{"_id":"5cd0a35dbdec22076c4ec54c","slug":"131557177181-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिग्री-मार्कशीट प्रकरण में सस्पेंड कर्मचारियों से चार घंटे चले बयान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिग्री-मार्कशीट प्रकरण में सस्पेंड कर्मचारियों से चार घंटे चले बयान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार घंटे चले सस्पेंड कर्मचारियों के बयान
डिग्री-मार्कशीट प्रकरण
- गोपनीय विभाग के कई कर्मचारी भी फंस सकते हैं प्रकरण में
- अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री और मार्कशीट बनाने में घूस लेने के मामले में समिति केसदस्यों ने चार घंटे तक सोमवार को सस्पेंड कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच में गोपनीय कार्यालय के कई कर्मचारी भी फंस सकते हैं। पूरे प्रकरण में जांच समिति जल्द ही कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
यह था मामला
अमर उजाला ने 26 मार्च के संस्करण में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री-मार्कशीट और अन्य प्रमाण पत्रों को बनाने में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। स्टिंग ऑपरेशन से स्पष्ट हुआ था कि यूनिवर्सिटी में कर्मचारी दलालों के माध्यम से छह सौ रुपये से 15 सौ रुपये तक में रोजाना मार्कशीट और डिग्री दे रहे थे। जो छात्र घूस नहीं दे रहे थे वो महीने चक्कर काटने को मजबूर थे। प्रकरण का खुलासा होने पर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सख्त कार्रवाई करते हुए सारे रिकॉर्ड तलब करा लिए थे। जांच पड़ताल में सामने आया था कि रोजाना 30 से 40 डिग्री और प्रोविजनल प्रमाण पत्र घूस लेकर बनाए जा रहे थे। 25 मार्च को गाजियाबाद से आए बीडीएस के छात्र-छात्राओं को भी 13 प्रोविजनल प्रमाण पत्र नौ हजार रुपये घूस लेकर दिए गए थे।
वेटिंग के बाद भी रोजाना कैसे बना रहे थे प्रमाण-पत्र
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर कुलपति ने तत्काल रूप से छात्र समस्या निवारण केंद्र पर तैनात दो कर्मचारियों जॉनी शर्मा और कपिल कुमार को सस्पेंड कर दिया था। एक संविदा कर्मचारी को निवारण केंद्र से हटाते हुए जांच बैठा दी थी। पैसे लेकर डिग्री बनवाने में सहयोेग करने और रोजाना आने वाले फार्मों पर डिग्री देने की लापरवाही करने वाले अफसरों-कर्मचारियों पर जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी। तीन सदस्य उच्च स्तरीय कमेटी में सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज की डायरेक्टर प्रो. जयमाला, चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह और प्रो. एसके दत्ता को रखा गया था। समिति की तरफ से इस मामले में सस्पेंड कर्मचारियों को सोमवार को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया थ्रा। सोमवार को सदस्यों की बैठक चार घंटे तक चली। इसमें दोनों कर्मचारियों से तमाम सवाल पूछे गए। यह सवाल भी उठे कि जब प्रमाण पत्रों की वेटिंग एक-एक महीने तक की थी तो ऐसे में रोजाना 25 से 30 आवेदन करने वालों केप्रमाण पत्र कैसे बना दिए गए। इससे साफ है गोपनीय विभाग के कर्मचारी भी सब कुछ जानते थे। कर्मचारियों के बयान नोट करने के बाद अब समिति अपनी रिपोर्ट कुलपति प्रो. एनके तनेजा को सौंपेगी। रिपोर्ट केबाद गोपनीय विभाग के कई और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डिग्री-मार्कशीट प्रकरण
- गोपनीय विभाग के कई कर्मचारी भी फंस सकते हैं प्रकरण में
- अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री और मार्कशीट बनाने में घूस लेने के मामले में समिति केसदस्यों ने चार घंटे तक सोमवार को सस्पेंड कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच में गोपनीय कार्यालय के कई कर्मचारी भी फंस सकते हैं। पूरे प्रकरण में जांच समिति जल्द ही कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
यह था मामला
अमर उजाला ने 26 मार्च के संस्करण में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री-मार्कशीट और अन्य प्रमाण पत्रों को बनाने में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। स्टिंग ऑपरेशन से स्पष्ट हुआ था कि यूनिवर्सिटी में कर्मचारी दलालों के माध्यम से छह सौ रुपये से 15 सौ रुपये तक में रोजाना मार्कशीट और डिग्री दे रहे थे। जो छात्र घूस नहीं दे रहे थे वो महीने चक्कर काटने को मजबूर थे। प्रकरण का खुलासा होने पर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सख्त कार्रवाई करते हुए सारे रिकॉर्ड तलब करा लिए थे। जांच पड़ताल में सामने आया था कि रोजाना 30 से 40 डिग्री और प्रोविजनल प्रमाण पत्र घूस लेकर बनाए जा रहे थे। 25 मार्च को गाजियाबाद से आए बीडीएस के छात्र-छात्राओं को भी 13 प्रोविजनल प्रमाण पत्र नौ हजार रुपये घूस लेकर दिए गए थे।
विज्ञापन
वेटिंग के बाद भी रोजाना कैसे बना रहे थे प्रमाण-पत्र
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर कुलपति ने तत्काल रूप से छात्र समस्या निवारण केंद्र पर तैनात दो कर्मचारियों जॉनी शर्मा और कपिल कुमार को सस्पेंड कर दिया था। एक संविदा कर्मचारी को निवारण केंद्र से हटाते हुए जांच बैठा दी थी। पैसे लेकर डिग्री बनवाने में सहयोेग करने और रोजाना आने वाले फार्मों पर डिग्री देने की लापरवाही करने वाले अफसरों-कर्मचारियों पर जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी। तीन सदस्य उच्च स्तरीय कमेटी में सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज की डायरेक्टर प्रो. जयमाला, चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह और प्रो. एसके दत्ता को रखा गया था। समिति की तरफ से इस मामले में सस्पेंड कर्मचारियों को सोमवार को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया थ्रा। सोमवार को सदस्यों की बैठक चार घंटे तक चली। इसमें दोनों कर्मचारियों से तमाम सवाल पूछे गए। यह सवाल भी उठे कि जब प्रमाण पत्रों की वेटिंग एक-एक महीने तक की थी तो ऐसे में रोजाना 25 से 30 आवेदन करने वालों केप्रमाण पत्र कैसे बना दिए गए। इससे साफ है गोपनीय विभाग के कर्मचारी भी सब कुछ जानते थे। कर्मचारियों के बयान नोट करने के बाद अब समिति अपनी रिपोर्ट कुलपति प्रो. एनके तनेजा को सौंपेगी। रिपोर्ट केबाद गोपनीय विभाग के कई और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन