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विकास की राह पर छांव को तरसेंगे राहगीर
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विकास की राह पर छांव को तरसेंगे राहगीर
खरखौदा। मेरठ से हापुड़ के बीच बनाये जा रहे 61.19 किलोमीटर लंबे राजमार्ग के निर्माण से क्षेत्र का विकास होगा। जहां कई घंटों का सफर कुछ मिनटों में ही तय होगा। राजमार्ग के दोनों ओर उद्योग लगने से रोजगार मिलेगा। वहीं, इस विकास के लिए हजारों छांवदार वृक्षों को बलिदान देना पड़ा है। जहां इस मार्ग पर चलने वाले राहगीर एक पल की छांव को तरसेंगे।
मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। जहां मेरठ से बुलंदशहर के बीच में गांव फफूंडा, खरखौदा कस्बा, गांव कैली व गुलावठी में बाईपास बनाया गया है। जिसमें फफूंड़ा का 2.5 किलोमीटर, खरखौदा 3 किलोमीटर, कैली में 12.5 किलोमीटर व गुलावठी में 7.5 किलोमीटर पर ही बाईपास है। 61.16 किलोमीटर के इस बाईपास पर केवल 25.5 किलोमीटर पर ही बाईपास है। बाकी मार्ग पर पुरानी रोड का चौड़ीकरण किया जाना है। बाईपास तो कृषि की जमीन का अधिग्रहण कर बनाया गया है, लेकिन जहां पुरानी रोड़ का चौड़ीकरण होगा उसके निर्माण से पहले मेरठ से बुलंदशहर तक हजारों छांवदार वृक्ष काट दिये गये। जेवर हवाई अड्डे का निर्माण होने के बाद मेरठ से हवाई अड्डे तक जाने के लिए केवल डेढ़ घंटे का समय लगेगा। मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर तक इस रास्ते के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में बदलाव देखा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के बाद कई उद्योग धंधे इस हाईवे के किनारे जुडे़गे। इसके विकास के लिए काटे गए हजारों छांवदार वृक्ष कई वर्ष के बाद भी नहीं विकसित नहीं हो सकेंगे। जहां पहले मेरठ से बुलंदशहर तक जाने वाले रोड के दोनों ओर हरे व छांवदार वृक्ष थे। गर्मियों में लगने वाले लू के थपेड़ों से राहत मिलती थी। पेड़ कटने से मेरठ से बुलंदशहर तक रोड के दोनों ओर एक भी वृक्ष नहीं है। कंकरीट के मुकाबले तारकोल से बनी रोड कम गर्म होती थी, लेकिन कंकरीट की रोड पूरी तरह से तपती है।
प्रोजेक्ट में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर छांवदार पौधे लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं की गई है। केवल डिवाइडर पर ही छोटे पौधे लगाए जाएंगे। भगीरथ सारण, सहायक प्रबंधक एपको इंफ्राटेक।
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खरखौदा। मेरठ से हापुड़ के बीच बनाये जा रहे 61.19 किलोमीटर लंबे राजमार्ग के निर्माण से क्षेत्र का विकास होगा। जहां कई घंटों का सफर कुछ मिनटों में ही तय होगा। राजमार्ग के दोनों ओर उद्योग लगने से रोजगार मिलेगा। वहीं, इस विकास के लिए हजारों छांवदार वृक्षों को बलिदान देना पड़ा है। जहां इस मार्ग पर चलने वाले राहगीर एक पल की छांव को तरसेंगे।
मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है। जहां मेरठ से बुलंदशहर के बीच में गांव फफूंडा, खरखौदा कस्बा, गांव कैली व गुलावठी में बाईपास बनाया गया है। जिसमें फफूंड़ा का 2.5 किलोमीटर, खरखौदा 3 किलोमीटर, कैली में 12.5 किलोमीटर व गुलावठी में 7.5 किलोमीटर पर ही बाईपास है। 61.16 किलोमीटर के इस बाईपास पर केवल 25.5 किलोमीटर पर ही बाईपास है। बाकी मार्ग पर पुरानी रोड का चौड़ीकरण किया जाना है। बाईपास तो कृषि की जमीन का अधिग्रहण कर बनाया गया है, लेकिन जहां पुरानी रोड़ का चौड़ीकरण होगा उसके निर्माण से पहले मेरठ से बुलंदशहर तक हजारों छांवदार वृक्ष काट दिये गये। जेवर हवाई अड्डे का निर्माण होने के बाद मेरठ से हवाई अड्डे तक जाने के लिए केवल डेढ़ घंटे का समय लगेगा। मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर तक इस रास्ते के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में बदलाव देखा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के बाद कई उद्योग धंधे इस हाईवे के किनारे जुडे़गे। इसके विकास के लिए काटे गए हजारों छांवदार वृक्ष कई वर्ष के बाद भी नहीं विकसित नहीं हो सकेंगे। जहां पहले मेरठ से बुलंदशहर तक जाने वाले रोड के दोनों ओर हरे व छांवदार वृक्ष थे। गर्मियों में लगने वाले लू के थपेड़ों से राहत मिलती थी। पेड़ कटने से मेरठ से बुलंदशहर तक रोड के दोनों ओर एक भी वृक्ष नहीं है। कंकरीट के मुकाबले तारकोल से बनी रोड कम गर्म होती थी, लेकिन कंकरीट की रोड पूरी तरह से तपती है।
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प्रोजेक्ट में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर छांवदार पौधे लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं की गई है। केवल डिवाइडर पर ही छोटे पौधे लगाए जाएंगे। भगीरथ सारण, सहायक प्रबंधक एपको इंफ्राटेक।
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