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100 साल पुरानी है गोलाकुआं की नूर मस्जिद
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- माह रमजान में मस्जिद में एक वक्त में पांच हजार लोग पढ़ते है नमाज
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महानगर क्षेत्र की पुरानी मस्जिदों में गोलाकुआं की नूर मस्जिद का भी 100 साल पुराना इतिहास है। इसकी सुंदरता और नक्काशी देखते ही बनती है। इसका निर्माण आजादी से पहले कम जनसंख्या के कारण छोटी मस्जिद के रूप में हुआ था।
गोलाकुआं स्थित नूर मस्जिद का जिस समय निर्माण हुआ था उस समय यहां आबादी बहुत कम थी। मस्जिद के आसपास और दूर तक खेती हुआ करती थी। लेकिन जमाने की बदलती रफ्तार ने इस क्षेत्र को घनी आबादी में परिवर्तित कर दिया। जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ती गई वैसे वैसे ही मस्जिद का आकार भी बढ़ा दिया गया। गोलाकुआं की दो मंजिला नूर मस्जिद में रमजान मुबारक महीने में एक वक्त में पांच हजार रोजेदार नमाज पढ़ते हैं। मस्जिद के खादिम क्षेत्र के मो. रिजवान अंसारी और मेराजुद्दीन अंसारी बताते है कि भयंकर गर्मी से इफ्तार के समय रोजेदारों को राहत देने के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था है। बिजली चले जाने पर जनरेटर का भी प्रबंध किया गया है। अब क्षेत्र की घनी आबादी के चलते नमाजियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने पर इस मस्जिद में कई दशकों से जुमे की नमाज और ईद की नमाज भी होती है। रमजान के मुबारक महीने में यहां मस्जिद के इमाम मौलाना असद जमाल तरावीह की नमाज में कुरान-ए-करीम सुना रहे हैं। क्षेत्र की घनी आबादी को देखते हुए नमाजियों की सुविधा के लिए मस्जिद के दो गेट हैं। मस्जिद के बाहर रोड पर मौलाना अब्दुल कलाम आजाद के नाम से विशाल द्वार है। इसका मार्ग गोलाकुआं से नौचंदी मेले को जोड़ता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। महानगर क्षेत्र की पुरानी मस्जिदों में गोलाकुआं की नूर मस्जिद का भी 100 साल पुराना इतिहास है। इसकी सुंदरता और नक्काशी देखते ही बनती है। इसका निर्माण आजादी से पहले कम जनसंख्या के कारण छोटी मस्जिद के रूप में हुआ था।
गोलाकुआं स्थित नूर मस्जिद का जिस समय निर्माण हुआ था उस समय यहां आबादी बहुत कम थी। मस्जिद के आसपास और दूर तक खेती हुआ करती थी। लेकिन जमाने की बदलती रफ्तार ने इस क्षेत्र को घनी आबादी में परिवर्तित कर दिया। जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ती गई वैसे वैसे ही मस्जिद का आकार भी बढ़ा दिया गया। गोलाकुआं की दो मंजिला नूर मस्जिद में रमजान मुबारक महीने में एक वक्त में पांच हजार रोजेदार नमाज पढ़ते हैं। मस्जिद के खादिम क्षेत्र के मो. रिजवान अंसारी और मेराजुद्दीन अंसारी बताते है कि भयंकर गर्मी से इफ्तार के समय रोजेदारों को राहत देने के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था है। बिजली चले जाने पर जनरेटर का भी प्रबंध किया गया है। अब क्षेत्र की घनी आबादी के चलते नमाजियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने पर इस मस्जिद में कई दशकों से जुमे की नमाज और ईद की नमाज भी होती है। रमजान के मुबारक महीने में यहां मस्जिद के इमाम मौलाना असद जमाल तरावीह की नमाज में कुरान-ए-करीम सुना रहे हैं। क्षेत्र की घनी आबादी को देखते हुए नमाजियों की सुविधा के लिए मस्जिद के दो गेट हैं। मस्जिद के बाहर रोड पर मौलाना अब्दुल कलाम आजाद के नाम से विशाल द्वार है। इसका मार्ग गोलाकुआं से नौचंदी मेले को जोड़ता है।
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