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हमारे बढ़ते कदमों को रोक देता है संशय
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अमर उजाला ब्यूरो
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत मंदिर पर चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज 43वें दिन रविवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री जी ने मांगलिक मंत्रों से रविवार को क्रियाओं का शुभारंभ किया। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुशील जैन को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सुशील जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य अमित जैन, राजेश जैन, राजकुमार जैन को प्राप्त हुआ। दीपक का प्रज्ज्वलन निर्मल जैन, मेघा जैन ने किया। सुनीता दीदी ने संसार के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। परम पूज्य गुरुवर भावभूषण महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि अपने मन में कभी संशय नहीं रखना चाहिए। चाहे वह धर्म के प्रति हो या फिर आपसी संबंधों में। बिना विश्वास के जीवन यापन संभव नहीं है। क्योंकि संशय हमारे बढ़ते हुए कदमों को रोक देता है। धर्म कार्य में समय संशय रहित व्यक्ति ही पुण्य प्राप्ति कर सकता है। 48 दीपकों द्वारा मंगल आराधना की मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम, अशोक, अतुल, उमेश, मणीचंद, कमल जैन आदि का सहयोग। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, मोतीलाल, धनप्रकाश, अरुण जैन, अभय कुमार, अनिल जैन, राजेंद्र का सहयोग रहा है।
मुख्य बातें
कैलाश पर्वत मंदिर पर चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 43वां दिन
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत मंदिर पर चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज 43वें दिन रविवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री जी ने मांगलिक मंत्रों से रविवार को क्रियाओं का शुभारंभ किया। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुशील जैन को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सुशील जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य अमित जैन, राजेश जैन, राजकुमार जैन को प्राप्त हुआ। दीपक का प्रज्ज्वलन निर्मल जैन, मेघा जैन ने किया। सुनीता दीदी ने संसार के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना के साथ शांतिधारा का उच्चारण किया। तदोपरांत देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 121 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। परम पूज्य गुरुवर भावभूषण महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि अपने मन में कभी संशय नहीं रखना चाहिए। चाहे वह धर्म के प्रति हो या फिर आपसी संबंधों में। बिना विश्वास के जीवन यापन संभव नहीं है। क्योंकि संशय हमारे बढ़ते हुए कदमों को रोक देता है। धर्म कार्य में समय संशय रहित व्यक्ति ही पुण्य प्राप्ति कर सकता है। 48 दीपकों द्वारा मंगल आराधना की मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम, अशोक, अतुल, उमेश, मणीचंद, कमल जैन आदि का सहयोग। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, मोतीलाल, धनप्रकाश, अरुण जैन, अभय कुमार, अनिल जैन, राजेंद्र का सहयोग रहा है।
मुख्य बातें
कैलाश पर्वत मंदिर पर चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 43वां दिन