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सीबीसीआईडी करेगी अलकनंदा कंपनी की जांच
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- अलकनंदा ने नगर निगम में 2215 सफाई कर्मचारियों की की थी आपूर्ति
- कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआई का लाभ न देने पर शासन में पहुंचा था मामला
- कंपनी के मालिक पर दर्ज करायी गयी थी एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में 2215 सफाई कर्मचारियों से आउट सोर्सिंग पर सफाई कराने वाली अलकनंदा कंपनी का मामला ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) में पहुंच गया है। माना जा रहा है कि कंपनी के संचालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी।
नगर निगम ने नवंबर 2015 में आउट सोर्सिंग पर शहर की सफाई का ठेका कंकरखेड़ा की अलकनंदा कंपनी को दिया था। कंपनी ने अक्तूबर 2017 तक काम किया। 2215 आउटसोर्स सफाई कर्मचारी लगाए थे। यानी इन सफाई कर्मचारियों का वेतन नगर निगम से प्रतिमाह जारी होता रहा। नियमानुसार कंपनी को सभी 2215 सफाई कर्मचारियों को वेतन के साथ उनको पीएफ और ईएसआई का लाभ भी देना था। लेकिन आरोप है कि कंपनी ने नियमित रूप से सफाई कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की धनराशि जमा नहीं की। जिसकी धनराशि लगभग 2.45 करोड़ बैठती है। इसी के आरोप में नगर निगम ने अलकनंदा कंपनी के मालिक पर एफआईआर दर्ज करायी थी। शासन और कमिश्नर स्तर पर जांच भी की गयी थी।
नगर निगम पहुंची जांच टीम
ईओडब्ल्यू की जांच टीम बुधवार को इंस्पेक्टर नीतू राणा के नेतृत्व में नगर निगम पहुंची। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के न मिलने पर इंस्पेक्टर राणा ने मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा से इस संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अलकनंदा कंपनी की पूर्व में जांच से जुड़े मस्टररोल सहित कई दस्तावेज मांगे। कंपनी के सभी आउट सोर्स सफाई कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांगा। साथ ही पूरे प्रकरण पर लगभग एक घंटा वार्ता की।
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मस्टररोल भी हो गए थे गायब
अलकनंदा कंपनी के खिलाफ जांच के दौरान सफाई कर्मचारियों के मस्टररोल तक गायब कर दिए गए थे। जिसके आरोप अलकनंदा के मालिक ने पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर भी लगाए थे। यही नहीं इस प्रकरण में कई लोग शामिल बताए गए थे। हालांकि जांच के दौरान निगम प्रशासन ने मस्टररोल की कुछ कॉपी मिलने की बात कही थी। लेकिन निगम की जांच में अलकनंदा कंपनी को दोषी मान लिया गया था।
ईओडब्ल्यू ने मांगा है रिकॉर्ड
ईओडब्ल्यू से पहुंचीं महिला इंस्पेक्टर ने निगम पहुंचकर रिकार्ड मांगा है। अलकनंदा कंपनी पर सफाई कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई का 2.45 करोड़ नियमित न जमा करने का आरोप है। अब ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। -संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी नगर निगम
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- कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआई का लाभ न देने पर शासन में पहुंचा था मामला
- कंपनी के मालिक पर दर्ज करायी गयी थी एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में 2215 सफाई कर्मचारियों से आउट सोर्सिंग पर सफाई कराने वाली अलकनंदा कंपनी का मामला ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) में पहुंच गया है। माना जा रहा है कि कंपनी के संचालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी।
नगर निगम ने नवंबर 2015 में आउट सोर्सिंग पर शहर की सफाई का ठेका कंकरखेड़ा की अलकनंदा कंपनी को दिया था। कंपनी ने अक्तूबर 2017 तक काम किया। 2215 आउटसोर्स सफाई कर्मचारी लगाए थे। यानी इन सफाई कर्मचारियों का वेतन नगर निगम से प्रतिमाह जारी होता रहा। नियमानुसार कंपनी को सभी 2215 सफाई कर्मचारियों को वेतन के साथ उनको पीएफ और ईएसआई का लाभ भी देना था। लेकिन आरोप है कि कंपनी ने नियमित रूप से सफाई कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की धनराशि जमा नहीं की। जिसकी धनराशि लगभग 2.45 करोड़ बैठती है। इसी के आरोप में नगर निगम ने अलकनंदा कंपनी के मालिक पर एफआईआर दर्ज करायी थी। शासन और कमिश्नर स्तर पर जांच भी की गयी थी।
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नगर निगम पहुंची जांच टीम
ईओडब्ल्यू की जांच टीम बुधवार को इंस्पेक्टर नीतू राणा के नेतृत्व में नगर निगम पहुंची। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के न मिलने पर इंस्पेक्टर राणा ने मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा से इस संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अलकनंदा कंपनी की पूर्व में जांच से जुड़े मस्टररोल सहित कई दस्तावेज मांगे। कंपनी के सभी आउट सोर्स सफाई कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांगा। साथ ही पूरे प्रकरण पर लगभग एक घंटा वार्ता की।
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मस्टररोल भी हो गए थे गायब
अलकनंदा कंपनी के खिलाफ जांच के दौरान सफाई कर्मचारियों के मस्टररोल तक गायब कर दिए गए थे। जिसके आरोप अलकनंदा के मालिक ने पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर भी लगाए थे। यही नहीं इस प्रकरण में कई लोग शामिल बताए गए थे। हालांकि जांच के दौरान निगम प्रशासन ने मस्टररोल की कुछ कॉपी मिलने की बात कही थी। लेकिन निगम की जांच में अलकनंदा कंपनी को दोषी मान लिया गया था।
ईओडब्ल्यू ने मांगा है रिकॉर्ड
ईओडब्ल्यू से पहुंचीं महिला इंस्पेक्टर ने निगम पहुंचकर रिकार्ड मांगा है। अलकनंदा कंपनी पर सफाई कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई का 2.45 करोड़ नियमित न जमा करने का आरोप है। अब ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। -संतोष शर्मा, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी नगर निगम