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जैन धर्म निरंतर प्रगति की ओर : मुनिश्री
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जैन धर्म निरंतर प्रगति की ओर : मुनिश्री
हस्तिनापुर। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में शुक्रवार को जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक हुआ।
इसके पश्चात शांतिधारा करने का सौभाग्य शीला जैन, जेके जैन, शालिनी, शरद जैन, निशुंकू जैन, आरव को प्राप्त हुआ। मुनिश्री भावभूषण जी महाराज द्वारा क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जैन धर्म अनादि धर्म है। इसके प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए हैं। उन्होंने षटकर्म का उपदेश देकर प्राणियों को जीवन निर्वाह करने की शिक्षा दी है। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी हैं। उन्होंने अंहिसा, सत्य, अचैर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह का पाठ पढ़ाया। भगवान पुष्पदंत से लेकर 15वें तीर्थंकर धर्मनाथ के समय तक कई बार धर्म का विच्छेद हुआ है। जब से हस्तिनापुर की इस धरा पर जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान का जन्म हुआ है। तब से लेकर आज तक भगवान महावीर का ये शासनकाल चल रहा है। अब तक जैन धर्म की महती प्रभावना हो रही है। जैन धर्म निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। पं. आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। सायंकालीन संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति की। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम धार्मिक प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिनके पुरस्कार जगभूषण जैन, दिल्ली द्वारा प्रदान किये। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष सतेन्द्र कुमार, मंत्री प्रद्युमन कुमार, मंत्री राजीव जैन सहारनपुर, शशांक जैन , विजय कुमार, विनोद जैन, अनिल कुमार, वीरेन्द्र कुमार, मोतीलाल जैन हस्तिनापुर, जितेन्द्र कुमार जैन, सुशील जैन, राकेश, अतुल, कपिल, मुकेश जैन (महाप्रबंधक), अशोक कुमार जैन उपप्रबंधक, उमेश जैन, मणिचंद जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा है।
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हस्तिनापुर। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में शुक्रवार को जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक हुआ।
इसके पश्चात शांतिधारा करने का सौभाग्य शीला जैन, जेके जैन, शालिनी, शरद जैन, निशुंकू जैन, आरव को प्राप्त हुआ। मुनिश्री भावभूषण जी महाराज द्वारा क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जैन धर्म अनादि धर्म है। इसके प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए हैं। उन्होंने षटकर्म का उपदेश देकर प्राणियों को जीवन निर्वाह करने की शिक्षा दी है। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी हैं। उन्होंने अंहिसा, सत्य, अचैर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह का पाठ पढ़ाया। भगवान पुष्पदंत से लेकर 15वें तीर्थंकर धर्मनाथ के समय तक कई बार धर्म का विच्छेद हुआ है। जब से हस्तिनापुर की इस धरा पर जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान का जन्म हुआ है। तब से लेकर आज तक भगवान महावीर का ये शासनकाल चल रहा है। अब तक जैन धर्म की महती प्रभावना हो रही है। जैन धर्म निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। पं. आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। सायंकालीन संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति की। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम धार्मिक प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिनके पुरस्कार जगभूषण जैन, दिल्ली द्वारा प्रदान किये। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष सतेन्द्र कुमार, मंत्री प्रद्युमन कुमार, मंत्री राजीव जैन सहारनपुर, शशांक जैन , विजय कुमार, विनोद जैन, अनिल कुमार, वीरेन्द्र कुमार, मोतीलाल जैन हस्तिनापुर, जितेन्द्र कुमार जैन, सुशील जैन, राकेश, अतुल, कपिल, मुकेश जैन (महाप्रबंधक), अशोक कुमार जैन उपप्रबंधक, उमेश जैन, मणिचंद जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा है।