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काव्य गोष्ठी का आयोजन व पत्रिका का विमोचन।
Updated Sun, 10 Dec 2017 06:45 PM IST
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साहित्यिक, सामाजिक मासिक पत्रिका मौन मुखर के दूसरे अंक का विमोचन किया गया। इस मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि सत्यपाल सत्यम ने कहा कि आजादी को कायम रखने की खातिर बलिदान चाहिए।
लक्ष्मी देवी आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चंदन सिंह चौहान ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। गन्ना समिति चेयरमैन विनोद भाटी ने फीता काटकर उद्घाटन किया। इस मौके पर उपस्थित अतिथियों ने मासिक पत्रिका मौन मुखर के दूसरे अंक का विमोचन किया। इस मौके पर नरेंद्र रस्तोगी, डा. शक्ति साहनी, बीके शर्मा, श्रीराम मलिक ने विचार रखे।
इसके उपरांत आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि संजीव भ्रमर की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद कवि सुमनेश सुमन ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि जो न कभी घबराते हैं, सर्दी, गर्मी और बरसातों से, कष्ट उठाकर भी समझौते करें नहीं काली रातों से। गजलकार ओंकार गुलशन ने गजल पढ़ते हुए कहा कि गम को अंदाज दे रहा हूं मैं, प्यार का राज दे रहा हूं मैं। मेरी गजलें तो बस बहाना है, तुमको आवाज दे रहा हूं मैं। वीर रस के कवि सत्यपाल सत्यम ने काव्य पाठ में कहा कि धरती से पानी निकलेगा अर्जुन जैसा बाण चाहिए। मरघट के मुर्दे उठ जाएं ऐसा स्वर में प्राण चाहिए। आजादी को कायम रखने की खातिर बलिदान चाहिए। अभी सुभाष मरे नहीं हैं जनता में ईमान चाहिए। संजीव भ्रमर ने निगाहों की तराजू में बताओ तोल क्या लोगे। विरह के आंसुओं से भी अधिक अनमोल क्या लोगे। तुम्हारे वास्ते मैं जिंदगी कुर्बान कर दूंगा। दोबारा लौट आने का बताओ मोल क्या लोगे। यशपाल फक्कड़ ने हास्य कविता पेश करते हुए कहा कि एक बार कविता लिखते-लिखते पत्नी को चाय के लिए आवाज लगाई, बेलन लिए वह किचन से बाहर आई और बोली, आपको कविता लिखने से फुर्सत मिले तो बताऊं, गैस खत्म हो गई है चाय क्या मोमबत्ती पर बनाऊ। कवि हुक्का बिजनौरी, शांतिस्वरूप अनाड़ी ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अरुण टांक और हुक्का बिजनौरी ने किया। आयोजक संजीव भ्रमर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संजय भटनागर. आदेश अग्रवाल, श्रेय कौशिक, सीएस चौधरी, अनुराग गर्ग, रामकिशन यादव, नीलम साहनी, शालिनी भटनागर, नगेंद्र सिंह आर्य, नरेंद्र गोयल, राकेश जैन आदि उपस्थित थे।
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मुख्य बातें
साहित्यिक एवं सामाजिक मासिक पत्रिका का विमोचन कार्यक्रम
काव्य गोष्ठी का आयोजन सरस्वती वंदना से शुरू किया गया
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साहित्यिक, सामाजिक मासिक पत्रिका मौन मुखर के दूसरे अंक का विमोचन किया गया। इस मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि सत्यपाल सत्यम ने कहा कि आजादी को कायम रखने की खातिर बलिदान चाहिए।
लक्ष्मी देवी आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चंदन सिंह चौहान ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। गन्ना समिति चेयरमैन विनोद भाटी ने फीता काटकर उद्घाटन किया। इस मौके पर उपस्थित अतिथियों ने मासिक पत्रिका मौन मुखर के दूसरे अंक का विमोचन किया। इस मौके पर नरेंद्र रस्तोगी, डा. शक्ति साहनी, बीके शर्मा, श्रीराम मलिक ने विचार रखे।
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इसके उपरांत आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि संजीव भ्रमर की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद कवि सुमनेश सुमन ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि जो न कभी घबराते हैं, सर्दी, गर्मी और बरसातों से, कष्ट उठाकर भी समझौते करें नहीं काली रातों से। गजलकार ओंकार गुलशन ने गजल पढ़ते हुए कहा कि गम को अंदाज दे रहा हूं मैं, प्यार का राज दे रहा हूं मैं। मेरी गजलें तो बस बहाना है, तुमको आवाज दे रहा हूं मैं। वीर रस के कवि सत्यपाल सत्यम ने काव्य पाठ में कहा कि धरती से पानी निकलेगा अर्जुन जैसा बाण चाहिए। मरघट के मुर्दे उठ जाएं ऐसा स्वर में प्राण चाहिए। आजादी को कायम रखने की खातिर बलिदान चाहिए। अभी सुभाष मरे नहीं हैं जनता में ईमान चाहिए। संजीव भ्रमर ने निगाहों की तराजू में बताओ तोल क्या लोगे। विरह के आंसुओं से भी अधिक अनमोल क्या लोगे। तुम्हारे वास्ते मैं जिंदगी कुर्बान कर दूंगा। दोबारा लौट आने का बताओ मोल क्या लोगे। यशपाल फक्कड़ ने हास्य कविता पेश करते हुए कहा कि एक बार कविता लिखते-लिखते पत्नी को चाय के लिए आवाज लगाई, बेलन लिए वह किचन से बाहर आई और बोली, आपको कविता लिखने से फुर्सत मिले तो बताऊं, गैस खत्म हो गई है चाय क्या मोमबत्ती पर बनाऊ। कवि हुक्का बिजनौरी, शांतिस्वरूप अनाड़ी ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अरुण टांक और हुक्का बिजनौरी ने किया। आयोजक संजीव भ्रमर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संजय भटनागर. आदेश अग्रवाल, श्रेय कौशिक, सीएस चौधरी, अनुराग गर्ग, रामकिशन यादव, नीलम साहनी, शालिनी भटनागर, नगेंद्र सिंह आर्य, नरेंद्र गोयल, राकेश जैन आदि उपस्थित थे।
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साहित्यिक एवं सामाजिक मासिक पत्रिका का विमोचन कार्यक्रम
काव्य गोष्ठी का आयोजन सरस्वती वंदना से शुरू किया गया