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मजान के तीसरे असरे में होती है शब-ए-कद्र
Updated Sat, 09 Jun 2018 07:03 PM IST
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सरूरपुर। रमजान के तीसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों को दोजख से छुटकारा अता फरमाते हैं। इसी माह के बाद के दस दिन में बड़ी बरकत वाली शब-ए-कद्र की रात होती है।
इस माह में शब-ए-कद्र और एतकाफ के बारे में बड़ी फजीलत है। मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि शब-ए-कद्र के बारे में कुरान शरीफ में एक पूरी सूरत नाजिल हुई है। इस रात के बारे में फरमाया गया है कि यह रात हजारों महीनों की इबादत से बेहतर है। हदीस के अनुसार शब-ए-कद्र की रात बरकत वाली रात है। जिसको यह मिल जाए और वह जो भी मांगता है उसकी दुआ कुबूल हो जाती है। कहा जाता है कि रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29 वीं रात को मुमकिन बताया है। इसी दौरान एतकाफ एक ऐसी इबादत है जो सब कुछ छोड़कर अपने परवरदिगार की बारगाह में आकर बैठ जाए। एतकाफ़ करने वाले इंसान का सोना, जागना, खामोश रहना, चलना, बैठना गर्ज यह कि उसके चौबीस घंटे इबादत में लिखे जाते हैं। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है। भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। रमजान माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खोल दी जाती है।
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इस माह में शब-ए-कद्र और एतकाफ के बारे में बड़ी फजीलत है। मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि शब-ए-कद्र के बारे में कुरान शरीफ में एक पूरी सूरत नाजिल हुई है। इस रात के बारे में फरमाया गया है कि यह रात हजारों महीनों की इबादत से बेहतर है। हदीस के अनुसार शब-ए-कद्र की रात बरकत वाली रात है। जिसको यह मिल जाए और वह जो भी मांगता है उसकी दुआ कुबूल हो जाती है। कहा जाता है कि रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29 वीं रात को मुमकिन बताया है। इसी दौरान एतकाफ एक ऐसी इबादत है जो सब कुछ छोड़कर अपने परवरदिगार की बारगाह में आकर बैठ जाए। एतकाफ़ करने वाले इंसान का सोना, जागना, खामोश रहना, चलना, बैठना गर्ज यह कि उसके चौबीस घंटे इबादत में लिखे जाते हैं। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है। भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। रमजान माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और जन्नत की राह खोल दी जाती है।
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