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17 सालों से जारी नोटिस का खेल, कार्रवाई में पूरी तरह फेल
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:56 AM IST
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वाहिद अली
मेरठ।
आवास एवं विकास विभाग का नोटिस का खेल 17 सालों से जारी है। 2001 में विभाग की ओर से बड़े अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण करने का नोटिस चस्पा किया गया था। इसके बाद आज तक विभाग की ओर से नोटिस का खेल चलता रहा और शहर की पाश कॉलोनियों में अवैध निर्माण होते गए।
उप्र आवास एवं विकास परिषद् शहर में अवैध निर्माणों को लेकर भले ही सक्रियता दिखा रहा हो, लेकिन सच्चाई यही है कि विभाग 2001 से लगातार अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस तो दे रहा है, लेकिन कार्रवाई जीरो है। विभाग ने 17 साल पूर्व एक बड़े अस्पताल पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया था। इसे दो सप्ताह का समय दिया गया। इसके बाद अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। वर्ष 2001 के बाद शहर के प्रमुख पॉश कालोनियों आवासीय भूखंडों पर 3 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण खड़े हो गये। जुलाई 2017 तक विभाग ने 2 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस भी जारी किए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बड़े अवैध निर्माण माधवपुरम, शास्त्रीनगर, सेंट्रल मार्केट, मंगलपांडेनगर, जागृति विहार में हुए। जिनमें मुख्य रूप से 52 बैंक, 31 स्कूल, 30 से ज्यादा नर्सिंग होम, 19 से ज्यादा बैंक्वेट हॉल शामिल हैं। जिन्हें विभाग की ओर से सीलिंग और धवस्तीकरण का कई बार नोटिस भी चस्पा किया गया।
विभागीय अधिकारी ही अवैध निर्माण के असली जिम्मेदार
आवास-विकास द्वारा आवंटित आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण करने में विभागीय अधिकारी ही असली जिम्मेदार हैं। मामले में लोगों ने बताया कि अधिकारी सेटिंग करने में मस्त रहे।
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आवास-विकास के नोटिस चस्पा फाड़ रहे लोग
आवास एवं विकास अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी करने के खेल को लोग भली-भांति समझ गए। उन्हें पता है विभागीय नोटिस मात्र खेल है कार्रवाई शून्य है। यही कारण है आवास-विकास ने 3 सप्ताह पहले 20 बड़े अवैध निर्माणों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण के नोटिस चस्पा किये। इसमें भवन मालिकों को एक सप्ताह का समय दिया गया, लेकिन नोटिस चस्पा होते ही लोगों ने तुरंत फाड़ डाले।
लोेगों को दी राहत की डोज
अवैध निर्माण को लेकर आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार लगातार सख्त नजर आ रहे हैं। अधिकारियों ने पिछले एक माह में अवैध निर्माण करने वालों की सूची बनाकर नोटिस देने की कार्रवाई की। अब आयुक्त ने तीन माह के लिए अवैध भवनों पर कड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया। जिसमें व्यापारियों को भवनों को शमन करने का मौका भी विभागों की ओर से दिया गया। जो निर्माण अशमनीय हैं उन्हें तो ध्वस्त करने की तैयारी है।
खास बातें
- आवास-विकास द्वारा 2001 में ध्वस्तीकरण का नोटिस हुआ था जारी
- इन सालों में एक भी अवैध निर्माण पर नही हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
- अभी तक आवास-विकास दो हजार लोगों से ज्यादा अवैध निर्माणों को दे चुका है नोटिस
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मेरठ।
आवास एवं विकास विभाग का नोटिस का खेल 17 सालों से जारी है। 2001 में विभाग की ओर से बड़े अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण करने का नोटिस चस्पा किया गया था। इसके बाद आज तक विभाग की ओर से नोटिस का खेल चलता रहा और शहर की पाश कॉलोनियों में अवैध निर्माण होते गए।
उप्र आवास एवं विकास परिषद् शहर में अवैध निर्माणों को लेकर भले ही सक्रियता दिखा रहा हो, लेकिन सच्चाई यही है कि विभाग 2001 से लगातार अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस तो दे रहा है, लेकिन कार्रवाई जीरो है। विभाग ने 17 साल पूर्व एक बड़े अस्पताल पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया था। इसे दो सप्ताह का समय दिया गया। इसके बाद अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। वर्ष 2001 के बाद शहर के प्रमुख पॉश कालोनियों आवासीय भूखंडों पर 3 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण खड़े हो गये। जुलाई 2017 तक विभाग ने 2 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस भी जारी किए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बड़े अवैध निर्माण माधवपुरम, शास्त्रीनगर, सेंट्रल मार्केट, मंगलपांडेनगर, जागृति विहार में हुए। जिनमें मुख्य रूप से 52 बैंक, 31 स्कूल, 30 से ज्यादा नर्सिंग होम, 19 से ज्यादा बैंक्वेट हॉल शामिल हैं। जिन्हें विभाग की ओर से सीलिंग और धवस्तीकरण का कई बार नोटिस भी चस्पा किया गया।
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विभागीय अधिकारी ही अवैध निर्माण के असली जिम्मेदार
आवास-विकास द्वारा आवंटित आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण करने में विभागीय अधिकारी ही असली जिम्मेदार हैं। मामले में लोगों ने बताया कि अधिकारी सेटिंग करने में मस्त रहे।
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आवास-विकास के नोटिस चस्पा फाड़ रहे लोग
आवास एवं विकास अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी करने के खेल को लोग भली-भांति समझ गए। उन्हें पता है विभागीय नोटिस मात्र खेल है कार्रवाई शून्य है। यही कारण है आवास-विकास ने 3 सप्ताह पहले 20 बड़े अवैध निर्माणों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण के नोटिस चस्पा किये। इसमें भवन मालिकों को एक सप्ताह का समय दिया गया, लेकिन नोटिस चस्पा होते ही लोगों ने तुरंत फाड़ डाले।
लोेगों को दी राहत की डोज
अवैध निर्माण को लेकर आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार लगातार सख्त नजर आ रहे हैं। अधिकारियों ने पिछले एक माह में अवैध निर्माण करने वालों की सूची बनाकर नोटिस देने की कार्रवाई की। अब आयुक्त ने तीन माह के लिए अवैध भवनों पर कड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया। जिसमें व्यापारियों को भवनों को शमन करने का मौका भी विभागों की ओर से दिया गया। जो निर्माण अशमनीय हैं उन्हें तो ध्वस्त करने की तैयारी है।
खास बातें
- आवास-विकास द्वारा 2001 में ध्वस्तीकरण का नोटिस हुआ था जारी
- इन सालों में एक भी अवैध निर्माण पर नही हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
- अभी तक आवास-विकास दो हजार लोगों से ज्यादा अवैध निर्माणों को दे चुका है नोटिस