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रमजान में पांच रातों की इबादत हजारों के बराबर
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रमजान में पांच रातों की इबादत हजारों के बराबर
सरूरपुर। दमगढ़ी स्थित मदीना मस्जिद में तरावीह में कुरआन पूरा होने पर वतन की खुशहाली की दुआ मांगी। हाफिज मोहम्मद शोएब ने तरावीह में कुरआन सुनाया। जिसको बृहस्पतिवार की रात में पूरा किया गया। इस मौके पर रोहटा मरकज के अमीर अब्दुल सत्तार ने कुरआन व रमजान की फजीलतों को बयां किया। उन्होंने कहा कि माहे रमजान के तीसरे अशरे की पांच रातों में इबादत करना हजारों रातों के बराबर है। इसकी 21, 23, 25, 27 व 29 वीं रातें में इबादत करना सबसे अहम है। जिनमें पाक दिल से अपने-अपने परवरदिगार की इबादत करनी चाहिए। रमजान के महीने में यह सबसे बरकत वाली रातें है। जिनमें कोई एक रात शब-ए-कद्र की रात होती है। इस रात में अल्लाह के फरिश्ते आसमान से उतरते है और इबादत करने वालों को खैर और बरकत अता करते है। वहीं, जामा मस्जिद में भी कुरान पूरा हुआ जिसमें बयान मौलाना इरशाद ने कहा कि अल्लाह ताआला ने यह आसमानी किताब लोगों को हिदायत के लिए उतारा गया है। इसको पढ़ने से सभी को फायदा होता है साथ ही खुदा अपनी रहमत उतार देते है। कुरआन की हिफाजत की जिम्मेदारी अल्लाह ताआला के हाथों में हैं। जो बच्चा कुरआन को पढ़कर हाफिज बनेगा व कयामत के दिन उस हाफिज के मां-बाप को चमकते हुए ताज से नवाजा जाएगा। बाद में दुनिया में अमन चैन के लिए सभी ने अल्लाह ताआला से दुआ मांगी। इस दौरान रफी मोहम्मद, हाजी मुबारिक अली, कारी गुलसनव्वर, तनसीर अहमद, कलवा, रोनक, आसमोहम्मद, इदरीश, नासिर, यूसुफ हाजी मुनसब आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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सरूरपुर। दमगढ़ी स्थित मदीना मस्जिद में तरावीह में कुरआन पूरा होने पर वतन की खुशहाली की दुआ मांगी। हाफिज मोहम्मद शोएब ने तरावीह में कुरआन सुनाया। जिसको बृहस्पतिवार की रात में पूरा किया गया। इस मौके पर रोहटा मरकज के अमीर अब्दुल सत्तार ने कुरआन व रमजान की फजीलतों को बयां किया। उन्होंने कहा कि माहे रमजान के तीसरे अशरे की पांच रातों में इबादत करना हजारों रातों के बराबर है। इसकी 21, 23, 25, 27 व 29 वीं रातें में इबादत करना सबसे अहम है। जिनमें पाक दिल से अपने-अपने परवरदिगार की इबादत करनी चाहिए। रमजान के महीने में यह सबसे बरकत वाली रातें है। जिनमें कोई एक रात शब-ए-कद्र की रात होती है। इस रात में अल्लाह के फरिश्ते आसमान से उतरते है और इबादत करने वालों को खैर और बरकत अता करते है। वहीं, जामा मस्जिद में भी कुरान पूरा हुआ जिसमें बयान मौलाना इरशाद ने कहा कि अल्लाह ताआला ने यह आसमानी किताब लोगों को हिदायत के लिए उतारा गया है। इसको पढ़ने से सभी को फायदा होता है साथ ही खुदा अपनी रहमत उतार देते है। कुरआन की हिफाजत की जिम्मेदारी अल्लाह ताआला के हाथों में हैं। जो बच्चा कुरआन को पढ़कर हाफिज बनेगा व कयामत के दिन उस हाफिज के मां-बाप को चमकते हुए ताज से नवाजा जाएगा। बाद में दुनिया में अमन चैन के लिए सभी ने अल्लाह ताआला से दुआ मांगी। इस दौरान रफी मोहम्मद, हाजी मुबारिक अली, कारी गुलसनव्वर, तनसीर अहमद, कलवा, रोनक, आसमोहम्मद, इदरीश, नासिर, यूसुफ हाजी मुनसब आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।