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बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है अल्लाह

Mon, 27 May 2019 01:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2019 01:27 AM IST
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बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है अल्लाह
बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है अल्लाह
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सरूरपुर। रमजान के तीसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों को दोजख से छुटकारा अता फरमाते हैं। इसी माह के बाद के दस दिनों में बड़ी बरकत वाली शब-ए-कद्र की रात होती है। एतिकाफ करने वाले इंसान का सोना, जागना, खामोश रहना, चलना, बैठना गर्ज यह कि उसके चौबीस घंटे इबादत में लिखे जाते हैं।

रमजान माह में शब-ए-कद्र और एतिकाफ के बारे की बड़ी फजीलत है। इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बक्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है। वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की खास रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं। एतिकाफ करने वाले सभी इबादत गुजार मस्जिद के बाहर नहीं जाते हैं। उनकी जरूरत की सभी चीजें उन्हें वहीं मुहैया कराई जाएंगी। मुफ्ती इसराईल ने बताया कि एतिकाफ का इतना मर्तबा है कि अगर किसी मस्जिद की आबादी से कोई एतिकाफ में नहीं बैठता है तो वह पूरी आबादी गुनहगार होती है। इसलिए हर मस्जिद में कोई न कोई एतिकाफ के लिए बैठता है ताकि सारी आबादी गुनहगार होने से बच सके। मुफ्ती मोहम्मद लुकमान ने बताया कि हदीस के अनुसार शब-ए-कद्र ऐसी बरकत वाली है जिसको यह मिल जाए और वह जो भी मांगता है उसकी दुआ कुबूल हो जाती है। कहा जाता है कि रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29 वीं रात को मुमकिन बताया है। इसी दौरान एतिकाफ एक ऐसी इबादत है जो सब कुछ छोड़कर अपने परवरदिगार की बारगाह में आकर बैठ जाए। एतिकाफ करने वाले इंसान के चौबीस घंटे इबादत में लिखे जाते हैं। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। रमजान माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खोल दी जाती हैं।
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