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मनुष्य सांस्कारित नहीं तो जानवर सामान : स्वामी विवेकानंद
Updated Mon, 08 Oct 2018 02:01 AM IST
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मवाना। लक्ष्मी देवी आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में चल रहे जनपदीय आर्य महासम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। सुबह में हवन-पूजन किया गया। जिसमें मुख्य यजमान होशियार सिंह, विकास रस्तोगी, प्रवीण दुबलिश, गजे सिंह रहे।
यज्ञ के बाद प्रसिद्ध भजनोपदेशक अजय आर्य, सुकृति आर्या ने ईश्वर भक्ति के भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने भक्ति के भजनों के माध्यम से बताया कि ब्रह्मांड में ईश्वर ही सर्वव्यापक है। प्रथम सत्र में सत्यार्थ प्रकाश एवं युवा चरित्र निर्माण सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें वैदिक विद्वान शिवकुमार शास्त्री, महावीर सिंह आदि ने सत्यार्थ प्रकाश की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता मंजू सिवाच विधायक मोदीनगर का स्वागत शाल भेंट करके आर्य समाज मवाना की प्रधान सुधा रस्तोगी, कुसुम ने किया। मंजू सिवाच ने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश जैसे अमर ग्रंथ की रचना महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा ही संभव हो सकी है। सत्यार्थ प्रकाश के चौदह समुल्लासों में बताया में बताया कि ईश्वर क्या है? विद्यार्थी की शिक्षा व्यवस्था कैसी हो, उत्तम संस्कारित संतान की उत्पत्ति कैसे संभव है? राजा का धर्म क्या है? विवाह संस्कार किस प्रकार हो? धर्म क्या है? धर्म के लक्षण क्या है? आदि जीवन के हर पहलू के विषय में बताया है। हमारी आधुनिक समस्याओं का संपूर्ण समाधान सत्यार्थ प्रकाश में मौजूद है। इसके बाद द्वितीय सत्र में संस्कारित शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया।
मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद सस्वती ने कहा कि जानवर से मनुष्य बनाने को ही संस्कारिता कहते हैं। यदि मनुष्य संस्कारित नहीं तो जानवर सामान है। आज बदलते परिवेश में बदलती शिक्षा से सावधान रहना है। क्योंकि आज के समय में वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा जरूरी है पर हम केवल हलार्ड मैकाले की पढ़ाई कर अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। मुख्य अतिथि के रूप में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने कहा कि मैं भी बचपन से आर्य समाज से जुड़ा हूं और आज भी विचार आर्य समाजी हैं। समापन के दौरान राजेश सेठी, जिले सिंह, पवन कुमार, अनिल गोला, सुनील गुप्ता, नगेन सिंह, ब्रजपाल त्यागी, सुरेश आर्य, राजमल, वीरपाल, सुशील, कुसुम रस्तोगी, सुधा रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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मुख्य बातें
लक्ष्मी देवी आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में जनपदीय आर्य महासम्मेलन रविवार को संपन्न
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यज्ञ के बाद प्रसिद्ध भजनोपदेशक अजय आर्य, सुकृति आर्या ने ईश्वर भक्ति के भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने भक्ति के भजनों के माध्यम से बताया कि ब्रह्मांड में ईश्वर ही सर्वव्यापक है। प्रथम सत्र में सत्यार्थ प्रकाश एवं युवा चरित्र निर्माण सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें वैदिक विद्वान शिवकुमार शास्त्री, महावीर सिंह आदि ने सत्यार्थ प्रकाश की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता मंजू सिवाच विधायक मोदीनगर का स्वागत शाल भेंट करके आर्य समाज मवाना की प्रधान सुधा रस्तोगी, कुसुम ने किया। मंजू सिवाच ने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश जैसे अमर ग्रंथ की रचना महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा ही संभव हो सकी है। सत्यार्थ प्रकाश के चौदह समुल्लासों में बताया में बताया कि ईश्वर क्या है? विद्यार्थी की शिक्षा व्यवस्था कैसी हो, उत्तम संस्कारित संतान की उत्पत्ति कैसे संभव है? राजा का धर्म क्या है? विवाह संस्कार किस प्रकार हो? धर्म क्या है? धर्म के लक्षण क्या है? आदि जीवन के हर पहलू के विषय में बताया है। हमारी आधुनिक समस्याओं का संपूर्ण समाधान सत्यार्थ प्रकाश में मौजूद है। इसके बाद द्वितीय सत्र में संस्कारित शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया।
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मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद सस्वती ने कहा कि जानवर से मनुष्य बनाने को ही संस्कारिता कहते हैं। यदि मनुष्य संस्कारित नहीं तो जानवर सामान है। आज बदलते परिवेश में बदलती शिक्षा से सावधान रहना है। क्योंकि आज के समय में वैदिक एवं आधुनिक शिक्षा जरूरी है पर हम केवल हलार्ड मैकाले की पढ़ाई कर अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। मुख्य अतिथि के रूप में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने कहा कि मैं भी बचपन से आर्य समाज से जुड़ा हूं और आज भी विचार आर्य समाजी हैं। समापन के दौरान राजेश सेठी, जिले सिंह, पवन कुमार, अनिल गोला, सुनील गुप्ता, नगेन सिंह, ब्रजपाल त्यागी, सुरेश आर्य, राजमल, वीरपाल, सुशील, कुसुम रस्तोगी, सुधा रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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मुख्य बातें
लक्ष्मी देवी आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में जनपदीय आर्य महासम्मेलन रविवार को संपन्न