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योगी सरकार में इस साल बढ़ गया अपराध
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योगी सरकार में इस साल बढ़ गया अपराध
- मई 2018 में सबसे कम रहा है अपराध का ग्राफ
- मई 2019 के आंकड़े दे रहे अपराध बढ़ने की गवाही
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आते ही अपराधों का ग्राफ काफी कम हो गया था। 2017 में मई माह के आंकड़े इसकी साफ गवाही दे रहे हैं। इसके साथ ही 2018 में भी अपराध का ग्राफ कम रहा, जबकि इस साल मई में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में अधिकारियों का शिकंजा बदमाशों से हट गया और अपराधों में वृद्धि नजर आई।
डीएम की अध्यक्षता में होने वाली कानून एवं शांति व्यवस्था की मासिक बैठक में पुलिस द्वारा मई माह के जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए वो बेहद चौंकाने वाले हैं। हालांकि इन आंकड़ों पर सवाल भी उठ रहा है, क्योंकि अपराध कहीं ज्यादा नजर आते हैं, तो आंकड़ों में वह कम नजर आ रहे हैं। लेकिन यह सत्य है कि सरकारी आंकड़ों में पिछले दो साल की तुलना में इस बार मई माह में अपराध बढ़े हैं।
सबसे ज्यादा बढ़ी वाहन चोरी
अपराधाें का श्रेणीवार जो आंकड़ा दिया गया है, उसके अनुसार 2017 में दो डकैती के मुकदमे दर्ज हुए थे, जबकि 2018 और 2019 में डकैती की कोई घटना आंकड़ों में दर्ज नहीं हुई। 2017 में लूट की 17 घटनाएं हुई थी जो 2018 में घटकर मात्र 8 रह गई, लेकिन 2019 में इनकी संख्या 15 पहुंच गई। इसी तरह 2017 मई मेें 15 हत्याएं हुई तो 2018 में 8 और 2019 में इनकी संख्या 9 पहुंच गई। वाहन चोरी साल दर साल बढ़ी है। 2017 मई माह में 139 वाहन चोरी हुए थे, जबकि 2018 में इनकी संख्या 152 रही तो 2019 में इनकी संख्या 197 पहुंच गई। बलात्कार के भी 2017 में 19 मामले दर्ज हुए थे, जो 2018 में घटकर 4 रह गए, लेकिन 2019 में इनकी संख्या 12 पहुंच गई। शीलभंग के 2017 में 28, 2018 में 12 और 2019 में 27 मामले दर्ज हुए। अपहरण के 2017 में 28 मामले दर्ज हुए तो 2018 में इनकी संख्या घटकर 11 रह गई, लेकिन 2019 में फिर से 22 पहुंच गई। चेन स्नेचिंग का आंकड़ा पुलिस ने जरूर दुरुस्त किया है। 2017 में मात्र 2 घटनाएं हुई तो 2018 में मात्र एक ही घटना दर्शाई गई है, जबकि 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 3 पहुंच गई।
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पीड़ितों के मुकदमे दर्ज करने में पुलिस रही तत्पर
थानों में पहुंचने वाले पीड़ितों की सुनवाई होना आंकड़े जरूर बता रहे हैं। क्योंकि 2017 में जहां 858 मामले दर्ज हुए तो 2018 में इनकी संख्या 887 रही, जबकि 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 1316 पहुंच गई।
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- मई 2018 में सबसे कम रहा है अपराध का ग्राफ
- मई 2019 के आंकड़े दे रहे अपराध बढ़ने की गवाही
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आते ही अपराधों का ग्राफ काफी कम हो गया था। 2017 में मई माह के आंकड़े इसकी साफ गवाही दे रहे हैं। इसके साथ ही 2018 में भी अपराध का ग्राफ कम रहा, जबकि इस साल मई में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में अधिकारियों का शिकंजा बदमाशों से हट गया और अपराधों में वृद्धि नजर आई।
डीएम की अध्यक्षता में होने वाली कानून एवं शांति व्यवस्था की मासिक बैठक में पुलिस द्वारा मई माह के जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए वो बेहद चौंकाने वाले हैं। हालांकि इन आंकड़ों पर सवाल भी उठ रहा है, क्योंकि अपराध कहीं ज्यादा नजर आते हैं, तो आंकड़ों में वह कम नजर आ रहे हैं। लेकिन यह सत्य है कि सरकारी आंकड़ों में पिछले दो साल की तुलना में इस बार मई माह में अपराध बढ़े हैं।
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सबसे ज्यादा बढ़ी वाहन चोरी
अपराधाें का श्रेणीवार जो आंकड़ा दिया गया है, उसके अनुसार 2017 में दो डकैती के मुकदमे दर्ज हुए थे, जबकि 2018 और 2019 में डकैती की कोई घटना आंकड़ों में दर्ज नहीं हुई। 2017 में लूट की 17 घटनाएं हुई थी जो 2018 में घटकर मात्र 8 रह गई, लेकिन 2019 में इनकी संख्या 15 पहुंच गई। इसी तरह 2017 मई मेें 15 हत्याएं हुई तो 2018 में 8 और 2019 में इनकी संख्या 9 पहुंच गई। वाहन चोरी साल दर साल बढ़ी है। 2017 मई माह में 139 वाहन चोरी हुए थे, जबकि 2018 में इनकी संख्या 152 रही तो 2019 में इनकी संख्या 197 पहुंच गई। बलात्कार के भी 2017 में 19 मामले दर्ज हुए थे, जो 2018 में घटकर 4 रह गए, लेकिन 2019 में इनकी संख्या 12 पहुंच गई। शीलभंग के 2017 में 28, 2018 में 12 और 2019 में 27 मामले दर्ज हुए। अपहरण के 2017 में 28 मामले दर्ज हुए तो 2018 में इनकी संख्या घटकर 11 रह गई, लेकिन 2019 में फिर से 22 पहुंच गई। चेन स्नेचिंग का आंकड़ा पुलिस ने जरूर दुरुस्त किया है। 2017 में मात्र 2 घटनाएं हुई तो 2018 में मात्र एक ही घटना दर्शाई गई है, जबकि 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 3 पहुंच गई।
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पीड़ितों के मुकदमे दर्ज करने में पुलिस रही तत्पर
थानों में पहुंचने वाले पीड़ितों की सुनवाई होना आंकड़े जरूर बता रहे हैं। क्योंकि 2017 में जहां 858 मामले दर्ज हुए तो 2018 में इनकी संख्या 887 रही, जबकि 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 1316 पहुंच गई।