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बदलाव व संशोधनों के बाद भी रिटर्न में मुश्किलें
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बदलाव और संशोधनों के बाद भी रिटर्न में मुश्किलें
30 जून तक दाखिल करना जीएसटी का वार्षिक रिटर्न
पोर्टल पर अपलोड करने और छह हिस्सों का ब्यौरा देने में विशेषज्ञ तक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से ही व्यापारियों के लिए मुश्किल भरा रहा है। लगातार बदलाव और संशोधनों के बाद भी जीएसटी के रिटर्न दाखिल करना कारोबारियों के लिए मुश्किल है। इस बार उनके सामने जीएसटी का वार्षिक रिटर्न मुश्किलें लेकर आया है। 30 जून तक यह दाखिल किया जाना है। लेकिन पोर्टल पर अपलोड करने और छह हिस्सों का ब्यौरा देने में विशेषज्ञ तक परेशान हैं।
वित्तीय वर्ष 2017-18 की अवधि का वार्षिक रिटर्न 30 जून तक जीएसटी पर अपलोड करना है। जीएसटी वार्षिक रिटर्न छह भागों में है, जिसमें कारोबार से संबंधित खरीद, बिक्री, खर्च का ब्यौरा, अर्जित आईटीसी का विभाजन, इनपुट, इनपुट सेवाएं और कैपिटल गुड्स में अलग-अलग जानकारी देनी है। इसके अलावा सबसे ज्यादा मुश्किल एग्रीगेट टर्नओवर में आ रही है। एग्रीगेट टर्न ओवर के साथ जीएसटी के पूर्व में दाखिल तीन बी और 1ए रिटर्न मैच नहीं हो पा रहे हैं। इन दिक्कतों के कारण व्यापारी परेशान हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंटों द्वारा व्यापारियों से कागजात और ब्योरे मांगे जा रहे हैं, जिन्हें जुटाना परेशानी भरा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
टैक्सेशियो एकेडमिक एंड वेलफेयर फोरम एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भारत जी. भूषण का कहना है कि जीएसटीआर3 बी और जीएसटीआर-1 के माध्यम से पहले से ही मासिक या त्रैमासिक आधार पर प्रस्तुत किए गए विवरणों को समेकित करना हैं और इसे जीएसटीआर-9 के निर्धारित प्रारूप में घोषित करना है। ऑडिट से बचने के लिए सभी तथ्य फार्म में एक साथ ही भरें। रूल 57 के अनुसार आईटीसी का लाभ पाने के लिए 180 दिन का पेमेंट शेड्यूल पूरा न होने पर रिवाइज रूप में फार्म भरना होगा।
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क्या है जीएसटीआर-9
जीएसटीआर-9 सामान्य करदाताओं के लिए वार्षिक रिटर्न फार्म है, जबकि जीएसटीआर 9ए कम्पोजिशन वाले करदाताओं के लिए है। जीएसटीआर-9 सी में आंकड़ों के मिलान का विवरण देना होगा। फार्म जीएसटीआर-9 मे आपको बाहरी आपूर्ति, आवक आपूर्ति, देय जीएसटी और पिछले वित्तीय वर्ष के लिए दावा किए गए आईटीसी के समेकित विवरणों की घोषणा करने की आवश्यकता है।
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30 जून तक दाखिल करना जीएसटी का वार्षिक रिटर्न
पोर्टल पर अपलोड करने और छह हिस्सों का ब्यौरा देने में विशेषज्ञ तक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से ही व्यापारियों के लिए मुश्किल भरा रहा है। लगातार बदलाव और संशोधनों के बाद भी जीएसटी के रिटर्न दाखिल करना कारोबारियों के लिए मुश्किल है। इस बार उनके सामने जीएसटी का वार्षिक रिटर्न मुश्किलें लेकर आया है। 30 जून तक यह दाखिल किया जाना है। लेकिन पोर्टल पर अपलोड करने और छह हिस्सों का ब्यौरा देने में विशेषज्ञ तक परेशान हैं।
वित्तीय वर्ष 2017-18 की अवधि का वार्षिक रिटर्न 30 जून तक जीएसटी पर अपलोड करना है। जीएसटी वार्षिक रिटर्न छह भागों में है, जिसमें कारोबार से संबंधित खरीद, बिक्री, खर्च का ब्यौरा, अर्जित आईटीसी का विभाजन, इनपुट, इनपुट सेवाएं और कैपिटल गुड्स में अलग-अलग जानकारी देनी है। इसके अलावा सबसे ज्यादा मुश्किल एग्रीगेट टर्नओवर में आ रही है। एग्रीगेट टर्न ओवर के साथ जीएसटी के पूर्व में दाखिल तीन बी और 1ए रिटर्न मैच नहीं हो पा रहे हैं। इन दिक्कतों के कारण व्यापारी परेशान हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंटों द्वारा व्यापारियों से कागजात और ब्योरे मांगे जा रहे हैं, जिन्हें जुटाना परेशानी भरा है।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
टैक्सेशियो एकेडमिक एंड वेलफेयर फोरम एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भारत जी. भूषण का कहना है कि जीएसटीआर3 बी और जीएसटीआर-1 के माध्यम से पहले से ही मासिक या त्रैमासिक आधार पर प्रस्तुत किए गए विवरणों को समेकित करना हैं और इसे जीएसटीआर-9 के निर्धारित प्रारूप में घोषित करना है। ऑडिट से बचने के लिए सभी तथ्य फार्म में एक साथ ही भरें। रूल 57 के अनुसार आईटीसी का लाभ पाने के लिए 180 दिन का पेमेंट शेड्यूल पूरा न होने पर रिवाइज रूप में फार्म भरना होगा।
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क्या है जीएसटीआर-9
जीएसटीआर-9 सामान्य करदाताओं के लिए वार्षिक रिटर्न फार्म है, जबकि जीएसटीआर 9ए कम्पोजिशन वाले करदाताओं के लिए है। जीएसटीआर-9 सी में आंकड़ों के मिलान का विवरण देना होगा। फार्म जीएसटीआर-9 मे आपको बाहरी आपूर्ति, आवक आपूर्ति, देय जीएसटी और पिछले वित्तीय वर्ष के लिए दावा किए गए आईटीसी के समेकित विवरणों की घोषणा करने की आवश्यकता है।