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रेलवे के अंडरपासों में अभी हो रहा है जलभराव
Updated Mon, 04 Sep 2017 02:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
खरखौदा।
दो दिनों तक हुई बारिश से रेलवे के अंडरपास की पोल खोल दी है। अंडर पास में जलभराव से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आवागमन भी ठप हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंडर पास निर्माण में कई खामियां है। इसके चलते कभी भी बड़ा रेल हादसा हो सकता है।
मेरठ से हापुड़ के बीच अंडरपास निर्माण के लिए 2015 में करोड़ों रुपये का टेंडर हुआ था। पहले तो लाइन के पास बसे गांव के लोगों ने अंडरपास का विरोध किया। लेकिन जब मामला सरकारी आया तो ग्रामीण पीछे हट गये। पहले तो ठेकेदारों ने अंडरपास पर केवल पिलर डालकर छोड़ दिया था। लेकिन बरसात में जलभराव होने पर आवागमन ठप हो गया। इस पर गांव उलधन, बहरानपुर, सेत कुआ, पांची व चांदसरा के ग्रामीणों ने हंगामा किया। जिले के अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद निर्माण कर रहे ठेकेदार पर काम पूरा करने का दबाव बना।
बताया जा रहा है कि अंडरपास निर्माण कंपनी ने निर्माण में घपला किया था। अंडरपास का पिलर डालने से पहले नीचे आर सीसी का बेस तैयार होना था लेकिन ठेकेदारों ने केवल मिट्टी खोदकर पिलर खड़ा कर दिया। जहां-जहां रेत का जंगल था, वहां पर भारी बरसात व अंडरपास में हुए जलभराव के चलते मिट्टी का कटाव हुआ था। इसी कारण दादरी स्थित अंडरपास का पिलर धंस गया था। मेरठ से हापुड़ तक सभी अंडरपासों के पिलर मिट्टी पर ही टिके हैं। जिस कारण बरसात में मिट्टी के कटान के कारण कभी भी हादसा हो सकता है।
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अभी भी है जलभराव
भारी बरसात होते ही खरखौदा कस्बा, उलधन फाटक, सेतकुआ व गांव पांची में बने अंडरपासों में जलभराव है। हालांकि रेलवे की ओर से ट्रैक्टर पंप से पानी निकाला जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी अंडरपासों में जलभराव है। इसके कारण लाइन के उस पार रह रहे ग्रामीणों का आवागमन ठप है। ऐसे में लोग खतरा उठाकर रेलवे लाइन पार कर रहे हैं।
खास बातें
ग्रामीणों ने अंडर पास निर्माण में खामियों का लगाया आरोप
जलभराव होने से बेमकसद साबित हो रहे, आवगमन ठप
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खरखौदा।
दो दिनों तक हुई बारिश से रेलवे के अंडरपास की पोल खोल दी है। अंडर पास में जलभराव से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आवागमन भी ठप हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंडर पास निर्माण में कई खामियां है। इसके चलते कभी भी बड़ा रेल हादसा हो सकता है।
मेरठ से हापुड़ के बीच अंडरपास निर्माण के लिए 2015 में करोड़ों रुपये का टेंडर हुआ था। पहले तो लाइन के पास बसे गांव के लोगों ने अंडरपास का विरोध किया। लेकिन जब मामला सरकारी आया तो ग्रामीण पीछे हट गये। पहले तो ठेकेदारों ने अंडरपास पर केवल पिलर डालकर छोड़ दिया था। लेकिन बरसात में जलभराव होने पर आवागमन ठप हो गया। इस पर गांव उलधन, बहरानपुर, सेत कुआ, पांची व चांदसरा के ग्रामीणों ने हंगामा किया। जिले के अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद निर्माण कर रहे ठेकेदार पर काम पूरा करने का दबाव बना।
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बताया जा रहा है कि अंडरपास निर्माण कंपनी ने निर्माण में घपला किया था। अंडरपास का पिलर डालने से पहले नीचे आर सीसी का बेस तैयार होना था लेकिन ठेकेदारों ने केवल मिट्टी खोदकर पिलर खड़ा कर दिया। जहां-जहां रेत का जंगल था, वहां पर भारी बरसात व अंडरपास में हुए जलभराव के चलते मिट्टी का कटाव हुआ था। इसी कारण दादरी स्थित अंडरपास का पिलर धंस गया था। मेरठ से हापुड़ तक सभी अंडरपासों के पिलर मिट्टी पर ही टिके हैं। जिस कारण बरसात में मिट्टी के कटान के कारण कभी भी हादसा हो सकता है।
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अभी भी है जलभराव
भारी बरसात होते ही खरखौदा कस्बा, उलधन फाटक, सेतकुआ व गांव पांची में बने अंडरपासों में जलभराव है। हालांकि रेलवे की ओर से ट्रैक्टर पंप से पानी निकाला जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी अंडरपासों में जलभराव है। इसके कारण लाइन के उस पार रह रहे ग्रामीणों का आवागमन ठप है। ऐसे में लोग खतरा उठाकर रेलवे लाइन पार कर रहे हैं।
खास बातें
ग्रामीणों ने अंडर पास निर्माण में खामियों का लगाया आरोप
जलभराव होने से बेमकसद साबित हो रहे, आवगमन ठप