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22 किलोमीटर के ट्रैक दोहरीकरण में बीते दो साल
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दीपक भारद्वाज
मेरठ। मेरठ से टपरी तक ट्रैक दोहरीकरण पूरा करने में रेलवे के पसीने छूट रहे हैं। किसानों के अड़ंगे के कारण खतौली से मुजफ्फरनगर तक 22 किमी के कार्य में रेलवे को दो साल बीत गए, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इस कारण एक महीने में दो बार दर्जनभर से ज्यादा ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। इससे रेलवे को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा।
ट्रैक दोहरीकरण के पहले चरण में मेरठ से दौराला तक 18 किमी का कार्य तेज गति से किया गया, लेकिन इसके बाद कार्य रफ्तार नहीं पड़ सका। खतौली से मुजफ्फरनगर रूट पर मंसूरपुर फाटक संख्या-48 पर विवाद बना हुआ है। इस फाटक पर किसानों के लिए अंडरपास और फ्लाईओवर का निर्माण करा दिया गया, इसके बाद भी किसान फाटक बंद होने का विरोध कर रहे हैं। जिससे किसानों ने दोहरीकरण में अंड़गा लगा दिया है। रेलवे अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। वहीं किसानों के अड़ंगे के अलावा भी इस रूट पर कई अड़चनें आईं। पहले साल-2017 में मुजफ्फरनगर में हुए उत्कल रेल हादसे ने दोहरीकरण कार्य पर दो महीने का ब्रेक लगा दिया था। इसके बाद मुजफ्फरनगर स्टेशन की डिजायनिंग करने में कई महीने लग गए। मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान इसे दक्षिण क्षेत्र के स्टेशन की तर्ज पर डिजायन कराने चाहते थे। रेलवे इंजीनियरों की टीम ने निरीक्षण कर नक्शा तैयार किया। वहीं, रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने खतौली से मुजफ्फरनगर के बीच तीव्र मोड़ होने से हरी झंडी देने से इंकार कर दिया।
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मेरठ से टपरी - 105 किलोमीटर
कार्य पूरा होने का लक्ष्य - अगस्त 2017
मेरठ से खतौली - 33 किलोमीटर
स्टेटस - कार्य पूरा
खतौली से मुजफ्फरनगर - 22 किलोमीटर
स्टेटस - कार्य प्रगति पर
मुजफ्फरनगर से देवबंद - 22 किलोमीटर
स्टेटस - अभी काम शुरू नहीं हुआ
देवबंद से टपरी - 28 किलोमीटर
स्टेटस - अभी कार्य शुरू नहीं हुआ
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मेरठ। मेरठ से टपरी तक ट्रैक दोहरीकरण पूरा करने में रेलवे के पसीने छूट रहे हैं। किसानों के अड़ंगे के कारण खतौली से मुजफ्फरनगर तक 22 किमी के कार्य में रेलवे को दो साल बीत गए, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इस कारण एक महीने में दो बार दर्जनभर से ज्यादा ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। इससे रेलवे को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा।
ट्रैक दोहरीकरण के पहले चरण में मेरठ से दौराला तक 18 किमी का कार्य तेज गति से किया गया, लेकिन इसके बाद कार्य रफ्तार नहीं पड़ सका। खतौली से मुजफ्फरनगर रूट पर मंसूरपुर फाटक संख्या-48 पर विवाद बना हुआ है। इस फाटक पर किसानों के लिए अंडरपास और फ्लाईओवर का निर्माण करा दिया गया, इसके बाद भी किसान फाटक बंद होने का विरोध कर रहे हैं। जिससे किसानों ने दोहरीकरण में अंड़गा लगा दिया है। रेलवे अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। वहीं किसानों के अड़ंगे के अलावा भी इस रूट पर कई अड़चनें आईं। पहले साल-2017 में मुजफ्फरनगर में हुए उत्कल रेल हादसे ने दोहरीकरण कार्य पर दो महीने का ब्रेक लगा दिया था। इसके बाद मुजफ्फरनगर स्टेशन की डिजायनिंग करने में कई महीने लग गए। मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान इसे दक्षिण क्षेत्र के स्टेशन की तर्ज पर डिजायन कराने चाहते थे। रेलवे इंजीनियरों की टीम ने निरीक्षण कर नक्शा तैयार किया। वहीं, रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने खतौली से मुजफ्फरनगर के बीच तीव्र मोड़ होने से हरी झंडी देने से इंकार कर दिया।
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मेरठ से टपरी - 105 किलोमीटर
कार्य पूरा होने का लक्ष्य - अगस्त 2017
मेरठ से खतौली - 33 किलोमीटर
स्टेटस - कार्य पूरा
खतौली से मुजफ्फरनगर - 22 किलोमीटर
स्टेटस - कार्य प्रगति पर
मुजफ्फरनगर से देवबंद - 22 किलोमीटर
स्टेटस - अभी काम शुरू नहीं हुआ
देवबंद से टपरी - 28 किलोमीटर
स्टेटस - अभी कार्य शुरू नहीं हुआ