनों को घर में बंधक बनाकर जमकर मारपीट की। कहीं से भी मदद न मिलने पर दंपती ने अपनी बेटी के साथ मिलकर जहर खा लिया था। इस घटना में महिला की मौत हो गई थी, जबकि उसके पति की 23 दिन बाद उपचार के दौरान अस्पताल में मौत होगई थी।
डर के चलते गांव से किया पलायन
पिता-माता की मृत्यु के बाद बहन-भाई ने घर पर ताला लगा दिया और गांव से पलायन कर लिया। आज दोनों किराये के मकान में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। दंपती की पुत्री ने बताया कि पढ़ाई के लिए भी धन की जरूरत पड़ रही है। शासन से अब तक उन्हें दूसरी किस्त प्राप्त नहीं हुई। पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में वह एसडीएम, सीओ व मेरठ के अधिकारियों से मिल चुकी है। इसके बावजूद अभी तक दूसरी किस्त पास नहीं हो सकी है।
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नहीं बन सका मृत्यु प्रमाण-पत्र
पीड़ित ने बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। दो माह से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक दोनों के मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन सके हैं। उनके पिता ने मिल में जो गन्ना डाला था उसका भुगतान भी नहीं हुआ है। मृत्यु प्रमाणपत्र न बनने से जमीन का बांड उसके भाई के नाम पर नहीं हो पा रहा है। जिस कारण पेराई सत्र शुरू होने के बाद उनके सामने पर्चियों का संकट गहराएगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल का भुगतान नहीं हो सका, जिस कारण अस्पताल ने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनाया।
धाराओं में खेल करने का लगाया आरोप
पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने जो तहरीर दी थी उस तहरीर के हिसाब से धाराओं में खेल किया गया है। पुलिस प्रशासन ने औपचारिकताएं निभाई। एससीएसटी धारा को छोड़कर कोई बड़ी धारा नहीं लगाई गई। पुलिस ने जान बुझकर उनका केस कमजोर किया ताकि आरोपियों को जमानत आसानी से मिल सके। शनिवार को बहन-भाई सीओ मवाना से मिले और दूसरी किस्त जल्द दिलाने व दोबारा से जांच कराएं जाने की मांग की।
सीओ ने दोनों को दिया आश्वासन
दूसरी किस्त को लेकर समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा है। जल्द ही दूसरी किस्त पीड़ितों के खाते में भेज दी जाएगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।
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मवाना। दो माह पहले पल्टूपुरी गांव में शोहदों से तंग आकर पूरे परिवार के साथ जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने वाले दंपती का पुत्र व पुत्री उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। दो माह बीत चुके हैं परंतु पिता-माता का मृत्यु प्रमाण पत्र अफसर नहीं बनवा सके हैं। जिस कारण न तो बकाया गन्ने का भुगतान बहन भाई को मिल पा रहा है और न ही बांड पुत्र के नाम पर हो पा रहा है। इसके अलावा अभी तक शासन से मिलने वाली दूसरी किस्त भी नहीं मिलने के कारण बहन-भाई को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
यह था मामला
हस्तिनापुर थाना क्षेत्र के पल्टूपुरी गांव में अनुसूचित जन जाति के एक परिवार को गांव के ही कश्यप समाज का एक परिवार आए दिन उत्पीड़न करता था। आते जाते महिला से छेड़छाड़ व विरोध करने पर दंपती से मारपीट की जाती थी। इस मामले में दंपती ने थाना पुलिस व कोर्ट के सहारे मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया। लेकिन आरोपियों ने दोनों को घर में बंधक बनाकर जमकर मारपीट की। कहीं से भी मदद न मिलने पर दंपती ने अपनी बेटी के साथ मिलकर जहर खा लिया था। इस घटना में महिला की मौत हो गई थी, जबकि उसके पति की 23 दिन बाद उपचार के दौरान अस्पताल में मौत होगई थी।
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डर के चलते गांव से किया पलायन
पिता-माता की मृत्यु के बाद बहन-भाई ने घर पर ताला लगा दिया और गांव से पलायन कर लिया। आज दोनों किराये के मकान में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। दंपती की पुत्री ने बताया कि पढ़ाई के लिए भी धन की जरूरत पड़ रही है। शासन से अब तक उन्हें दूसरी किस्त प्राप्त नहीं हुई। पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में वह एसडीएम, सीओ व मेरठ के अधिकारियों से मिल चुकी है। इसके बावजूद अभी तक दूसरी किस्त पास नहीं हो सकी है।
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नहीं बन सका मृत्यु प्रमाण-पत्र
पीड़ित ने बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। दो माह से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक दोनों के मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन सके हैं। उनके पिता ने मिल में जो गन्ना डाला था उसका भुगतान भी नहीं हुआ है। मृत्यु प्रमाणपत्र न बनने से जमीन का बांड उसके भाई के नाम पर नहीं हो पा रहा है। जिस कारण पेराई सत्र शुरू होने के बाद उनके सामने पर्चियों का संकट गहराएगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल का भुगतान नहीं हो सका, जिस कारण अस्पताल ने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनाया।
धाराओं में खेल करने का लगाया आरोप
पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने जो तहरीर दी थी उस तहरीर के हिसाब से धाराओं में खेल किया गया है। पुलिस प्रशासन ने औपचारिकताएं निभाई। एससीएसटी धारा को छोड़कर कोई बड़ी धारा नहीं लगाई गई। पुलिस ने जान बुझकर उनका केस कमजोर किया ताकि आरोपियों को जमानत आसानी से मिल सके। शनिवार को बहन-भाई सीओ मवाना से मिले और दूसरी किस्त जल्द दिलाने व दोबारा से जांच कराएं जाने की मांग की।
सीओ ने दोनों को दिया आश्वासन
दूसरी किस्त को लेकर समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा है। जल्द ही दूसरी किस्त पीड़ितों के खाते में भेज दी जाएगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।