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प्राथमिक विद्यालयों में वा र्षिक परीक्षा का लाइव

Meerut Bureau Updated Thu, 15 Mar 2018 02:32 AM IST
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परिषदीय स्कूलों में परीक्षा के नाम पर औपचारिकता
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अव्यवस्थाओं के बीच केसरगंज में जमीन पर बैठकर बच्चों ने दी परीक्षा
पूर्वा महावीर में परीक्षा देने नहीं आये बच्चे, इंतजार करती रहीं शिक्षिका
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
जिले के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बुधवार को अव्यवस्थाओं के बीच वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गईं। इस दौरान अमर उजाला ने नगर क्षेत्र के कुछ स्कूलों में पड़ताल की तो वहां के हालात बदतर दिखाई दिए। पूर्वा महावीर प्राथमिक विद्यालय में एक भी बच्चा परीक्षा देने नहीं पहुंचा। जबकि केसरगंज स्थित जिला पंचायत की भूमि पर संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे जमीन पर परीक्षा देते मिले। कुछ बच्चे तो किताब पर उत्तर पुस्तिका रखकर परीक्षा दे रहे थे। परीक्षा को लेकर शिक्षकों का रुझान भी सिर्फ औपचारिकता भरा नजर आया।
पहला केस -
घंटाघर चौराहे स्थित हनुमान मंदिर में प्राथमिक विद्यालय पूर्वा महावीर किराये के भवन में चल रहा है। वार्षिक परीक्षा होने के बावजूद विद्यालय में एक भी बच्चा परीक्षा देने नहीं पहुुंचा। स्कूल में शिक्षामित्र मकीन सैय्यदा ही मिलीं। पूछने पर बताया कि स्कूल में 15 बच्चों का ही रजिस्ट्रेशन है। प्रधानाध्यापिका फिरोजा बेगम छुट्टी पर चल रही हैं। इस कारण बच्चों को पता ही नहीं है कि परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। भवन की हालत खराब होने के चलते अक्सर बच्चे यहां नहीं आते हैं। दोनों शिक्षक स्कूल में टाइम पास कर लौट जाती हैं।
दूसरा केस-
उच्च प्राथमिक विद्यालय केसरगंज में दो कक्षाओं में बच्चे परीक्षा दे रहे थे। दोनों कक्षाओं में छठीं, सातवीं और आठवीं के बच्चे बैठे थे। प्रधानाध्यापक सरफराज कमरों में इधर-उधर घूम रहे थे। विद्यालय में बेंच होने के बाद भी बच्चे जमीन पर बैठकर कला का पेपर दे रहे थे। कक्षाओं में अंधेरा भी था। प्रधानाध्यापक ने बताया कि बिजली के तार टूट गये हैं। इस कारण कक्षा में अंधेरा हो गया है। स्कूल में उनके अलावा एक चपरासी की तैनाती है। इस कारण वह स्कूली कार्य के लिए चपरासी की सहायता ले लेते हैं।
तीसरा केस-
प्राथमिक कन्या पाठशाला पूर्वा महावीर में कक्षा पांच की छात्राएं जमीन पर बैठकर परीक्षा देती मिलीं। जबकि बुधवार को दूसरे चरण में कक्षा पांच की छात्राएं कला की परीक्षा दे रही थीं। बच्चे जमीन पर कापी रखकर कार्य करते मिले। प्रधानाध्यापक नसरीन जमाल ने बताया विभाग की ओर से बेंच नहीं भेजी गई है। इसके चलते बच्चों को जमीन पर बैठकर ही परीक्षा देनी पड़ रही है।
चौथा केस -
राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल केसरगंज में भी कक्षा 6, 7, 8 की छात्राएं एक ही कमरे में जमीन पर बैठकर परीक्षा देती मिलीं। हालांकि शिक्षिकाओं ने कक्षा में छोटी बेंच डाल रखी हैं। इससे छात्राओं को परीक्षा देने में समस्या नहीं आ रही थी। प्रधानाध्यापक पूनम शर्मा ने बताया स्वयं प्रयास से उन्होंने कक्षाओं में बेंच डलवाई हैं। विभाग की ओर से फर्नीचर पर ध्यान नहीं दिया गया है।

प्रधानाध्यापकों को दिए हैं निर्देश
नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के प्रयास किये जा रहे हैं। सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिये गये हैं कि स्कूलों में परीक्षा के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। कहीं किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है तो उन पर कार्रवाई की जायेगी। स्कूल में बच्चे परीक्षा नहीं देने आते हैं इसकी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों की होगी।
सतेंद्र कुमार ढाका, बेसिक शिक्षा अधिकारी

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