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कर्मचारियों के साथ मिल प्रबंधन को भी लगाया गया चूना
Updated Wed, 23 May 2018 11:08 PM IST
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मवाना। शुगर मिल में कर्मचारियों के मिल प्रबंधन को भी चूना लगाए जाने की बात जांच में सामने आई है। पीएफ के साथ फर्जी तरीके से वाउचर बनाकर भुगतान लेने की बात भी सामने आ रही है। अभी इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं होने के कारण जांच की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
बताते चलें कि मवाना शुगर मिल का कुछ महीने पहले आडिट कराया गया था। आडिट मैसर्स एसके एमबी कंपनी द्वारा किया गया था। आडिट रिपोर्ट मिल को भेजने के बाद 1.64 करोड का गबन सामने आया था। गबन का मामला सामने आने पर मिल प्रशासन में हड़कंप है। आनन-फानन में गबन को लेकर हेड आफिस की ओर से चार सदस्य कमेटी का गठन किया गया। मिल के महाप्रबंधक प्रमोद बालियान ने बताया कि कमेटी के सदस्य आरके गंगवार, बीबी मेहता, एमवी कौशिक, विनित खुराना ने मामले की जांच की। जांच में कर्मचारियों के पीएफ के साथ फर्जी तरीके से वाउचर बनाकर भुगतान लेने, सामान नहीं आने के बावजूद फर्जी बिल देकर वाउचर के माध्यम से भुगतान लेने और अन्य खर्चों का हवाला देकर भुगतान लेने का मामला प्रकाश में आया। जांच कमेटी ने रिपोर्ट में नौ लोगों पर संदेह जताया है। कर्मचारियों के साथ-साथ मिल प्रबंधन को भी चूना लगाए जाने को लेकर उन्होंने एसएसपी को मुकदमा दर्ज कराए जाने को लेकर तहरीर दी। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को ही उन्हें डाक द्वारा तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जायेगी।
अपने ही डूबों रहे मिल की नैया
लगातार घाटे का रोना रो रही मवाना शुगर मिल को उसके अपने ही डूबो रहे हैं। घाटे का रोना रोकर मिल किसानों का भुगतान समय से नहीं कर पा रही है। हालांकि अपने ही उसे धीरे-धीरे खोखला कर रहे हैं। पूर्व में मवाना शुगर मिल में 80 लाख का घोटाला हो चुका है, परंतु इससे भी मिल अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। फर्जी वाउचरों के माध्यम से भुगतान होता रहा और मिल अधिकारियों ने जांच कराना भी उचित नहीं समझा। धीरे-धीरे मिल में गबन कर मिल को घाटे में पहुंचा दिया गया। वहीं, मिल प्रबंधन चीनी उत्पादन में पूरी लागत नहीं मिलने से मिल घाटे का रोना रोती रही है।
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मुख्य बातें
मवाना शुगर के आडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
मिल की चार सदस्यीय टीम ने नौ लोगों पर जताया संदेह
पीएफ एवं फर्जी वाउचर बनाकर भुगतान लेने की जानकारी मिली
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बताते चलें कि मवाना शुगर मिल का कुछ महीने पहले आडिट कराया गया था। आडिट मैसर्स एसके एमबी कंपनी द्वारा किया गया था। आडिट रिपोर्ट मिल को भेजने के बाद 1.64 करोड का गबन सामने आया था। गबन का मामला सामने आने पर मिल प्रशासन में हड़कंप है। आनन-फानन में गबन को लेकर हेड आफिस की ओर से चार सदस्य कमेटी का गठन किया गया। मिल के महाप्रबंधक प्रमोद बालियान ने बताया कि कमेटी के सदस्य आरके गंगवार, बीबी मेहता, एमवी कौशिक, विनित खुराना ने मामले की जांच की। जांच में कर्मचारियों के पीएफ के साथ फर्जी तरीके से वाउचर बनाकर भुगतान लेने, सामान नहीं आने के बावजूद फर्जी बिल देकर वाउचर के माध्यम से भुगतान लेने और अन्य खर्चों का हवाला देकर भुगतान लेने का मामला प्रकाश में आया। जांच कमेटी ने रिपोर्ट में नौ लोगों पर संदेह जताया है। कर्मचारियों के साथ-साथ मिल प्रबंधन को भी चूना लगाए जाने को लेकर उन्होंने एसएसपी को मुकदमा दर्ज कराए जाने को लेकर तहरीर दी। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को ही उन्हें डाक द्वारा तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जायेगी।
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अपने ही डूबों रहे मिल की नैया
लगातार घाटे का रोना रो रही मवाना शुगर मिल को उसके अपने ही डूबो रहे हैं। घाटे का रोना रोकर मिल किसानों का भुगतान समय से नहीं कर पा रही है। हालांकि अपने ही उसे धीरे-धीरे खोखला कर रहे हैं। पूर्व में मवाना शुगर मिल में 80 लाख का घोटाला हो चुका है, परंतु इससे भी मिल अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। फर्जी वाउचरों के माध्यम से भुगतान होता रहा और मिल अधिकारियों ने जांच कराना भी उचित नहीं समझा। धीरे-धीरे मिल में गबन कर मिल को घाटे में पहुंचा दिया गया। वहीं, मिल प्रबंधन चीनी उत्पादन में पूरी लागत नहीं मिलने से मिल घाटे का रोना रोती रही है।
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मुख्य बातें
मवाना शुगर के आडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
मिल की चार सदस्यीय टीम ने नौ लोगों पर जताया संदेह
पीएफ एवं फर्जी वाउचर बनाकर भुगतान लेने की जानकारी मिली