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ग्रेनेड विस्फोट में कश्मीर में शहीद हुआ सहारनपुर का लाल
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:49 AM IST
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असिस्टेंट कमांडेंट जबर सिंह, फाइल
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर का लाल जम्मू कश्मीर में शहीद
नकुड़ (सहारनपुर)। नकुड़ के गांव भैरमऊ निवासी और जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर में तैनात बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट जबर सिंह ग्रेनेड विस्फोट में शहीद हो गए। सोमवार देर रात यह दुखद सूचना जैसे ही परिजनों को मिली तो परिवार और गांव में शोक व्याप्त हो गया।
किसान सिताब सिंह के तीन पुत्रों में सबसे छोटे जबर सिंह (34) सांबा सेक्टर में सोमवार की शाम करीब सवा सात बजे पाकिस्तान की ओर से हुए ग्रेनेड हमले में वीरगति को प्राप्त हुए। इनके बड़े भाई जगदीश सिंह ने बताया कि 13 दिसंबर को भतीजी की शादी तय है और इसमें आने के लिए 18 नवंबर को जबर सिंह की छुट्टी भी स्वीकृत हो गई थी, लेकिन बड़े अधिकारी के छुट्टी पर होने के कारण वह नहीं आ सके थे। अब पूरा परिवार जबर सिंह के घर आने का इंतजार कर रहा था, लेकिन सोमवार देर शाम करीब नौ बजे फोन पर उनके शहीद होने की सूचना आई तो पूरे परिवार पर गम का पहाड़ टूट गया। 2002 में जबर सिंह सिपाही के पद पर सीआईएसएफ में भर्ती हुए थे। 2006-07 में उन्होंने इस नौकरी को छोड़कर बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन कर लिया और 2009 में असिस्टेंट कमांडेंट बन गए थे। करीब तीन माह पूर्व ही जबर सिंह को वीरता पुरस्कार मिला था। वहीं मंगलवार को बीएसएफ के पलौड़ा स्थित जम्मू फ्रंटियर मुख्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
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नकुड़ (सहारनपुर)। नकुड़ के गांव भैरमऊ निवासी और जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर में तैनात बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट जबर सिंह ग्रेनेड विस्फोट में शहीद हो गए। सोमवार देर रात यह दुखद सूचना जैसे ही परिजनों को मिली तो परिवार और गांव में शोक व्याप्त हो गया।
किसान सिताब सिंह के तीन पुत्रों में सबसे छोटे जबर सिंह (34) सांबा सेक्टर में सोमवार की शाम करीब सवा सात बजे पाकिस्तान की ओर से हुए ग्रेनेड हमले में वीरगति को प्राप्त हुए। इनके बड़े भाई जगदीश सिंह ने बताया कि 13 दिसंबर को भतीजी की शादी तय है और इसमें आने के लिए 18 नवंबर को जबर सिंह की छुट्टी भी स्वीकृत हो गई थी, लेकिन बड़े अधिकारी के छुट्टी पर होने के कारण वह नहीं आ सके थे। अब पूरा परिवार जबर सिंह के घर आने का इंतजार कर रहा था, लेकिन सोमवार देर शाम करीब नौ बजे फोन पर उनके शहीद होने की सूचना आई तो पूरे परिवार पर गम का पहाड़ टूट गया। 2002 में जबर सिंह सिपाही के पद पर सीआईएसएफ में भर्ती हुए थे। 2006-07 में उन्होंने इस नौकरी को छोड़कर बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन कर लिया और 2009 में असिस्टेंट कमांडेंट बन गए थे। करीब तीन माह पूर्व ही जबर सिंह को वीरता पुरस्कार मिला था। वहीं मंगलवार को बीएसएफ के पलौड़ा स्थित जम्मू फ्रंटियर मुख्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
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