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खास रिपोर्ट: ईरान में फंसे भारतीय बासमती के 1500 करोड़, अमेरिका के इस फैसले से पैदा हुई समस्या

Tue, 20 Aug 2019 02:10 AM IST
Gaurav sharma मोहित कुमार अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Tue, 20 Aug 2019 02:10 AM IST
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fifteen crore of Indian basmati stranded in Iran, problem created by this decision of America
बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला
ईरान में निर्यात होने वाले भारतीय बासमती के 1500 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इसका कारण अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को बताया जा रहा है। करीब दो माह से रकम फंसने से अब बासमती का निर्यात भी रोक दिया गया है। इस संबंध में जहां ईरान में स्थित भारतीय दूतावास को पत्र लिखा गया है तो ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने सरकार से दखल देने की गुहार लगाई है।
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देश का एकमात्र सेंटर बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम में है। करीब दस वर्षों से भारतीय बासमती का निर्यात ईरान और यूरोपियन देशों में बढ़ा है। ईरान से भारतीय बासमती के बदले तेल लेने का समझौता भी हुआ था। अभी तक सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान पर आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगाने के बाद से समस्या पैदा होनी शुरू हो गई।
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अब ईरान में निर्यात हुए भारतीय बासमती का करीब 1500 करोड़ रुपये फंस गया है। कोई मूल्य न मिलने के कारण ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने बासमती के निर्यात पर भी रोक लगा दी है। ईरान में भारतीय मुद्रा फंसने के बाद निर्यातकों में हड़कंप मचा है। निर्यातक परेशान हैं कि फंसी रकम कब निकलेगी।
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10-15 दिन में मिल जाती थी रकम
बीईडीएफ प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार भारतीय बासमती ईरान निर्यात होने के 10-15 दिन बाद रकम आ जाती थी। लेकिन ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगने से अभी तक राहत के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। जिस कारण से भारतीय मुद्रा ईरान में ही फंसी हुई है।

भारत कम ले रहा तेल
अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद भारत भी ईरान से कम तेल ले रहा है। डॉ. शर्मा ने बताया कि पहले तेल काफी मात्रा में लिया जाता था और बासमती के बदले तेल लिया जाता था। लेकिन जबसे अमेरिका ने ईरान की तरफ नजरें टेढ़ी की हैं, तब से स्थिति बदल गई है।

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भारतीय बासमती पहली पसंद
ईरान में सबसे ज्यादा भारतीय बासमती पसंद की जाती है। पिछले दो साल से ईरान आयात में नंबर वन पर है। इसके बाद सऊदी अरब है। कभी सऊदी तो कभी ईरान आगे-पीछे हो जाते थे। लेकिन दो साल से अब ईरान ही सबसे आगे है।

आंकड़ों में स्थिति
वर्ष          निर्यात        आमदनी
2015-16   695310.31  3723.93
2016-17   716582.18   3778.42
2017-18   877421.55    5829.78
2018-19   1483698.23  10790.02
(नोट: निर्यात मीट्रिक टन और आमदनी करोड़ में है)

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देश और निर्यात प्रतिशत
देश            प्रतिशत
ईरान             21.7
सऊदी अरब     20  
यूएई            10.5  
ईराक            10.4
यूरोप             9    

बासमती खरीदने वाले टॉप-10 देश
ईरान, सऊदी अरब, ईराक, यूनाईटेड अरब अमीरात, यमन रिपब्लिक, कुवैत, यूएसए, यूके, ओमान, कतर  

नया सौदा करने से घबरा रहे
पिछले दो माह से ईरान में पेमेंट फंसने से निर्यातक बहुत परेशान है। नया सौदा करने से भी घबरा रहे हैं। ईरान में भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग की है। जब तक पेमेंट नहीं आएगा, नया माल भेजना मुश्किल होगा। -विजय सेतिया, अध्यक्ष ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन

ईरान सरकार से हैं संपर्क में
ईरान से हमारे मधुर संबंध हैं। भारतीय निर्यातकों का 1500 करोड़ रुपये फंसने पर भारत सरकार ईरान सरकार के संपर्क में है। उम्मीद है कि जल्द ही कोई न कोई समाधान निकल जाएगा। डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक बीईडीएफ

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