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2016 में ओडीएफ घोषित, अब रसोईघर बन गए शौचालय

Fri, 21 Jun 2019 02:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jun 2019 02:28 AM IST
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2016 में ओडीएफ घोषित, अब रसोईघर बन गए  शौचालय
2016 में ओडीएफ घोषित, अब रसोईघर बन गए शौचालय
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ओडीएफ का दर्जा प्राप्त गांव में 109 शौचालयों को नहीं जोड़ा गया टैंक से
खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं लाभार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वच्छत भारत अभियान के तहत ओडीएफ का दर्जा प्राप्त मोरना गांव में शौचालय गोदाम और रसोईघर बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में 232 शौचालयों का निर्माण हुआ था, लेकिन अभी भी 109 शौचालय ऐसे हैं, लेकिन टैंक नहीं बनाए गए हैं, ऐसे में शौचालय बनने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति उस गांव की है जहां के ग्राम प्रधान को वर्ष 2016 में ओडीएफ के लिए जिला अधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2016 में गांव को शौच मुक्त घोषित कर दिया गया था। गांव में शौचालयों का निर्माण कराया गया, लेकिन इनके लिए टैंक नहीं बनाया गया। सिर्फ चारदीवारी का निर्माण कर सीट रख जिम्मेदारों ने वाहवाही लूट ली, ऐसे में शौचालय बनने के बाद भी कई लोग आज भी खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। आरोप है कि वे कई बार ग्राम प्रधान व संबंधित विभाग के अफसरों से इसकी शिकायत कर चुके हैं। शिकायत के बाद अफसर जांच के लिए भी आए, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
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प्रधान से आश्वासन दिया
लाभार्थी ममता ससुर रामानंद ने बताया कि घर में शौचालय तो बना, लेकिन इसे टैंक से नहीं जोड़ा गया। ग्राम प्रधान से इसकी शिकायत की। उन्होंने जल्द टैंक बनवाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
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न सीट लगी न टैंक बना
सीमा ने बताया कि उसकी सास लाभार्थी जगवती के नाम पर घर में शौचालय का निर्माण हुआ, लेकिन न सीट लगी न टैंक बस चार दिवारी बनाकर चले गए। शिकायत भी की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब सास की भी मौत हो चुकी है।
रसोईघर बना दिया
लाभार्थी शबनम पत्नी फुरकान के घर पर बने शौचालय को भी टैंक से नहीं जोड़ा गया। अब इस परिवार ने शौचालय रसोईघर बना लिया है।
कोई नहीं सुन रहा
मुध और उनका पति रंजीत दोनों ही दिव्यांग है। वह शौचालय के लाभार्थी तो बन गए, लेकिन शौचालय बनने के बाद टैंक से नहीं जोड़ा गया। वे शिकायत कर-कर के थक चुके हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा।

खुले में जा रहे शौच
बजरंगदल से प्रंखड उपाध्यक्ष मोहित काम्बोज ने बताया कि 2016 मे गांव शौच मुक्त घोषित हो चुका है। लेकिन लाभार्थी आज भी खुले में ही शौच के लिए जा रहे हैं। इस बारे मे कई बार अधिकारियों व ग्राम प्रधान से शिकायत की गई, लेकिन कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।
बनवाए थे टैंक
सभी शौचालयो के टैंक बनवाए थे। अगर किसी लाभार्थी ने इस टैंक को बंद कर दिया है तो इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है। - शहजाद, ग्राम प्रधान
जांच कराई जाएगी
मामला संज्ञान में नहीं है, अगर ऐसा है तो आज ही गांव में टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। - चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
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