{"_id":"5d06a06d8ebc3e4d6568981d","slug":"15607153613-meerut-news144","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामराज में मंडी है पर सुविधाएं नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामराज में मंडी है पर सुविधाएं नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामराज में मंडी है पर सुविधाएं नहीं
बहसूमा। मंडी समिति द्वारा लाखों रुपये राजस्व वसूलने के बाद भी रामराज अनाज मंडी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। करीब एक दशक पूर्व ग्राम प्रधान रमेश मक्कड़ के प्रयास से ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर व्यापारियों के सहयोग से लाखों रुपये की लागत से रामराज अनाज मंडी का निर्माण कराया गया था। मंडी समिति द्वारा सुविधाएं नहीं देने से किसानों एवं आढ़तियों का यहां से मोह भंग हो रहा है।
पूर्व ग्राम प्रधान रमेश मक्कड़ व्यापारी होने के साथ किसान भी हैं। किसानों एवं व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2007 में रामराज अनाज मंडी का निर्माण किया गया था। 12 साल बीत जाने के बाद भी सुविधाओं के अभाव में आज किसान शहर की ओर रुख करने को मजबूर हो रहा है। मंडी समिति की उपेक्षा के कारण 12 साल बाद भी मंडी गुलजार नहीं हो सकी है।
मंडी निर्माण के बाद से आज तक फड़ नहीं बनी
रामराज अनाज मंडी निर्माण के बाद से ही आढ़तियों की दुकानों के आगे लगने वाले फड़ बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया है। मंडी के अंदर आज तक सड़कें नहीं बनाई गई हैं। उनके नहीं बनने से व्यापारियों एवं किसानों को लोेडेड वाहनों से परेशानी होती है। वहीं, पथ प्रकाश के लिए खंभों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें या तो टूटी पड़ी हैं या फिर वे गायब हैं। जिस कारण रात के समय किसानों एवं आढ़तियों में भय बना रहता है। मंडी सेक्चुंरी क्षेत्र के साथ रामराज गंगनहर से सटी हुई है। इस कारण ओर भी खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
कैंटीन भी नहीं
दूरदराज के किसान आढ़तियों को गेहूं एवं धान बेचने आते हैं। मंडी के भीतर कैंटीन तो बनी है परंतु संचालित नहीं की जा रही है। जिससे किसान एवं आढ़ती दोनों को कभी-कभी पूरे दिन भूखा प्यासा ही रहना पड़ता है। टिन शेड का आंधी में उड़ने का भी खतरा रहता है।
पानी की सुविधा नही
रामराज अनाज मंडी बडे़ क्षेत्रफल में फैली है। मंडी में किसानों एवं व्यापारियों के लिए न तो टंकी है और न ही सबमर्सिबल की व्यवस्था है। जिससे लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। मंडी परिसर में केवल दो सरकारी हैंडपंप लगे हैं।
केंद्र एवं प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसके बावजूद मंडी में सफाई के लिए समिति की ओर से कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। मंडी में चारों ओर गंदगी के अबंार लगे हैं। व्यापारी राजीव छाबड़ा, रोहित बंसल व सुरेद्र आहुजा ने बताया कि मंडी की सफाई के लिए व्यापारियों के सहयोग से एक सफाईकर्मी है। सफाईकर्मी की पगार आढ़ती आपस में रुपये एकत्र करके देते हैं। मंडी के शौचालय भी बदहाल हो चुके हैं। इसलिए उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। किसानों को ठहरने के लिए मंडी में किसान भवन तक का निर्माण नहीं किया गया है। कभी-कभी रात में रुकने के लिए किसानों की खातिर कोई सुविधा नहीं है। हालांकि किसान ठहरने के लिए भवन की व्यवस्था किए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि आज तक सुनवाई नही हुई है।
धान व अनाज तक ही समिति
रामराज अनाज मंडी का निर्माण उस समय यह सोचकर कराया गया था कि यहां रामराज खादर क्षेत्र के किसानों द्वारा फल, सब्जी, गुड़ व अन्य खाद्यान बिक्री के लिए उचित जगह मिल सकेगी। वहीं, किसानों से राजस्व प्राप्त होगा। हालांकि आढ़तियों का भी मंडी से मोह भंग होने लगा है। मंडी सचिव राजपाल सिंह का कहना है कि रामराज अनाज मंडी मवाना मंडी का उपभाग है। मंडी से प्रतिवर्ष करीब 50 लाख रुपये राजस्व प्राप्त होता है। इस मंडी का व्यापारियों द्वारा निर्माण कराया गया है। अभी यह मंडी रेग्यूलेट नहीं हुई है। इसके लिए उच्चअधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
विज्ञापन
बहसूमा। मंडी समिति द्वारा लाखों रुपये राजस्व वसूलने के बाद भी रामराज अनाज मंडी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। करीब एक दशक पूर्व ग्राम प्रधान रमेश मक्कड़ के प्रयास से ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर व्यापारियों के सहयोग से लाखों रुपये की लागत से रामराज अनाज मंडी का निर्माण कराया गया था। मंडी समिति द्वारा सुविधाएं नहीं देने से किसानों एवं आढ़तियों का यहां से मोह भंग हो रहा है।
पूर्व ग्राम प्रधान रमेश मक्कड़ व्यापारी होने के साथ किसान भी हैं। किसानों एवं व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2007 में रामराज अनाज मंडी का निर्माण किया गया था। 12 साल बीत जाने के बाद भी सुविधाओं के अभाव में आज किसान शहर की ओर रुख करने को मजबूर हो रहा है। मंडी समिति की उपेक्षा के कारण 12 साल बाद भी मंडी गुलजार नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
मंडी निर्माण के बाद से आज तक फड़ नहीं बनी
रामराज अनाज मंडी निर्माण के बाद से ही आढ़तियों की दुकानों के आगे लगने वाले फड़ बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया है। मंडी के अंदर आज तक सड़कें नहीं बनाई गई हैं। उनके नहीं बनने से व्यापारियों एवं किसानों को लोेडेड वाहनों से परेशानी होती है। वहीं, पथ प्रकाश के लिए खंभों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें या तो टूटी पड़ी हैं या फिर वे गायब हैं। जिस कारण रात के समय किसानों एवं आढ़तियों में भय बना रहता है। मंडी सेक्चुंरी क्षेत्र के साथ रामराज गंगनहर से सटी हुई है। इस कारण ओर भी खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
कैंटीन भी नहीं
दूरदराज के किसान आढ़तियों को गेहूं एवं धान बेचने आते हैं। मंडी के भीतर कैंटीन तो बनी है परंतु संचालित नहीं की जा रही है। जिससे किसान एवं आढ़ती दोनों को कभी-कभी पूरे दिन भूखा प्यासा ही रहना पड़ता है। टिन शेड का आंधी में उड़ने का भी खतरा रहता है।
पानी की सुविधा नही
रामराज अनाज मंडी बडे़ क्षेत्रफल में फैली है। मंडी में किसानों एवं व्यापारियों के लिए न तो टंकी है और न ही सबमर्सिबल की व्यवस्था है। जिससे लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। मंडी परिसर में केवल दो सरकारी हैंडपंप लगे हैं।
केंद्र एवं प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसके बावजूद मंडी में सफाई के लिए समिति की ओर से कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। मंडी में चारों ओर गंदगी के अबंार लगे हैं। व्यापारी राजीव छाबड़ा, रोहित बंसल व सुरेद्र आहुजा ने बताया कि मंडी की सफाई के लिए व्यापारियों के सहयोग से एक सफाईकर्मी है। सफाईकर्मी की पगार आढ़ती आपस में रुपये एकत्र करके देते हैं। मंडी के शौचालय भी बदहाल हो चुके हैं। इसलिए उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। किसानों को ठहरने के लिए मंडी में किसान भवन तक का निर्माण नहीं किया गया है। कभी-कभी रात में रुकने के लिए किसानों की खातिर कोई सुविधा नहीं है। हालांकि किसान ठहरने के लिए भवन की व्यवस्था किए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि आज तक सुनवाई नही हुई है।
धान व अनाज तक ही समिति
रामराज अनाज मंडी का निर्माण उस समय यह सोचकर कराया गया था कि यहां रामराज खादर क्षेत्र के किसानों द्वारा फल, सब्जी, गुड़ व अन्य खाद्यान बिक्री के लिए उचित जगह मिल सकेगी। वहीं, किसानों से राजस्व प्राप्त होगा। हालांकि आढ़तियों का भी मंडी से मोह भंग होने लगा है। मंडी सचिव राजपाल सिंह का कहना है कि रामराज अनाज मंडी मवाना मंडी का उपभाग है। मंडी से प्रतिवर्ष करीब 50 लाख रुपये राजस्व प्राप्त होता है। इस मंडी का व्यापारियों द्वारा निर्माण कराया गया है। अभी यह मंडी रेग्यूलेट नहीं हुई है। इसके लिए उच्चअधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।