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संतों का संग ही सर्वश्रेष्ठ सत्संग: पं. शास्त्री
Updated Mon, 08 Jan 2018 02:33 AM IST
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संतों का संग ही सर्वश्रेष्ठ सत्संग: शास्त्री
मेरठ। कथा व्यास पं. रामप्रकाश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं जितनी कम होती जाती हैं, प्राणी उतना ही भगवान के निकट होने लगता है। यह संदेश उन्होंने सदर स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में कथा वाचन में दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्राणी की भौतिक कामनाओं में वृद्धि होती है, वैसे-वैसे अध्यात्मिक चिंतन से दूर हो जाता है। ईश्वर की प्राप्ति प्राणी की इच्छा से होती है। परंतु भोगों की प्राप्ति इच्छा से नहीं कर्म से होती है। भगवान की प्राप्ति जब भी होती है, पूरी होती है। भगवान मिलने के बाद कभी बिछड़ते नहीं हैं। शास्त्री ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में कंचन और कामिनी के प्रति आसक्ति समाप्त हो जाती है, उस जीव की जीभ पर सरस्वती होती है। संतों और भक्तों का संग ही सर्वश्रेष्ठ सत्संग है। यही जीव को परमात्मा तक पहुंचाने का साधन है। जो लोग परमार्थ में लगे रहते हैं, उन पर परमात्मा अपनी कृपा करते हैं। पाप करने से दुख और अशांति बढ़ती जाती है।
- श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर सदर में कथा व्यास पं. रामप्रकाश शास्त्री ने दिया संदेश
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मेरठ। कथा व्यास पं. रामप्रकाश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं जितनी कम होती जाती हैं, प्राणी उतना ही भगवान के निकट होने लगता है। यह संदेश उन्होंने सदर स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में कथा वाचन में दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्राणी की भौतिक कामनाओं में वृद्धि होती है, वैसे-वैसे अध्यात्मिक चिंतन से दूर हो जाता है। ईश्वर की प्राप्ति प्राणी की इच्छा से होती है। परंतु भोगों की प्राप्ति इच्छा से नहीं कर्म से होती है। भगवान की प्राप्ति जब भी होती है, पूरी होती है। भगवान मिलने के बाद कभी बिछड़ते नहीं हैं। शास्त्री ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में कंचन और कामिनी के प्रति आसक्ति समाप्त हो जाती है, उस जीव की जीभ पर सरस्वती होती है। संतों और भक्तों का संग ही सर्वश्रेष्ठ सत्संग है। यही जीव को परमात्मा तक पहुंचाने का साधन है। जो लोग परमार्थ में लगे रहते हैं, उन पर परमात्मा अपनी कृपा करते हैं। पाप करने से दुख और अशांति बढ़ती जाती है।
- श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर सदर में कथा व्यास पं. रामप्रकाश शास्त्री ने दिया संदेश