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बिल्वेश्वर महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह की शुरुआत
Updated Wed, 22 Aug 2018 01:48 AM IST
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युवाओं को स्वावलंबी और सदाचारी बनाती है संस्कृत
- बिल्वेश्वर महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह की शुरुआत
मेरठ। बिल्वेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत सप्ताह समारोह की शुरुआत हुई। शुभारंभ मेरठ मंडल के संस्कृत विद्यालय निरीक्षक डॉ. लोकेश कुमार वर्मा ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर किया।
उन्होंने संस्कृत छात्रों का आह्वान किया कि वह समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत को अपने दैनिक जीवन के व्यवहार की भाषा के रूप में प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि संस्कृत की शिक्षा प्राप्त युवकों को रोजगार की अधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। यह युवाओं को स्वावलंबी तथा सदाचारी बनाती है। इस अवसर पर विद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत संस्कृत भाषण, गीत, वेद पाठ, श्लोक पाठ व सुमधुर काव्य पाठ से संपूर्ण सभागार संस्कृतमय हो उठा। प्राचार्य डॉ. चिंतामणि जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संस्कृत भाषा को विश्व की आदि भाषा बताते हुए इसे विश्व में प्रचलित समस्त भाषाओं की जननी बताया। उन्होंने वर्तमान संदर्भ में संस्कृत को वैज्ञानिकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी बताया। मानवीय मूल्यों का संरक्षण संस्कृत को अपनाने से ही संभव है। डॉ. दिनेश दत्त शर्मा, डॉ. भरत भूषण चौबे, रवि कांत शर्मा, डॉ. पंकज झा, प्रियंका यादव, सुमन यादव एवं संजीव उनियाल आदि ने संस्कृत भाषा के गौरव एवं महत्व पर प्रकाश डाला। सभी ने विश्व में मैत्री एवं बंधुत्व की स्थापना में संस्कृत की उपयोगिता को प्रतिपादित किया।
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- बिल्वेश्वर महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह की शुरुआत
मेरठ। बिल्वेश्वर संस्कृत महाविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत सप्ताह समारोह की शुरुआत हुई। शुभारंभ मेरठ मंडल के संस्कृत विद्यालय निरीक्षक डॉ. लोकेश कुमार वर्मा ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर किया।
उन्होंने संस्कृत छात्रों का आह्वान किया कि वह समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत को अपने दैनिक जीवन के व्यवहार की भाषा के रूप में प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि संस्कृत की शिक्षा प्राप्त युवकों को रोजगार की अधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। यह युवाओं को स्वावलंबी तथा सदाचारी बनाती है। इस अवसर पर विद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत संस्कृत भाषण, गीत, वेद पाठ, श्लोक पाठ व सुमधुर काव्य पाठ से संपूर्ण सभागार संस्कृतमय हो उठा। प्राचार्य डॉ. चिंतामणि जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संस्कृत भाषा को विश्व की आदि भाषा बताते हुए इसे विश्व में प्रचलित समस्त भाषाओं की जननी बताया। उन्होंने वर्तमान संदर्भ में संस्कृत को वैज्ञानिकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी बताया। मानवीय मूल्यों का संरक्षण संस्कृत को अपनाने से ही संभव है। डॉ. दिनेश दत्त शर्मा, डॉ. भरत भूषण चौबे, रवि कांत शर्मा, डॉ. पंकज झा, प्रियंका यादव, सुमन यादव एवं संजीव उनियाल आदि ने संस्कृत भाषा के गौरव एवं महत्व पर प्रकाश डाला। सभी ने विश्व में मैत्री एवं बंधुत्व की स्थापना में संस्कृत की उपयोगिता को प्रतिपादित किया।
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