{"_id":"5cd34b39bdec22073b65221d","slug":"151557351225-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीपी नगर से शहर हो रहा जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीपी नगर से शहर हो रहा जाम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीपी नगर से शहर हो रहा जाम,
बाहर करने की फिर उठी मांग
- एमडीए वीसी ने रीयल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन के साथ बैठक कर शहर के विकास पर किया मंथन
- पदाधिकारी बोले- जिस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क धरातल पर हैं, वहां स्वीकृत किए जाएं मानचित्र
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर के विकास के लिए बुधवार को एमडीए सभागार में वीसी राजेश पांडेय ने रियल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन के साथ घंटाें मंथन किया। इस मौके पर उद्यमियों ने कई समस्याएं और सुझाव रखे। एमडीए अधिकारियों ने भी कई बिंदुओं पर सहमति जताई। बैठक में एक बार फिर टीपी नगर को शहर से बाहर करने की मांग उठी। उद्यमियों ने कहा कि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए टीपी नगर को शहर से बाहर विकसित किया जाए।
बैठक में एसोसिएशनके अध्यक्ष अशोक गर्ग व महामंत्री कमल ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि इस समय शहर में जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। इसका बड़ा कारण दिल्ली रोड और बागपत रोड पर टीपी नगर का बसा होना है। टीपी नगर आने वाले भारी वाहनों के कारण ही दिल्ली रोड पर जाम लगता है। ऐसे में शहर के बाहर नये ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना कराई जाए। विकासकर्ताओं के साथ दो माह में एक बैठक जरूर होनी चाहिए, ताकि सुनियोजित विकास में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सके।
मानचित्र हो स्वीकृत
डेवलेपर्स ने कहा कि जिस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क है वहां मानचित्र स्वीकृत किए जाएं। शमनीय मानचित्र को सरलता के साथ पास किया जाए। स्वीकृत तलपट मानचित्रों में आंतरिक विकास कार्य के सापेक्ष बंधक रखे गये भूखंडों को मुक्त किया जाए। पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि विगत 25 वर्षों में एमडीए से स्वीकृत कराकर आवासीय क्षेत्र निर्मित किये जा रहे हैं। 10 वर्षाें से पूर्व के आवासीय क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो गये हैं, जिसकी बावत पूर्व में आरसी जारी की गई थी, जो नियम विरुद्ध है। इससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला है। एमडीए ने तीन माह पूर्व एक पत्र एडीएम (एफ) और रजिस्ट्रार को लिखा था। कहा था कि करीब 264 आवासीय मानचित्र की कोई भी विक्रय विलेख पंजीकरण नहीं किया जाए। जबकि अवैध निर्माण की किसी भी आवासीय क्षेत्र के लिए इस संबंध में कोई पत्र जारी नहीं किया गया। इसके अलावा पानी निकासी, नाला, एसटीपी आदि से जुड़ी समस्याओं को भी रखा गया। वीसी राजेश कुमार पांडेय ने विकासकर्ताओं को आश्वासन दिया कि उनके सुझाव पर वह विचार करेंगे।
विज्ञापन
61 एमओयू हुए थे साइन पर आ रही दिक्कत
उद्यमियों ने कहा कि इनवेस्टर मीट में 61 उद्यमियों ने एमओयू साइन किए थे। इसी क्रम में अब उद्योग का मानचित्र स्वीकृत करने पर एमडीए बाह्य विकास शुल्क की गणना में गड़बड़ी कर रहा है। केवल निर्मित भाग पर ही यह शुल्क लगता है, जबकि यह पूरे भाग पर लगाया जा रहा है। साथ ही विकासकर्ता को विकास करने से पहले निगम और एडीएम प्रशासन से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। यह महीनों अटका रहता है। इसे समय से दिलाने की व्यवस्था हो। बैठक के दौरान एमडीए सचिव राजकुमार, अधीक्षण अभियन्ता पीपी सिंह, एक्सईएन अरुण शर्मा, एटीपी गोर्की कौशिक आदि अधिकारी मौजूद रहे। वहीं एसोसिएशन के पदाधिकारियों में अतुल गुप्ता, उत्कर्ष जैन, ज्ञानेन्द्र अग्रवाल, राहुल मित्थल आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
बाहर करने की फिर उठी मांग
- एमडीए वीसी ने रीयल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन के साथ बैठक कर शहर के विकास पर किया मंथन
- पदाधिकारी बोले- जिस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क धरातल पर हैं, वहां स्वीकृत किए जाएं मानचित्र
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर के विकास के लिए बुधवार को एमडीए सभागार में वीसी राजेश पांडेय ने रियल एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन के साथ घंटाें मंथन किया। इस मौके पर उद्यमियों ने कई समस्याएं और सुझाव रखे। एमडीए अधिकारियों ने भी कई बिंदुओं पर सहमति जताई। बैठक में एक बार फिर टीपी नगर को शहर से बाहर करने की मांग उठी। उद्यमियों ने कहा कि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए टीपी नगर को शहर से बाहर विकसित किया जाए।
बैठक में एसोसिएशनके अध्यक्ष अशोक गर्ग व महामंत्री कमल ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि इस समय शहर में जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। इसका बड़ा कारण दिल्ली रोड और बागपत रोड पर टीपी नगर का बसा होना है। टीपी नगर आने वाले भारी वाहनों के कारण ही दिल्ली रोड पर जाम लगता है। ऐसे में शहर के बाहर नये ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना कराई जाए। विकासकर्ताओं के साथ दो माह में एक बैठक जरूर होनी चाहिए, ताकि सुनियोजित विकास में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सके।
विज्ञापन
मानचित्र हो स्वीकृत
डेवलेपर्स ने कहा कि जिस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क है वहां मानचित्र स्वीकृत किए जाएं। शमनीय मानचित्र को सरलता के साथ पास किया जाए। स्वीकृत तलपट मानचित्रों में आंतरिक विकास कार्य के सापेक्ष बंधक रखे गये भूखंडों को मुक्त किया जाए। पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि विगत 25 वर्षों में एमडीए से स्वीकृत कराकर आवासीय क्षेत्र निर्मित किये जा रहे हैं। 10 वर्षाें से पूर्व के आवासीय क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो गये हैं, जिसकी बावत पूर्व में आरसी जारी की गई थी, जो नियम विरुद्ध है। इससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला है। एमडीए ने तीन माह पूर्व एक पत्र एडीएम (एफ) और रजिस्ट्रार को लिखा था। कहा था कि करीब 264 आवासीय मानचित्र की कोई भी विक्रय विलेख पंजीकरण नहीं किया जाए। जबकि अवैध निर्माण की किसी भी आवासीय क्षेत्र के लिए इस संबंध में कोई पत्र जारी नहीं किया गया। इसके अलावा पानी निकासी, नाला, एसटीपी आदि से जुड़ी समस्याओं को भी रखा गया। वीसी राजेश कुमार पांडेय ने विकासकर्ताओं को आश्वासन दिया कि उनके सुझाव पर वह विचार करेंगे।
विज्ञापन
61 एमओयू हुए थे साइन पर आ रही दिक्कत
उद्यमियों ने कहा कि इनवेस्टर मीट में 61 उद्यमियों ने एमओयू साइन किए थे। इसी क्रम में अब उद्योग का मानचित्र स्वीकृत करने पर एमडीए बाह्य विकास शुल्क की गणना में गड़बड़ी कर रहा है। केवल निर्मित भाग पर ही यह शुल्क लगता है, जबकि यह पूरे भाग पर लगाया जा रहा है। साथ ही विकासकर्ता को विकास करने से पहले निगम और एडीएम प्रशासन से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। यह महीनों अटका रहता है। इसे समय से दिलाने की व्यवस्था हो। बैठक के दौरान एमडीए सचिव राजकुमार, अधीक्षण अभियन्ता पीपी सिंह, एक्सईएन अरुण शर्मा, एटीपी गोर्की कौशिक आदि अधिकारी मौजूद रहे। वहीं एसोसिएशन के पदाधिकारियों में अतुल गुप्ता, उत्कर्ष जैन, ज्ञानेन्द्र अग्रवाल, राहुल मित्थल आदि शामिल रहे।