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कूड़े से खाद बनाने की दिशा में होगा काम
Updated Mon, 18 Sep 2017 02:47 AM IST
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लोहियानगर और प्रताप विहार में होगा बायोकल्चर पर काम
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
निर्मल हिंडन अभियान के एक महत्वपूर्ण चरण कूड़ा प्रबंधन में प्रशासन अहम कदम उठाने जा रहा है। मेरठ के लोहियानगर में एवं गाजियाबाद के प्रताप विहार में कूड़े से खाद बनाने की योजना को मूर्त रूप देने की तैयारी है। आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने दोनों ही जिलों के अधिकारियों से बात कर कहा है कि यहां गड्ढे खोदकर बायो कल्चर विधि से खाद बनाई जाए।
हिंडन को निर्मल करने का अभियान परवान चढ़ रहा है। इसके लिए जहां हिंडन कोष की स्थापना हो चुकी है तो वहीं योजनाबद्घ तरीके से अलग-अलग चरण तय किए गए हैं। तालाबों का जीर्णोद्घार होना है तो साथ ही हिंडन में विभिन्न माध्यमों से जा रहे प्रदूषण को रोकना है। इस बाबत जिन जिन जिलों से होकर हिंडन गुजर रही है उनके अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों का दौर चल रहा है।
13 बिंदुओं पर काम करने का प्लान
इस अभियान को लेकर कुल 13 बिंदुओं की मुख्य गतिविधियों को सर्वसम्मति से फाइनल किया गया है। तय हुआ कि औद्योगिक अपशिष्ठ प्रबंधन, सीवरेज ट्रीटमेंट, नगर निकायों के सॉलिड वेस्ट पर कार्य करने, अतिक्रमण हटाने, पौधरोपण करने, हिंडन व उसकी सहायक नदियों के समीप के ग्रामों को 31 दिसंबर ओडीएफ घोषित कराने, रजवाहों को पुनर्जीवित करने, किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग करने के लिये प्रेरित करने, नहरों से भी हिंडन में पानी डालने, प्रदूषण के स्तर को कम करने, कम्प्रीहेन्सिव हीथ जागरूकता कार्यक्रम, मास मोबिलाइजेशन, रिसोर्स जनरेशन आदि पर मुख्य रूप से काम होगा।
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कूड़ा प्रबंधन का नया प्लान
इस पूरी योजना में कूडे़ के निस्तारण पर टारगेट किया गया है। मेरठ में कूड़ा एक अहम समस्या है। गांवड़ी गांव में कूड़े के निस्तारण केलिए डंपिंग जोन है, लेकिन वहां माडर्न प्लांट चालू न होने के कारण इसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यहां सोलापुर की कंपनी से इस बाबत करार हुआ था, पर बैंक से ऋण स्वीकृत न होने के कारण यह कंपनी यहां काम ही शुरू नहीं कर पाई। दरअसल यहां 900 टन कूड़े के निस्तारण पर काम होना है। अब अंबिकापुर मॉडल की तर्ज पर काम करने की योजना है। अधिकारियों का कहना है छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मॉडल को भारत सरकार से अवार्ड प्राप्त हुआ है व छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण दिया गया साथ ही इस पर बनी डाक्यूमेंट्री को डिस्कवरी व हिस्ट्री चैनल पर काफी पसंद किया गया है। उन्होंने बताया कि अंबिकापुर में पूर्व में नगर पालिका को कूड़ा उठाने व अन्य मदों में 12 से 15 लाख का व्यय करना पड़ता था। लेकिन कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया अपनाने के बाद वहां अब वहां 20 लाख रुपये प्रतिमाह की आमदनी होती है। आयुक्त ने मेरठ और गाजियाबाद के अधिकारियों से बात की है। उन्होंने बताया कि हापुड़ रोड पर लोहियानगर में जहां कूड़ा डाला जा रहा है वहां कूड़े से ही खाद बनाने की आसान प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बीस से तीस गड्ढे खोदे जाएंगे। चरणवार गड्डों में कूड़ा डालकर बायोकल्चर होगा। जब तक पहले पांच गड्ढों में खाद बनेगा तब तक अगले गड्ढों में कूड़ा डाला जाएगा। फिर पहले पांच गड्ढा्ें का खाद निकालकर आगे यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
प्रताप विहार में भी होगा प्रयोग
कमिश्नर के मुताबिक गाजियाबाद के नगर निगम अधिकारियों से बात की है। कहा है कि प्रताप विहार में कम से कम 28 गड्ढे खोदे जाएं। चरणवार ही काम हो। यह जरूरी नहीं कि सारे गड्ढे एक साथ खोदे जाएं। उनकी गहराई आदि का मानक तय कर लिया जाए। वहां भी इस तरह कल्चर से खाद बनाया जाए। इससे एक साथ दो काम होंगे। एक जहां कूड़े का निस्तारण होगा तो वहीं गड्ढों से निकाले गए खाद को बेचा जा सकेगा। इससे आय भी हो सकेगी। इस बाबत कुछ ऐसे किसानों को जोड़ा जाए तो पहले ही इस पद्घति पर काम कर रहे हैं।
कूड़ा प्रबंधन करना ही होगा। इसके लिए बायो कल्चर से कूडे़ से खाद बनाने की योजना पर बात चल रही है। मेरठ में हापुड़ रोड और गाजियाबाद के प्रताप विहार में यह प्रयोग सफल हो सकता है। जल्द ही इस मूर्त रूप देने की कवायद शुरू होगी। डॉ. प्रभात कुमार, आयुक्त मेरठ
खास बात
मेरठ और गाजियाबाद में खोदे जाएंगे खाद के लिए गड्ढे
आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने मेरठ और गाजियाबाद के अधिकारियों को दिए निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
निर्मल हिंडन अभियान के एक महत्वपूर्ण चरण कूड़ा प्रबंधन में प्रशासन अहम कदम उठाने जा रहा है। मेरठ के लोहियानगर में एवं गाजियाबाद के प्रताप विहार में कूड़े से खाद बनाने की योजना को मूर्त रूप देने की तैयारी है। आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने दोनों ही जिलों के अधिकारियों से बात कर कहा है कि यहां गड्ढे खोदकर बायो कल्चर विधि से खाद बनाई जाए।
हिंडन को निर्मल करने का अभियान परवान चढ़ रहा है। इसके लिए जहां हिंडन कोष की स्थापना हो चुकी है तो वहीं योजनाबद्घ तरीके से अलग-अलग चरण तय किए गए हैं। तालाबों का जीर्णोद्घार होना है तो साथ ही हिंडन में विभिन्न माध्यमों से जा रहे प्रदूषण को रोकना है। इस बाबत जिन जिन जिलों से होकर हिंडन गुजर रही है उनके अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों का दौर चल रहा है।
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13 बिंदुओं पर काम करने का प्लान
इस अभियान को लेकर कुल 13 बिंदुओं की मुख्य गतिविधियों को सर्वसम्मति से फाइनल किया गया है। तय हुआ कि औद्योगिक अपशिष्ठ प्रबंधन, सीवरेज ट्रीटमेंट, नगर निकायों के सॉलिड वेस्ट पर कार्य करने, अतिक्रमण हटाने, पौधरोपण करने, हिंडन व उसकी सहायक नदियों के समीप के ग्रामों को 31 दिसंबर ओडीएफ घोषित कराने, रजवाहों को पुनर्जीवित करने, किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग करने के लिये प्रेरित करने, नहरों से भी हिंडन में पानी डालने, प्रदूषण के स्तर को कम करने, कम्प्रीहेन्सिव हीथ जागरूकता कार्यक्रम, मास मोबिलाइजेशन, रिसोर्स जनरेशन आदि पर मुख्य रूप से काम होगा।
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कूड़ा प्रबंधन का नया प्लान
इस पूरी योजना में कूडे़ के निस्तारण पर टारगेट किया गया है। मेरठ में कूड़ा एक अहम समस्या है। गांवड़ी गांव में कूड़े के निस्तारण केलिए डंपिंग जोन है, लेकिन वहां माडर्न प्लांट चालू न होने के कारण इसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यहां सोलापुर की कंपनी से इस बाबत करार हुआ था, पर बैंक से ऋण स्वीकृत न होने के कारण यह कंपनी यहां काम ही शुरू नहीं कर पाई। दरअसल यहां 900 टन कूड़े के निस्तारण पर काम होना है। अब अंबिकापुर मॉडल की तर्ज पर काम करने की योजना है। अधिकारियों का कहना है छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मॉडल को भारत सरकार से अवार्ड प्राप्त हुआ है व छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण दिया गया साथ ही इस पर बनी डाक्यूमेंट्री को डिस्कवरी व हिस्ट्री चैनल पर काफी पसंद किया गया है। उन्होंने बताया कि अंबिकापुर में पूर्व में नगर पालिका को कूड़ा उठाने व अन्य मदों में 12 से 15 लाख का व्यय करना पड़ता था। लेकिन कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया अपनाने के बाद वहां अब वहां 20 लाख रुपये प्रतिमाह की आमदनी होती है। आयुक्त ने मेरठ और गाजियाबाद के अधिकारियों से बात की है। उन्होंने बताया कि हापुड़ रोड पर लोहियानगर में जहां कूड़ा डाला जा रहा है वहां कूड़े से ही खाद बनाने की आसान प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बीस से तीस गड्ढे खोदे जाएंगे। चरणवार गड्डों में कूड़ा डालकर बायोकल्चर होगा। जब तक पहले पांच गड्ढों में खाद बनेगा तब तक अगले गड्ढों में कूड़ा डाला जाएगा। फिर पहले पांच गड्ढा्ें का खाद निकालकर आगे यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।
प्रताप विहार में भी होगा प्रयोग
कमिश्नर के मुताबिक गाजियाबाद के नगर निगम अधिकारियों से बात की है। कहा है कि प्रताप विहार में कम से कम 28 गड्ढे खोदे जाएं। चरणवार ही काम हो। यह जरूरी नहीं कि सारे गड्ढे एक साथ खोदे जाएं। उनकी गहराई आदि का मानक तय कर लिया जाए। वहां भी इस तरह कल्चर से खाद बनाया जाए। इससे एक साथ दो काम होंगे। एक जहां कूड़े का निस्तारण होगा तो वहीं गड्ढों से निकाले गए खाद को बेचा जा सकेगा। इससे आय भी हो सकेगी। इस बाबत कुछ ऐसे किसानों को जोड़ा जाए तो पहले ही इस पद्घति पर काम कर रहे हैं।
कूड़ा प्रबंधन करना ही होगा। इसके लिए बायो कल्चर से कूडे़ से खाद बनाने की योजना पर बात चल रही है। मेरठ में हापुड़ रोड और गाजियाबाद के प्रताप विहार में यह प्रयोग सफल हो सकता है। जल्द ही इस मूर्त रूप देने की कवायद शुरू होगी। डॉ. प्रभात कुमार, आयुक्त मेरठ
खास बात
मेरठ और गाजियाबाद में खोदे जाएंगे खाद के लिए गड्ढे
आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने मेरठ और गाजियाबाद के अधिकारियों को दिए निर्देश